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ठंडी नहीं पड़ी है बिहार की सियासी जंग, अभी तो बहुत स्टंट बाकी है

बिहार में कांग्रेस और जेडीयू दोनों ही पार्टियों में इस समय खींचतान स्पष्ट देखी जा सकती है

Amitesh Amitesh Updated On: Sep 06, 2017 03:28 PM IST

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ठंडी नहीं पड़ी है बिहार की सियासी जंग, अभी तो बहुत स्टंट बाकी है

पिछले हफ्ते कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बिहार कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक चौधरी और बिहार कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह को दिल्ली तलब किया था.

दस जनपथ में हुई इस मुलाकात के बाद इन नेताओं ने बिहार कांग्रेस में किसी तरह की बगावत और फूट की खबर से इनकार किया था. उस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष ने इन दोनों नेताओं को कड़ी फटकार भी लगाई थी.

लेकिन, लगता है कांग्रेस आलाकमान की फटकार का कोई असर नहीं हुआ. अब एक बार फिर से कांग्रेस के सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया गया है. इस बार मुलाकात सोनिया गांधी नहीं बल्कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से हो रही है.

बिहार कांग्रेस के विधायकों को मंगलवार देर रात इस बाबत फोन किया गया जिसके बाद विधायक दिल्ली पहुंच रहे हैं. इन विधायकों के साथ राहुल गांधी की मुलाकात आज ही होनी थी, लेकिन, इतनी जल्दी ज्यादातर विधायक दिल्ली नहीं पुहंच पा रहे हैं. क्योंकि, अधिकतर विधायक अपने क्षेत्रों में फंसे हैं जहां बाढ़ के चलते हालात खराब हैं.ॉ

Rahul inaugurates Indira Canteen

राहुल गांधी इन विधायकों से मुलाकात में उनकी राय जानेंगे. खासतौर से अलग-अलग भी इन विधायकों से मुलाकत कर जानने की कोशिश होगी कि आखिरकार कांग्रेस में टूट को कौन हवा दे रहा है?

इस संभावित टूट का सूत्रधार कौन है. क्योंकि सियासी गलियारों में चर्चा यही है कि बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी इस टूट को हवा दे रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनकी नजदीकी ने कांग्रेस आलाकमान की त्योरियां चढ़ा दी हैं.

उधर, कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह ने दिल्ली आने से इनकार किया है. सदानंद सिंह ने कहा है कि हमने दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से इस मुद्दे पर मुलाकात कर ली है.

सदानंद सिंह के इस बयान से कांग्रेस के भीतर के विरोधाभास का पता चलता है. कुछ दिन पहले पटना में सदानंद सिंह के साथ नीतीश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मिलने की खबर आई थी, जिसके बाद कांग्रेस में बगावत को और हवा मिल गई.

अब कांग्रेस आलाकमान की तरफ से बिहार कांग्रेस की संभावित भगदड़ को रोकने के लिए हरसंभव कोशिश हो रही है. इसी का नतीजा है कि अब विधायकों को दिल्ली तलब किया गया है.

कांग्रेस के कुल 27 विधायकों में से किसी भी टूट और दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए दो तिहाई विधायकों की जरूरत होगी. मतलब 27 में से 18 विधायकों के बिना बिहार कांग्रेस में टूट असंभव है.

सूत्रों के मुताबिक, इतने विधायकों की संख्या का जुगाड़ हो गया है. बस इन विधायकों को सिर्फ एक भरोसे का इंतजार है. इन्हें इस बात का भरोसा चाहिए कि अगले विधानसभा चुनाव में उन्हें जेडीयू का टिकट भी मिल जाए.

वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेल्लारी मानते हैं कि कांग्रेस के कई ऐसे विधायक हैं जो पिछली बार बीजेपी के उम्मीदवारों को हराकर विधानसभा पहुंचे हैं. उन्हें लगता है कि बीजेपी उन सीटों पर अगली बार दावा ना कर दे. यही वजह है कि पाला बदलने से पहले ये सभी विधायक अगले चुनाव में अपना टिकट अभी से ही बुक करा लेना चाहते हैं.

कांग्रेस के भीतर की खींचतान तो चल ही रही है. लेकिन, अपने-आप को संख्या बल में मजबूत करने वाली जेडीयू में भी हलचल कम नहीं है. जेडीयू के भीतर शरद यादव गुट ने 17 सितंबर को जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुला दी है.

शरद यादव खुद पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार की तरफ से बुलाई गई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नहीं पहुंचे थे. लेकिन, अब उनकी तरफ से अपने-आप को जेडीयू का असली नेता बताया जा रहा है.

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दूसरी तरफ, जेडीयू ने शरद यादव को पार्टी से बाहर करने की पूरी तैयारी ही कर ली है. उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू से मुलाकात कर जेडीयू संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता खत्म करने की मांग की है. तर्क है कि शरद यादव पार्टी लाइन के खिलाफ विरोधी दलों के मंच पर जा रहे हैं.

अपने भीतर के अंतरविरोध से भी जेडीयू जूझ रही है. लेकिन, इस अंतरविरोध से अपने-आप को निकालने के लिए विधानसभा के भीतर अपनी ताकत को बढ़ाने की उसकी तैयारी भी चल रही है. जेडीयू की इसी कोशिश ने कांग्रेस को डरा कर रख दिया है.

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