विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

महागठबंधन: क्या 2019 में मोदी को चुनौती देंगे 'पुराने दोस्त' नीतीश कुमार?

नीतीश कुमार ने कहा है कि यूपी में बीजेपी की जीत की एकमात्र वजह है वहां बिहार की तरह के महागठबंधन का न होना

Vivek Anand Vivek Anand Updated On: Apr 04, 2017 10:44 AM IST

0
महागठबंधन: क्या 2019 में मोदी को चुनौती देंगे 'पुराने दोस्त' नीतीश कुमार?

बिहार के सीएम नीतीश कुमार की राजनीति के बारे में आप एकबारगी कुछ कह नहीं सकते. वो चौंकाते हैं... छकाते हैं... कभी-कभार हद से ज्यादा हैरान कर देते हैं. अभी तक उनकी बीजेपी से नजदीकियों की चर्चा हो रही थी. कई मीडिया विश्लेषकों ने तो यहां तक कह दिया था कि अब संकेत साफ हैं... नीतीश तो गए बीजेपी के साथ. 17 साल की दोस्ती को कोई भला यूं कैसे भुला सकता है.

लोग चर्चा करने लगे थे कि देखा आपने... छत्तीसगढ़ जाकर कैसे बीजेपी की रमन सरकार की तारीफ कर रहे हैं... अरे! कोई अपने दुश्मन के बारे में ऐसा खुला दिल रखता है क्या... शर्तिया इनकी सेटिंग हो गई है. अरे वो सब छोड़िए... देखिए पटना में गुरु गोविंद सिंह के 350वें प्रकाश उत्सव के मौके पर कैसे प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में बिछे जा रहे थे... प्रधानमंत्री मोदी नीतीश सरकार की शराबबंदी की तारीफ करें और नीतीश, प्रधानमंत्री मोदी के नोटबंदी की.

फिर नीतीश कुमार ने यूपी में बीजेपी के खिलाफ बने एसपी-कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में प्रचार भी तो नहीं किया... लालू यादव तो गए थे उनके पक्ष में माहौल बनाने... कुल मिलाकर मामला कुछ यूं बना लिया गया था कि लगने लगा था कि अब तो जेडीयू एक बार फिर से बीजेपी के साथ गलबहियां करने को तैयार है.

आरजेडी के कुछ नेताओं की जेडीयू से तनातनी ने भी माहौल बना दिया था. आरजेडी और जेडीयू की सेकेंड लाइन लीडरशिप एकदूसरे से उलझते रहे हैं. आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने खुले आम नीतीश सरकार को मारकर गर्दा उड़ा देने की बात कहकर गठबंधन की मर्यादा पर चोट कर चुके हैं. माहौल पूरा बना हुआ था. लेकिन नीतीश कुमार के एक बयान ने पूरे मामले को पलटा दिया.

तस्वीर: पीटीआई

पिछले दिनों जेडीयू की बीजेपी से नजदीकी की खूब चर्चा चली

राष्ट्रीय स्तर पर नीतीश का महागठबंधन का फॉर्मूला

बीजेपी के साथ जेडीयू की नजदीकी की सारी संभावनाओं को पलटते हुए नीतीश कुमार ने कहा है कि 2019 में बीजेपी को हराने के लिए देश में अब बिहार की तरह महागठबंधन की जरूरत है. बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की सारी पार्टियों को एकजुट हो जाना चाहिए. इतना ही नहीं नीतीश कुमार को यहां तक लगता है कि बिहार की तर्ज पर देशभर में बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन का प्रयोग शर्तिया सफल रहेगा.

ये भी पढ़ें: गुजरात में गाय पर कानून: गणतंत्र में सेंध लगा रहा धर्म

सोमवार को पटना में नीतीश कुमार ने कहा, '2015 में बिहार में आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस का महागठबंधन बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को हराने में कामयाब रहा था. अब गैर बीजेपी दलों के वैसे ही गठबंधन की राष्ट्रीय स्तर पर जरूरत है.'

यूपी चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की मुबारकबाद तक दे चुके नीतीश कुमार अब कह रहे हैं कि, 'यूपी में बीजेपी की जीत की एकमात्र वजह है वहां बिहार की तरह के महागठबंधन का न होना. अगर आप यूपी चुनाव के नतीजों में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के मिले वोटिंग परसेंट को मिला दें तो वो बीजेपी को मिले कुल वोटिंग परसेंट से करीब दस फीसदी ज्यादा मिलेगा.'

बिहार की तर्ज पर महागठबंधन की बात काफी वक्त से हो रही है. लेकिन नीतीश कुमार ने पूरा इंतजार करके, बिल्कुल ठीक वक्त पर गैर-बीजेपी दलों को एकसाथ आने का फॉर्मूला सुझाया है. उनके इस बयान के बाद उम्मीद की जा सकती है कि 2019 के लोकसभा चुनाव का माहौल अभी से सजने लगा है. बीजेपी की मोदी सरकार के खिलाफ एक महागठबंधन बनाने की तैयारियों की शुरुआत हो चुकी है. बस अब ये देखना बाकी है कि इन तैयारियों का अंजाम क्या होता है.

PATNA, INDIA - NOVEMBER 20: Former Bihar Chief Minister and RJD Chief Lalu Prasad Yadav hugs of JDU leader and Bihar Chief Minister Nitish Kumar during the oath taking ceremony on November 20, 2015 in Patna, India. JD-U leader Nitish Kumar, who led the Grand Alliance to victory in assembly elections, took oath as the Chief Minister of Bihar at the head of a 28-member ministry of his party, RJD and Congress legislators. (Photo by AP Dube/Hindustan Times via Getty Images)

बिहार में महागठबंधन की सरकार पर फिलहाल कोई आंच नहीं है

गैरबीजेपी दलों में नीतीश कुमार सबसे सर्वमान्य नेता हैं

इस बात पर गौर करना होगा कि बिहार में महागठबंधन की सरकार पिछले डेढ़ साल से सफलतापूर्वक से चल रही है. इस गठबंधन के दूसरे घटक दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव खुद बिहार की तर्ज पर देशभर में महागठबंधन की वकालत कर चुके हैं.

लालू प्रसाद यादव ने तो यहां तक कहा है कि अगर क्षेत्रीय दलों को अपना अस्तित्व बचाए रखना है तो बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन बनाना ही होगा. लालू यादव महागठबंधन की शर्त पर हर तरह के समझौते को तैयार दिखते हैं. उन्होंने ऐसे किसी गठबंधन में पीएम पद के दावेदार के तौर पर अपनी किसी भूमिका से पहले ही दावा पीछे खींच लिया है.

ये भी पढ़ें: छप्परफाड़ चुनावी जीत के बाद भी जब-जब सावधानी हटी, दुर्घटना घटी!

नीतीश कुमार ने ऐसे महागठबंधन की कल्पना को साकार करने के लिए कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों से शुरुआती कदम उठाने का आग्रह भी कर चुके हैं. उन्होंने कहा है कि, 'बिहार जैसे महागठबंधन को बनाने के लिए कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों को शुरुआती कदम उठाने चाहिए. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है इसलिए उसे ही इस बारे में आगे बढ़कर सोचना चाहिए. राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन महासफल होगा.'

नीतीश कुमार ने कहा है कि उनकी कुछ लेफ्ट पार्टियों से बात हुई है और वो सब 2019 में बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए एक कॉमन प्लेटफॉर्म पर आने को तैयार हैं.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस वक्त नीतीश कुमार गैरबीजेपी दलों के ऐसे किसी भी महागठबंधन के सबसे स्वीकार्य नेता हो सकते हैं. यूपी चुनाव के नतीजों के बाद अखिलेश और मायावती के कुनबे में सन्नाटा पसरा है और ऐसे में बिल्कुल सही वक्त पर नीतीश कुमार ने महागठबंधन का राग छेड़ दिया है. लालू यादव पहले ही ऐसे किसी फॉर्मूले के जरिए अपनी राजनीति को बचाए रखने की कल्पना कर चुके हैं और इस दिशा में जी जान से जुटे हैं.

पिछले दिनों लालू यादव कह चुके हैं कि बिहार में जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, यूपी में एसपी, बीएसपी और कांग्रेस, पंजाब में कांग्रेस, दक्षिण में लेफ्ट पार्टियां पूरा दम लगाकर एकसाथ आ जाएं तो 2019 की तस्वीर कुछ अलग हो सकती है. लालू यादव तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में इसी फॉर्मूले को अपनाकर महागठबंधन की कामयाब तस्वीर के सपने देखने लगे हैं.

नीतीश कुमार

फिलहाल नीतीश कुमार गैरबीजेपी दलों में सबसे सर्वमान्य नेता हैं

बीजेपी को उनके सेट एजेंडे पर हराया नहीं जा सकता

फिलहाल गैर-बीजेपी दलों के गठबंधन के समीकरण में नीतीश कुमार सबसे ताकतवर नेता हैं. यूपी में अखिलेश-राहुल की जोड़ी के नाकाम होने के बाद  उनकी दावेदारी को अब किसी की चुनौती भी नहीं है. वो महागठबंधन की अगुआई के लिए आदर्श नेता साबित हो सकते हैं.

ये भी पढ़ें: राहुल की ताजपोशी: नेतृत्व परिवर्तन से डर रहे हैं सोनिया के वफादार

पहले 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत से चोट खाए, फिर महागठबंधन के जरिए 2015 में बीजेपी को चोट पहुंचाए नीतीश कुमार शायद बीजेपी और मोदी मार्का राजनीति को सबसे ज्यादा करीब से समझते हैं. इसलिए उन्होंने साफ कहा है कि गैर बीजेपी वाले दल 2019 के लिए अपना एजेंडा खुद तय करें. अगर वो बीजेपी के सेट किए एजेंडा के विरोध को अपना एजेंडा बनाएंगे तो नाकाम होंगे.

नीतीश कुमार जानते हैं कि आज के हालात में बीजेपी के तय किए गए हिंदुत्व के एजेंडे का विरोध करके जीत हासिल करना नामुमकिन है. भारी-भरकम विश्लेषकों तक की राय है कि आज के हालात में मोदी का जितना विरोध होगा वो उतना ही बड़ा होते जाएंगे. नीतीश इस बात को समझते हैं. वो बिना मोदी की लकीर छोटी किए अपनी लकीर बड़ा करना चाहते हैं और इसकी तैयारी उन्होंने शुरू कर दी है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi