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नोटबंदी पर नरेंद्र मोदी और नीतीश की जुगलबंदी !

पीएम मोदी के नोटबंदी पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समर्थन दिया है.

Updated On: Nov 20, 2016 05:56 PM IST

Amitesh Amitesh

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नोटबंदी पर नरेंद्र मोदी और नीतीश की जुगलबंदी !

नोटबंदी पर विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए किसी कद्दावर विपक्षी नेता का समर्थन मिलना बड़ी राहत से कम नहीं है.

जब समर्थन अपने धुर- विरोधी की तरफ से हो तो फिर क्या कहने. पीएम मोदी के नोटबंदी पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समर्थन दिया है.

याद रखना होगा कि ये वही नीतीश कुमार हैं जिन्होंने केवल मोदी -विरोध के नाम पर बीजेपी के साथ पुराने रिश्ते की तिलांजलि दे दी थी.

अपनी निश्चय यात्रा के दौरान मधुबनी पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा ‘बाकी विपक्षी दलों की तरह हमें भी जनता को हो रही परेशानी का अंदाजा है, लेकिन, नोटबंदी पर फैसला काफी प्रभावकारी है, अब जरूरत है बेनामी संपत्ति के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने की. जिसे हमेशा कालेधन के रूप में रखा जाता है.’

नीतीश कुमार ने कहा नोटबंदी के इस कदम से जाली नोट और कालाधन पूरी तरह से साफ हो जाएगा.

नोटबंदी पर वोटबंदी में लगे सियासी दलों की तरफ से केवल हंगामा ही हंगामा दिख रहा है. संसद के भीतर जेडीयू नेता शरद यादव ने भी सरकार पर वार किया है.

एक तरफ संसद में शरद का सरकार पर वार तो दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार का सरकार के कदम पर इकरार करना साफ दिखाता है कि नीतीश मोदी के साथ किस तरह कदमताल कर रहे हैं.

जनता का भरोसा जीतने निकले नीतीश 

modi nitish

दरअसल, नीतीश कुमार इन दिनों बिहार की यात्रा पर निकले हुए हैं. पिछले एक हफ्ते से जनता का भरोसा जीतने निकले नीतीश कुमार इन दिनों जनता से लगातार रू-ब-रू हो रहे हैं.

जनता की नब्ज टटोलने में माहिर नीतीश को जनता की परेशानी का अंदाजा है, लेकिन, वो समझ रहे हैं कि इस कदम को जनता सकारात्मक तरीके से भी ले रही है. तभी नीतीश पीएम के इस कदम के समर्थन में खुल कर आ गए हैं.

मोदी का कदम भी कालाधन रोकने के लिए है. नीतीश भी पहले इस तरह के कदम उठा चुके हैं. खास तौर से बेनामी संपत्ति के मामले में नीतीश सरकार ने बिहार में सबसे पहले कड़ा कदम उठाया था, जिसकी वजह से कई अधिकारियों की संपत्ति सील की गई थी.

अब नीतीश इसी तरह के कड़े कानून बनाकर बेनामी संपत्ति के खिलाफ मोर्चा खोलने की मांग मोदी से कर रहे हैं.

दरअसल, मोदी और नीतीश दोनों का मिजाज एक समान है. नोटबंदी के मसले पर तमाम विरोध के बावजूद मोदी अपने लक्ष्य से नहीं भटक रहे. वहीं हाल बिहार में शराबबंदी का है. शराबबंदी के मसले पर नीतीश किसी भी सूरत में कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं.

नोटबंदी और शराबबंदी को लागू करने में दोनों को काफी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन, समाज सुधार और व्यवस्था परिवर्तन करने की इनकी जिद्द ही इन दोनों को कंटीली राहों पर चलने की ताकत दे रही है.

लेकिन, नीतीश कुमार का मोदी के समर्थन में बयान देना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. इस बात की चर्चा होने लगी है कि क्या आर्थिक आजादी के लिए मोदी के कदम पर नीतीश का समर्थन दोनों के बीच की दूरियों को पाटेगा? क्या नीतीश का बयान दोनों के रिश्तों के बीच की कड़वाहट को दूर कर पाएगा?

बदल रही है सियासत की तस्‍वीर  ये चंद सवाल हैं जिन सवालों के पीछे से बदलती सियासत की तस्वीर और तकदीर झांक रही है. सत्ता परिवर्तन से ज्यादा व्यवस्था परिवर्तन की कोशिश में लगे मोदी एकला चलो की राह पर निकले हैं. मुश्किलों भरी इस राह में किसी का साथ मिला तो वो भी नीतीश का. लेकिन, नीतीश का समर्थन कई सवाल खड़े करता है. जब एक तरफ कांग्रेस से लेकर लेफ्ट तक, माया से लेकर मुलायम तक सभी इस मुद्दे पर मोदी को खलनायक साबित कर चुनाव से पहले अपनी पोजिशनिंग करने में लगे हैं. वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार का बयान चौंकाने वाला जरूर है. सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं क्योंकि 2019 की लड़ाई से पहले ममता और केजरीवाल भी एक मंच पर आना चाहते हैं.

ममता को तो नोटबंदी पर लेफ्ट तक से परहेज नहीं है. ऐसे में मोदी के खिलाफ बड़े गठबंधन की बात करने वाले नीतीश, नोटबंदी पर मोदी का साथ देकर उनके खिलाफ मोर्चेबंदी कैसे कर पाएंगे?

इसके पहले जनसंघ के संस्थापकों में से एक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशताब्दी समारोह मनाने के लिए बने पैनल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को शामिल किया था. उसी समय दोनों के बीच रिश्तों को लेकर खुसफुसाहट शुरू हो गई थी. अब नोटबंदी पर दोनों की जुगलबंदी के बाद एक बार फिर से वही खुसफुसाहट शुरू हो गई है.

तो क्या यह महज इत्तेफाक है कि नीतीश पुराने सहयोगी मोदी के साथ दिख रहे हैं. संभव है कि ये समीकरण नए सियासी बदलाव की तरफ इशारा कर रहे हैं.

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