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यात्रा के जरिए राजनीतिक जमीन टटोलने निकलेंगे भूपेंद्र सिंह हुड्डा

भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक ज़माने में कांग्रेस हाईकमान के प्रिय सीएम थे. 2004 में भजनलाल जैसे मंझे राजनेता को पटकनी देकर भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सीएम बने थे

Updated On: Feb 24, 2018 11:15 AM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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यात्रा के जरिए राजनीतिक जमीन टटोलने निकलेंगे भूपेंद्र सिंह हुड्डा

हरियाणा में कांग्रेस की सरकार गए चार साल पूरे हो होने वाले हैं. बीजेपी की बहुमत की सरकार है. कांग्रेस का आरोप है कि हरियाणा की सरकार तमाम मुद्दों पर नाकाम साबित हुई है. खासकर कानून व्यवस्था के मामले में सरकार का स्कोर काफी कम है. बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह की 15 फरवरी को युवा हुंकार रैली फ्लॉप साबित हुई है. कांग्रेस के नेताओ को लग रहा है कि मौका अच्छा है. मनोहर लाल खट्टर की सरकार के खिलाफ जनता को लामबंद किया जाए. कांग्रेस के दो नेता यात्रा पर निकल रहे हैं.

मकसद हरियाणा सरकार की नाकामिंयो को जनता के सामने बेनकाब करना है. चुनाव ज्यादा दूर नहीं है. लेकिन सिर्फ यही मकसद विपक्ष का हो सकता है ऐसा नहीं है. कांग्रेस के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पलवल के होडल से 25 फरवरी को ‘जन क्रांति यात्रा’ का आगांज़ करने वाले है. जिसका कार्यक्रम तकरीबन 6 महीने चलेगा. जो हरियाणा के सभी विधानसभा मे जाएगा. लेकिन पेंच और भी है. हरियाणा कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष अशोक तंवर की 5 मार्च से साइकिल यात्रा शुरू हो रही है. जिसका नाम ‘हरियाणा बचाओ परिवर्तन लाओ रखा’ गया है. दोनो नेताओं को समर्थक अपने प्रोग्राम की कामयाबी में लगे हुए हैं.

हुड्डा की यात्रा 

हरियाणा के दस साल तक मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा होडल से जन क्रांति यात्रा शुरू कर रहे हैं. जो पूरे हरियाणा में जाएगी.इस यात्रा के ज़रिए हुड्डा सभी बड़े गांवो में जाने की योजना बना रहे हैं. यही नहीं उनके पुत्र सांसद दीपेंद्र हुड्डा ‘छात्र पंचायत’ और ‘युवा आक्रोश’ रैली करने वाले हैं. भूपेंद्र सिंह हुड्डा 2014 में सत्ता जाने के बाद राजनैतिक बियांबान में हैं. कांग्रेस के कई पूर्व मुख्यमंत्रियों का संगठन में एडजस्टमेंट हुआ. जिसमें अशोक गहलोत और अशोक चह्वाण शामिल हैं. लेकिन हुड्डा का समायोजन नहीं हो पाया है. इसलिए पार्टी के भीतर और जमीन पर अपनी ताकत बढ़ाने की कवायद में लगे हैं.

Bhupinder Singh Hooda

भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक ज़माने में कांग्रेस हाईकमान के प्रिय सीएम थे. 2004 में भजनलाल जैसे मंझे राजनेता को पटकनी देकर भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सीएम बने थे. कांग्रेस आलाकमान की कृपा उनके ऊपर थी. लेकिन राजनीति में युवा प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर की हुड्डा से नहीं बनती है.

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हालांकि हुड्डा के करीबी किसी भी गुटबाजी से इनकार करते हैं. भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यात्रा का मकसद ‘भाईचारा और बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार को हटाना है.’ सवाल ये उठता है कि मकसद एक है तो दो यात्रा क्यों निकल रही है. प्रदेश अध्यक्ष की यात्रा के साथ भूपेंद्र सिंह हुड्डा क्यों नहीं हैं.

अशोक तंवर की परिवर्तन यात्रा

कांग्रेस के सूबे के मुखिया अशोक तंवर 5 मार्च को ‘हरियाणा बचाओ परिवर्तन लाओ’ साईकिल यात्रा पर निकल रहें हैं. जिसका मकसद बीजेपी सरकार के खिलाफ अभियान चलाना है. ये यात्रा भी सभी 90 विधानसभा सीटों पर जाएगी. ये यात्रा बीच में फसल की कटाई बुवाई के सीजन में रोकी जाएगी. इसके जरिए अशोक तंवर अपनी राजनैतिक जमीन तैयार कर रहें हैं. अशोक तंवर हरियाणा में कांग्रेस के नॉन जाट फेस हो सकते हैं. इसलिए मेहनत भी कर रहें हैं. अशोक तंवर ने कहा कि कांग्रेस का फेस राहुल गांधी हैं. अशोक तंवर का कहना है कि ‘बीजेपी की सरकार हर फ्रंट में फेल हो गई है. राज्य में कानून व्यवस्था चौपट हो गया है. करप्शन भी बढ़ गया है. जनता का की काम नहीं हो रहा है. इसलिए वो जन जागरण अभियान पर हैं.’

ashok tanwar

कौन हैं अशोक तंवर

देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जेएनयू से पढ़ाई करने वाले अशोक तंवर यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. लोकसभा के सांसद 2009 में हरियाणा से बने, जिसके बाद कांग्रेस के सचिव बनाए गए. अपने संगठनात्मक क्षमता की वजह से हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष की कमान राहुल गांधी ने दी है. कांग्रेस का दलित चेहरा होने की वजह से राहुल गांधी से काफी करीब हैं.

2007 में यूपी विधानसभा के चुनाव के दौरान पुलिस लाठीचार्ज मे हाथ में फ्रैक्चर हो गया था. राहुल गांधी खुद यूपी के देवरिया जाकर थाने में मुलाकात की थी. तब से राहुल गांधी के काफी करीब हैं. हरियाणा मे 22 फीसदी दलित आबादी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने अध्यक्ष बनाया हैं.

हरियाणा का जातीय समीकरण

हरियाणा में भजनलाल को हटाकर कांग्रेस ने हुड्डा को मुख्यमंत्री बनाया था. जिसकी वजह जाट वोट है. जाट बहुसंख्यक हैं जिनकी आबादी तकरीबन 29 फीसदी है. जिसमें तकरीबन 7 फीसदी मुस्लिम जाट है. जिन्हे मूला जाट कहा जाता है. दलित 22 और ओबीसी 17 फीसदी है. 13 प्रतिशत फारवर्ड वोट है. मुस्लिम वोट 9 फीसदी है जिसमें मुला जाट भी शामिल हैं.

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हालांकि जाट वोट सबसे ज्यादा है. लेकिन हुड्डा के विरोधी आरोप लगाते है कि जाट का वोट कांग्रेस को नहीं बल्कि ओम प्रकाश चौटाला की आईएनएलडी को जाता है. जिसकी दलील ये दी जा रही है कि 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 20.6 फीसदी वोट मिले और सीट सिर्फ 15 मिल पाई.

सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी तीसरे नंबर की पार्टी बन गई. ऐसा नहीं है कि हरियाणा में सिर्फ भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही जाट नेता हैं. कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला भी जाट हैं. इसके अलावा विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी भी जाट है. जिनकी आपस में अदावत कम नहीं है. तीनों नेता अपने आपको जाटों का सही नुमाइंदा बताते हैं.

हुड्डा क समय कांग्रेस हुई कमज़ोर

कांग्रेस आलाकमान की नजदीकी की वजह से भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पार्टी में अपने विरोधियों को निशाना बनाया. जिसकी वजह से कांग्रेस के कई नेता पार्टी छोड कर चले गए. वर्तमान मोदी सरकार में मंत्री चौधरी बिरेद्र सिंह कांग्रेस के महासचिव थे. लेकिन हरियाणा की राजनीति में हुड्डा ने किनारे लगा दिया, नाराज होकर बीजेपी के साथ हो गए. राव इन्द्रजीत सिंह भी कांग्रेस से अलग हुए और बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार में मंत्री हैं. बिरेंद्र सिंह चाहते थे कि कांग्रेस 2014 में हुड्डा को सीएम उम्मीदवार घोषित ना करे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

New Delhi: Congress President Rahul Gandhi with Sonia Gandhi and other leaders arrives to preside the party's ‘Steering Committee' meeting in New Delhi on Saturday. PTI Photo by Arun Sharma (PTI2_17_2018_000163B)

सामूहिक ज़िम्मेदारी पर राहुल गांधी का ज़ोर

कांग्रेस में आपसी गुटबाजी खत्म करने के लिए राहुल गांधी लगातार कोशिश कर रहें हैं. दिल्ली में अजय माकन शीला दीक्षित खेमें के बीच सुलह इसका नतीजा है. 22 फरवरी को राजस्थान के नेताओं के साथ बैठक में राहुल गांधी नें सभी को साथ काम करने की हिदायत दी है. राज्य के प्रभारियों पर जिम्मेदारी भी सौंपी है. कांग्रेस अपनी पुरानी परंपरा पर लौटने का संकेत भी दे रही है. जिसमें मुख्यमंत्री का उम्मीदवार न घोषित किया जाए भी विकल्प है. हालांकि कांग्रेस ने पंजाब हिमाचल में सीएम कैंडिडेट घोषित किया है.

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कर्नाटक में सिद्धरमैया सीएम उम्मीदवार हैं. लेकिन पार्टी के महासचिव अविनाश पांडे का कहना है कि ‘पार्टी सामूहिक तौर पर चुनाव में जाएगी. चुनाव का चेहरा राहुल गांधी होंगें और सीएम चुनाव के बाद विधायकों की राय के बाद, आलाकमान की सहमति से बनेगा.’ 2004 में हुड्डा को इस फार्मूला का फायदा मिला और भजन लाल जैसे कद्दवार नेता को मात दे पाए थे. कांग्रेस में उठा-पटक और बढ़ सकता है. हर नेता अपने को सेंटरस्टेज में लाने की जुगत भिड़ाएगा.

बीजेपी के निशाने पर हुड्डा

भूपेन्द्र सिंह हुड्डा भले सीएम से हटे तीन साल से ज्यादा हो गए हैं. लेकिन बीजेपी के निशाने पर हुड्डा ही हैं. जींद की रैली में बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह नें कांग्रेस सरकार के करप्शन के आरोप दोहराए. जमीन घोटालों मे बीजेपी के नेताओ का आरोप पूर्व सीएम पर है.

सीबीआई ने हुड्डा के खिलाफ चार्जशीट भी दायर कर दी है. पूर्व सीएम के करीबी का आरोप है कि ये राजनैतिक साजिश है. इससे पहले हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह पर भी इस तरह का आरोप लगाया गया है. लेकिन हुड्डा पीछे हटने वालों में से नही है.

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