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भारत बंद: विपक्ष को एकजुट करने में कांग्रेस के हाथ 'सॉलिड हथियार' लगा है

कांग्रेस को ज्यादातर विपक्षी दलों का समर्थन मिला है, लेकिन इस बात की कोई गारंटी भी नहीं दिखती कि रामलीला मैदान का जोश और जज़्बा 2019 के चुनावों तक बना रहेगा

Updated On: Sep 10, 2018 10:00 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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भारत बंद: विपक्ष को एकजुट करने में कांग्रेस के हाथ 'सॉलिड हथियार' लगा है
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2019 का चुनाव काफी करीब है और शायद इसीलिए कांग्रेस कोई ऐसा मुद्दा चाहती है, जो सरकार के खिलाफ उसके आंदोलन को एक नई ऊंचाई तक पहुंचा दे. सरकार ने ऐसा एक मुद्दा विपक्ष को दे भी दिया है, जिसके सहारे वह लोगों तक पहुंच सके. वह मुद्दा है- पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की आकाश छूती कीमतों का. निश्चित तौर पर ये ऐसा मुद्दा है जिस पर सरकार को जनता को जवाब देते नहीं बनेगा.

अगर इस मुद्दे को ढंग से तराशा गया तो इसमें इतनी कूवत है कि इससे विपक्ष को वह मौका मिल जाएगा. जिससे वह सरकार को कोने में घेर सके.

मई 2012 में, जब यूपीए सरकार सत्ता में थी और पेट्रोल की कीमत 73.18 रुपए तक जा पहुंची थी, उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने इस महंगाई को ‘यूपीए सरकार की असफलता का सबसे बड़ा उदाहरण’ करार दिया था.

बीजेपी ने तब वामपंथी पार्टियों से हाथ मिला लिया था और तेल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ न सिर्फ भारत बंद का आह्वान किया था, बल्कि इस मुद्दे पर संसद में भी खूब हंगामा किया था. तब बीजेपी ने यूपीए सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया था कि पेट्रोल महंगा होने की वजह रूपए का अवमूल्यन औj अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि है. 2013 में बीजेपी ने कहा था, ' तेल की कीमतों में वृद्धि की वजह यूपीए सरकार की गलत आर्थिक नीतियां हैं.'

बहरहाल उसके पांच साल बाद आज तस्वीर बिलकुल उलट गई है और अब विपक्षी दलों के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तेल की आसमान छूती कीमतों पर एनडीए सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर पड़े हैं.

शायद पहली बार राहुल गांधी को तेल की कीमतों और राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मुद्दे पर विपक्ष के साथ-साथ उस आम आदमी पार्टी का भी साथ मिला है, जिसके साथ दिल्ली में कई मुद्दों पर कांग्रेस के झगड़े होते रहे हैं.

New Delhi: CPM leader Sitaram Yechury, CPI leader D Raja along with other leaders shout anti-government slogans during 'Bharat Bandh'   against steepest prices of Petrol, Diesel, LPG and  Raffle deal, in New Delhi on Monday, Sept,10 2018. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI9_10_2018_000113B)

दिल्ली के रामलीला मैदान पर सोमवार को शरद पवार, सोनिया गांधी, डॉ मनमोहन सिंह, शरद यादव और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह के साथ राहुल गांधी भी मंच पर दिखाई दिए. वामपंथी दलो ने चूंकि पूरे देश में अलग से इस मुद्दे पर धरना-प्रदर्शन किया था, इसलिए वह रामलीला मैदान की इस रैली का हिस्सा नहीं थी.

सीपीएम नेता बादल सरोज ने इस बारे में बयान दिया, “ तेल की कीमतों के मुद्दे पर तो हम कांग्रेस और विपक्ष के साथ हैं ही, अलग से धरना-प्रदर्शन का हमारा फैसला बहुत पहले का लिया गया फैसला था, इसलिए हम यहां नहीं थे.”

एक सुधार कांग्रेस ने अलबत्ता इस बार अपनी रणनीति में किया है. उन्होंने इस बार कांग्रेस के नेतृत्व में हुई इस रैली में मंच पर विपक्ष और आम आदमी पार्टी को जगह दी. कांग्रेस का दावा है कि सपा, बसपा और तृणमूल कांग्रेस ने इस बंद का बाहर से समर्थन किया है.

राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी ही है, जो समूचे विपक्ष को एक मंच पर कांग्रेस के साथ ले आई. मनीपाल विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर एम डी नलपत ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, “ विपक्षी दलों के लिए ये अचूक मौका है और यही उनकी एकता की वजह बन सकता है. बीजेपी के खिलाफ इस मुद्दे पर कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां खूब फायदा उठा सकती हैं. उनका फोकस फिलहाल मोदी को सत्ता से बाहर करना है और ये मुद्दा उन्हें खूब मदद कर सकता है.”

डॉ नलपत का कहना है,“ बीजेपी वही गलती कर रही है, जो चंद्रबाबू नायडू ने विश्व बैंक और आईएमएफ की नीतियों का पालन कर की थी और 2004 में आंध्र प्रदेश का चुनाव गंवा दिया था.” लेकिन सौ टके का सवाल ये है कि क्या 2019 के चुनावों में इस मुददे पर समूचा विपक्ष कांग्रेस के पीछे-पीछे चलेगा?

हालांकि सपा और बसपा ने इस बंद के समर्थन का वादा किया था, लेकिन रामलीला मैदान की रैली में अपनी गैर-मौजूदगी से इन दोनों दलों ने अपना रुख साफ कर दिया है.

New Delhi:  Former Congress president Sonia Gandhi, former Prime Minister Manmohan Singh and Congress President Rahul Gandhi during 'Bharat Bandh' protest called by Congress and other parties against fuel price hike and depreciation of the rupee, in New Delhi, Monday, Sept 10, 2018. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI9_10_2018_000138B)

रैली में मनमोहन सिंह ने कहा, “ परिस्थितियां इशारा करती हैं कि मामला हाथ से निकल गया है. किसान, कारोबारी और युवा सब अपने-अपने क्षेत्रों में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. सरकार आम लोगों से किए हुए वादे निभाने में असफल रही है. वक्त आ गया है कि केंद्र सरकार में बदलाव किया जाए और ये बहुत जल्दी होगा.”

हालांकि कांग्रेस को ज्यादातर विपक्षी दलों का समर्थन मिला है, लेकिन इस बात की कोई गारंटी भी नहीं दिखती कि रामलीला मैदान का जोश और जज़्बा 2019 के चुनावों तक बना रहेगा.

डॉ नलपत कहते हैं,“ मुझे नहीं लगता कि विपक्ष 2019 का चुनाव कांग्रेस के नेतृत्व में लड़ेगी या अगर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार का नाम घोषित किया, तो कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन करेगी.”

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