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विनिवेश टारगेट हासिल करने के लिए फायदे में चल रही कंपनियों के शेयर बेचने पर सवाल?

डिसइनवेस्टमेंट टारगेट हासिल करने के लिए सरकार मुनाफे में चल रही कंपनी में हिस्सा बेच रही है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Feb 22, 2017 11:00 PM IST

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विनिवेश टारगेट हासिल करने के लिए फायदे में चल रही कंपनियों के शेयर बेचने पर सवाल?

मोदी सरकार ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) की पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है.

बीईएल सार्वजनकि क्षेत्र की रक्षा उपकरण बनाने वाली भारत की सबसे बड़ी कंपनी है. बीईएल सरकार की नवरत्नों में शामिल कर रखा है.

सरकार सार्वजनकि क्षेत्र की इस कंपनी का पांच प्रतिशत शेयर बेच कर 1600 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है.

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का इस वक्त बाजार मूल्य 34 हजार 843 करोड़ रुपए का है.

कैसे पूरा होगा टारगेट

जानकारों का मानना है कि सरकार ने इस वित्त वर्ष में विनिवेश के लिए जो लक्ष्य निर्धारित कर रखा है, वह घाटे में चल रही कंपनियों के शेयर बेच कर पूरा नहीं होने वाला है.

इसलिए सरकार फायदे में चल रही है कंपनियों के शेयर बेच कर विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करना चाह रही है.

सरकार ने पिछले वित्तिय वर्ष 2016-17 के लिए में विनिवेश के जरिए 45 हजार 500 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य तय कर रखा था.

सरकार का तर्क इससे उलट है. सरकार के मुताबिक सरकार के खजाने में पैसा भी आएगा और साथ ही कंपनियां के कामकाज में बेहतर कुशलता और व्यावसायिकता सुनिश्चित होगी.

सरकार के फैसले पर सवाल

Narendra Modi

पर जानकार मोदी सरकार के इस फैसले पर सवाल खड़े कर रहे हैं. जानकारों के अनुसार सरकार का यह तर्क उन कंपनियों पर क्यों नहीं लागू होता, जो सालों से लगातार घाटे में चल रहे हैं. जिस पर सरकार हजारों करोड़ अब तक खर्च कर चुका है.

सरकार ने बीईएल की 1.11 करोड़ इक्विटी शेयर बेचने का फैसला किया है. सरकार के द्वारा एक शेयर का फ्लोर प्राइस 1498 रुपए रखा गया है.

कंपनी का यह फ्लोर प्राइस बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में मंगलवार को बंद हुए कंपनी के रेट 1559.9 रुपए से चार प्रतिशत कम हैं.

क्या है सरकार का टारगेट

सरकार बीईएल का शेयर बेचकर मोटे तौर पर लगभग 1700 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है. बिक्री के बाद बीईएल में सरकार की हिस्सेदारी 69.4 प्रतिशत रह जाएगी. अभी बीईएल में सरकार की हिस्सेदारी 74.4 प्रतिशत की है.

22 फरवरी को संस्थागत निवेशकों के लिए बिक्री होगी तो दूसरे दिन यानी 23 फरवरी को रिटेल निवेशकों को बोली लगाने का मौका दिया जाएगा. इस साल यह दूसरा मौका है जब, बीईएल की 5 फीसदी हिस्सेदारी बेची जा रही है. इससे पहले सरकार ने जनवरी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच कर 480 करोड़ रुपए जुटाए थे.

मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की कई कंपनियों की हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेची गई है.

विनिवेश टारगेट हासिल करने की कोशिश

सिंतबर 2016 में हिंदुस्तान कॉपर की 7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची गई थी. सरकार ने 7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच कर 400 करोड़ रुपए जुटाए थे.

सरकार ने इससे पहले अक्टूबर 2016 में एनबीसीसी की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 2200 करोड़ रुपए जुटाए थे.

अप्रैल 2016 में सरका ने एनएचपीसी में 11.36 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच कर 2 हजार 716 करोड़ रुपए जुटाए थे.

सरकार इसी साल फरवरी में आईटीसी की 2 फीसदी हिस्सेदारी बेच कर 6 हजार 700 करोड़ की जुटाए हैं.

सरकार चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक कंपनियों के शेयर बेचकर 31 हजार करोड़ रुपए जुटा चुकी है.

सरकार का लक्ष्य है 45 हजार 500 करोड़ रुपए जुटाने का. भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वित्त वर्ष 2016-17 के लिए 45 हजार 500 करोड़ रुपए विनिवेश का लक्ष्य निर्धारित किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया है.

पर साल 2017-18 के आम बजट में 72 हजार करोड़ विनेवेश के जरिए जुटाने का लक्ष्य रखा गया है.

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