S M L

सरकार ने GDP का पुराना डाटा जारी किया, UPA सरकार के 10 साल में ग्रोथ घटी

कुमार ने कहा कि सरकार का इरादा गुमराह करने या जानबूझकर कुछ करने का नहीं है

Updated On: Nov 28, 2018 11:00 PM IST

Bhasha

0
सरकार ने GDP का पुराना डाटा जारी किया, UPA सरकार के 10 साल में ग्रोथ घटी

सरकार ने जीडीपी का पुराना डाटा जारी किया और नया गणित समझाया है. नए आंकड़ों के मुताबिक, यूपीए के 10 साल के दौरान देश की आर्थिक ग्रोथ घटी थी. हैरानी की बात है कि यूपीए सरकार के दौरान जिस साल डबल डिजिट ग्रोथ बताई गई थी, अब उस साल भी एक फीसदी की गिरावट बताई जा रही है. इसके अलावा जिन तीन साल में 9 फीसदी की ग्रोथ हुई थी उसमें भी 1 फीसदी की कमी बताई जा रही है.

क्या है नया गणित?

दरअसल केंद्र सरकार ने ग्रोथ के नए आंकड़ों के लिए 2004-05 को नहीं बल्कि 2011-12 को बेस ईयर बनाया है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2010-11 में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रही थी. जबकि इसके पहले 10.3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था.

2019 आम चुनाव से पहले जारी किए गए आंकड़े

इसी तरह 2005-06 और 2006-07 के 9.3 प्रतिशत के वृद्धि दर के आंकड़ों को घटाकर  7.9 और 8.1 प्रतिशत किया गया है. इसी तरह 2007-08 के 9.8 प्रतिशत के वृद्धि दर के आंकड़े को घटाकर 7.7 प्रतिशत किया गया है. संशोधित वृद्धि दर के आंकड़े 2019 के आम चुनाव से पहले जारी किए गए हैं.

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि आंकड़ों के दो सेट में अंतर अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों मसलन खनन, उत्खनन और दूरसंचार क्षेत्र के आंकड़ों के हिसाब से नए सिरे से सुधार करने की वजह से आया है. कुमार ने कहा, ‘सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियाऩ्वयन मंत्रालय ने राष्ट्रीय खाता श्रृंखला के अपडेट के एक जटिल काम को पूरा किया है. नई श्रृंखला से आंकड़े निकालने के तरीके में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

उन्होंने कहा कि नई श्रृंखला और उसे समर्थन देती पुरानी श्रृंखला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना किए जाने योग्य है और यह संयुक्त राष्ट्र मानक राष्ट्रीय खाते के अनुरूप है.

यह पूछे जाने पर कि क्या यह संयोग है कि सिर्फ यूपीए के कार्यकाल के जीडीपी आंकड़ों में संशोधन किया गया है, कुमार ने कहा यह संयोग नहीं है. यह सीएसओ अधिकारियों द्वारा की गई कड़ी मेहनत का नतीजा है. उन्होंने कहा कि इसके लिए जो तरीका अपनाया गया है उसे प्रमुख सांख्यिकीविदों ने जांचा है.

सरकार ने जानबूझकर कुछ नहीं किया

कुमार ने कहा कि सरकार का इरादा गुमराह करने या जानबूझकर कुछ करने का नहीं है. वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में 2008-09 के वृद्धि दर के आंकड़ों को 3.9 से घटाकर 3.1 प्रतिशत किया गया है. 2009-10 के लिए इसे 8.5 से घटाकर 7.9 प्रतिशत और 2011-12 के लिए 6.6 से घटाकर 5.2 प्रतिशत किया गया है.

मौजूदा आंकड़े अगस्त 2018 में जारी पुरानी श्रृंखला के आंकड़ों से पूरी तरह विरोधाभासी हैं. उस समय राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा नियुक्त वास्तविक क्षेत्र सांख्यिकी समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि यूपीए सरकार के कार्यकाल 2004-05 से 2013-14 के दौरान अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर मौजूदा सरकार के पिछले चार साल की औसत वृद्धि दर से अधिक रही है.

इस रिपोर्ट में कहा गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में 2006-07 में वृद्धि दर 10.08 प्रतिशत रही थी जो 1991 में अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद से सबसे ऊंची वृद्धि दर है. आजादी के बाद से सबसे ऊंची वृद्धि दर 1988-89 में दर्ज की गई थी. उस समय राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे. इस समिति की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया गया. कुमार ने कहा कि उन्होंने जो तरीका अपनाया वह खामियों वाला था.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi