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MP: 'खूबसूरत' विधानसभा भवन सदस्यों के लिए बन रहा मौत की वजह?

विधानसभा के नए भवन में बीते 21 साल में अब तक एक विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और दो नेता प्रतिपक्ष सहित 32 विधायकों का निधन हो चुका है

Dinesh Gupta Updated On: Nov 29, 2017 12:09 PM IST

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MP: 'खूबसूरत' विधानसभा भवन सदस्यों के लिए बन रहा मौत की वजह?

स्वर्गीय इंदिरा गांधी के नाम पर बना मध्य प्रदेश विधानसभा का आलीशन भवन क्या विधायकों की बलि मांगता है? पिछले 21 साल में शायद ही कोई ऐसी विधानसभा रही हो, जिसमें विधायकों का असामयिक निधन न हुआ हो? वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने में अभी पूरे एक साल का समय बाकी है.

पिछले चार साल में 9 विधायकों की मौत ने सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही के विधायकों को भयभीत कर दिया है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक एक सुर में सरकार से विधानसभा भवन की वास्तु दोष को दूर कराने के लिए तंत्र-मंत्र और पूजन की मांग कर रहे हैं. दक्षिण मुखी हनुमान का मंदिर बनाने की मांग भी हो रही है. हांलांकि मंदिर की मांग खुले तौर पर नहीं की जा रही है.

विधानसभा का वास्तु दोष शांत करने के लिए हवन-पूजन का प्रयोग लगभग 20 साल पूर्व भी तत्कालीन अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी ने किया था. मध्य प्रदेश के विभाजन के लिए भी इस विधानसभा भवन को ही दोष दिया जाता है. नवंबर 2000 में मध्य प्रदेश का विभाजन कर अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनाया गया था.

विधानसभा का पुरान भवन मिंटो हॉल के नाम से जाना जाता था. मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवान देव ईसराणी कहते हैं कि राज्य का गठन 1 नवंबर, 1956 को हुआ. पंडित रविशंकर शुक्ल पहले मुख्यमंत्री बने. इसके दो महीने बाद 31 दिसंबर, 1956 को उनका निधन हो गया. ईसराणी कहते हैं कि उस वक्त मुख्यमंत्री के निधन की घटना को स्वभाविक ही माना गया था. भवन में दोष नहीं देखा गया.

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मध्य प्रदेश विधानसभा भवन को इसके आधुनिक डिजाइन के लिए 1998 में आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क अवॉर्ड मिला है

प्रवेश द्वार बदलने के बाद भी नहीं रूका मौतों का सिलसिला

वर्ष 1996 में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने विधानसभा के नए भवन का लोकार्पण किया था. लोकार्पण के दिन से ही भवन के वास्तु दोष की चर्चा हो रही है. प्रारंभ में भवन में इंट्री के लिए बनाए गए गेट को दोष दिया गया. गेट दक्षिण दिशा का था. इसे बदलकर पूर्व दिशा की ओर किया गया. मगर विधायकों का असामयिक निधन फिर भी नहीं रूका.

इस भवन में विधानसभा बदलने के बाद अब तक एक विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और दो नेता प्रतिपक्ष सहित 32 विधायकों का निधन हो चुका है. सबसे ज्यादा 10 विधायकों का निधन 11वीं विधानसभा में यानी वर्ष 1998 से वर्ष 2003 के बीच हुआ था. इसके बाद के वर्ष 2003 से 2008 के बीच 5 साल में कुल 7 विधायकों का आकस्मिक निधन हुआ था.

इनमें एक मंत्री लक्ष्मण गौड़ की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी मंत्रियों और विधायकों से कहा था कि वो अपने यात्रा में रफ्तार पर नियंत्रण रखें. जबकि एक अन्य विधायक सुनील नायक की वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में मतदान के दौरान हुई हिंसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वर्ष 2008 से 2013 के बीच कुल 6 विधायकों का आकस्मिक निधन हुआ.

इनमें विधानसभा अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी, उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और प्रतिपक्ष की नेता जमुना देवी शामिल हैं. गोहद के विधायक माखन लाल जाटव की वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के मतदान के दौरान हुई हिंसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जमुना देवी का निधन 81 वर्ष की उम्र हुआ. निधन के वक्त रोहणी 67 वर्ष के थे. जबकि हरवंश सिंह की उम्र 64 साल थी.

Satyadev Katare

वर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे सत्यदेव कटारे का अक्टूबर, 2016 में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था (फोटो: फेसबुक से साभार)

मौजूदा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे सत्यदेव कटारे का निधन 61 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के चलते हुआ. इस विधानसभा भवन में कुल 7 प्रवेश द्वार हैं. मुख्य द्वार के पास एक वॉटर टैंक बनाया गया है. इसमें अविभाजित मध्य प्रदेश का नक्शा भी बनाया गया है. राज्य के विभाजन के लिए इस नक्शे को भी दोष दिया जाता है. विधानसभा भवन में दोष देखने वालों का मानना है कि राज्य के नक्शे का जो हिस्सा पानी से कटता है, वह छत्तीसगढ़ राज्य का हिस्सा है. भवन को वास्तुकला के क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध आगा खान अवॉर्ड भी मिल चुका है.

विधानसभा भवन को बनने में लगे थे 13 साल

मध्य प्रदेश विधानसभा के भवन का डिजाइन वि­ख्यात वास्तुविद चाल्र्­स कोरिया ने तैयार किया था. पूरा भवन वृत्ताकार है. समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 573.25 मीटर है. इसमें सेंट्रल एयरकंडिशनिंग सिस्टम लगा हुआ है. भवन को कुल 6 सेक्टर में बांटा गया है. भवन में विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद के लिए भी हॉल है. इसमें लगभग 90 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है.

मध्य प्रदेश में उच्च सदन (अपर हाउस) की संवैधानिक व्यवस्था नहीं होने के कारण वर्तमान में इस हॉल का उपयोग सेमिनार और प्रशिक्षण के लिए किया जा रहा है. इसके प्रवेश द्वार पर 'जीवन वृक्ष' नाम की एक विशाल पेंटिंग है, जिसमें प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों को दर्शाया गया है. विधान परिषद के ठीक सामने मुख्य प्रवेश द्वार सांची द्वार की तरह है. इस पर कोलाज का कार्य किया गया है. सभागृह की छत का आकार गुंबदनुमा है. गुंबद में प्राकृतिक रोशनी आने की व्यवस्था है.

विधानसभा के हॉल में पहले 366 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था थी. छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद वर्तमान में 250 सदस्यों के बैठने का इंतजाम है. वर्तमान सदस्यों की संख्या 230 और एक नामजद सदस्य सहित कुल 231 सदस्य सदन में बैठते हैं.

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विधानसभा भवन के अंदर हॉल का नजारा

भवन के सेक्टर 3 के कोर्टयार्ड के मध्य में राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ है, जो कांसे का बना है. इसका वजन दो टन और ऊंचाई 12 फीट है. राजधानी भोपाल की अरेरा पहाड़ी पर बनाए गए इस भवन की जमीन ऊंची-नीची है. न्यूनतम और उच्चतम लेवल में 11 मीटर का अंतर है, जिसे इस कुशलता के साथ डिजाइन किया गया है कि यह फर्क महसूस नहीं होता.

विधानसभा भवन के अंदर एक मजार भी है. इस मजार पर चादर चढ़ाने के लिए प्रवेश विधानसभा गेट से ही होता है. विधानसभा के अल्पसंख्यक कर्मचारी यहां नमाज भी अदा करते हैं.

मुख्यमंत्री के लिए शुभ माना जाता है भवन

विधानसभा के वास्तु दोष पर राज्य के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग कहते हैं कि भवन में यदि कोई दोष लग रहा है तो इसे दूर करने में बुराई क्या है? प्रतिपक्ष के नता अजय सिंह भी इसी मत के हैं. विधायकों की मांग को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा ने विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर इसका अध्ययन कराने का भरोसा दिया है.

विधानसभा के जिस भवन में विधायकों को वास्तु दोष नजर आ रहा है, वह दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक कद बढ़ाने में सहायक रहा है. दिग्विजय सिंह ने इसी भवन में बैठते हुए वर्ष 1998 में राज्य में दूसरी बार कांग्रेस की सरकार बनाई थी. वो 10 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे.

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शिवराज सिंह चौहान पिछले 12 साल से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं

शिवराज सिंह चौहान के खाते में लगातार 3 बार बीजेपी की सरकार बनाने का श्रेय है. मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वो पिछले 12 साल से विराजमान हैं. राज्य में पहली बार इतने लंबे समय तक बीजेपी की सरकार है. बीजेपी के दो मुख्यमंत्री उमा भारती और बाबूलाल गौर की पारी छोटी रही है. अलबत्ता, प्रतिपक्ष के नेता की कुर्सी जरूर इस भवन में डगमगाती रही है.

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