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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला: आडवाणी, जोशी, उमा पर आरोप तय, अब क्या होगा

देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री और एक वर्तमान कैबिनेट मंत्री सहित 12 लोगों पर मामला चलेगा

Updated On: May 31, 2017 10:42 AM IST

Ajay Kumar

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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला: आडवाणी, जोशी, उमा पर आरोप तय, अब क्या होगा

कानून में 'साजिश' का अपराध बेहद दिलचस्प है क्योंकि यह केवल 'सहमति' पर आधारित है और इसमें इस सहमति का क्रियान्वयन जरूरी नहीं है. आईपीसी का सेक्शन 120ए दो या अधिक लोगों के किसी अपराध के लिए राजी होने को दंडनीय बनाता है जबकि सेक्शन 120बी किसी आपराधिक साजिश का हिस्सा होने को दंडनीय मानता है और इसे मदद के बराबर रखता है.

यही बात बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में वरिष्ठ बीजेपी नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों को दिलचस्प बनाती है. उनपर एक समान मकसद और निहित उद्देश्य के लिए भड़काऊ भाषण देने के लिए सहमत होने का आरोप है. अब तक संघ परिवार और बीजेपी नेताओं का यही कहना रहा है कि 1992 में बाबरी का विध्वंस अकस्मात और बिना योजना के हुई घटना थी. लेकिन अब लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत के लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, और मुरली मनोहर जोशी सहित 12 लोगों पर आरोप तय करने से संघ परिवार के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

इन आरोपों के बाद वह न केवल मस्जिद गिराए जाने के लिए जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं बल्कि उसके बाद हुए दंगों को भड़काने के लिए भी जिम्मेदार होंगे.

Babri

बीजेपी नेताओं की ओर दाखिल डिस्चार्ज पीटिशन को खारिज किए जाना या कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने से इस मामले के बारे में अधिक जानकारी नहीं मिलती है. आरोपियों पर धर्म के नाम पर वैमनस्यता बढ़ाने की साजिश करने, किसी एक वर्ग के अपमान के लिए एक धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने और उसका अपमान करने व सार्वजनिक उपद्रव के लिए बयान देने का आरोप है.

अदालत डिस्चार्ज अपील की सुनवाई करते वक्त केवल यह देखती है कि किसी आरोपपत्र में आरोपों से जुड़े तत्व ठीक हैं कि नहीं और अगर ऐसा होता है तो डिस्चार्ज की अपील नहीं मानी जाती है. इस मामले में यह तत्व दो से अधिक लोगों का होना और उनपर साजिश का आरोप था. इन तत्वों की जांच यह कहती है कि ऐसी साजिश की सहमति बनी थी. डिस्चार्ज पर फैसला केवल अभियोजन पक्ष की चार्ज शीट और जांच रिपोर्ट के आधार पर होती है.

जब एक डिस्चार्ज पीटिशन खारिज होती है तो कोर्ट आरोप तय करता है. इसके बाद आरोपियों को आरोप समझाए जाते हैं, जिसके बाद वे इसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं. अगर अपराध को अस्वीकार किया जाता है तो मामला की सुनवाई आगे चलती है.

मंगलवार की सुनवाई में यह देखा जाना था कि क्या ये नेता दोष स्वीकार करते हैं या नहीं. आरोपियों में कई उम्रदराज हैं, जिससे यह उम्मीद हो सकती थी कि कोई नेता प्रोबेशन की उम्मीद में और कार्यवाही की फजीहत से बचने के लिए दोष स्वीकार कर ले. लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. ऐसे में अब देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री और एक वर्तमान कैबिनेट मंत्री सहित उन नेताओं पर मामला चलेगा जो कभी वर्तमान सत्ताधारी पार्टी के कोर का हिस्सा थे.

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