S M L

रामपुर में जुड़वा भाइयों से कैसे जीतेंगे आज़म खान ?

आजम खान भले ही सपा का मुस्लिम फेस हैं लेकिन उनका फोकस खुद पर ही रहा है.

Updated On: Feb 08, 2017 07:55 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

0
रामपुर में जुड़वा भाइयों से कैसे जीतेंगे आज़म खान ?

रामपुर की सीट पर आजम खान का जलवा कायम रहा है. समाजवादी पार्टी के लिये आजम खान ट्रंप कार्ड हैं और इस सीट से लगातार चुनाव जीतते आए हैं. अब तक आजम खान 7 बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं. अगर आजम चुनाव नहीं हारते तो वो भी कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की तरह 9 चुनाव जीतने वाले नेता बन गए होते.

आजम खान ने जनता दल सेकुलर का दामन थामा और पहली दफे 1980 में विधायक बने.

1985 में भी विधायक बने लेकिन उनकी पार्टी बदल गई. लोकदल के टिकट पर चुनाव जीता. जीत का सिलसिला पार्टी दर पार्टी चलता रहा और पहली बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर 1993 में विधायक बने.

आजम की करिश्माई जीत पर साल 1996 पर कांग्रेस उम्मीदवार अफरोज अली ने ब्रेक लगाया. आजम खान चुनाव हार गए. लेकिन 6 साल बाद आजम खान फिर चुनाव जीत कर रामपुर के राजा बन गए.

इसके बावजूद ये मुस्लिम चेहरा समाजवादी पार्टी को रामपुर की बाकी मुस्लिम बहुल वाली सीटों पर जीत नहीं दिला सका. साल 2012 में समाजवादी पार्टी को केवल दो सीटें ही रामपुर में मिली.

यानी कहा जा सकता है कि आजम खान भले ही पार्टी का मुस्लिम फेस हैं लेकिन उनका फोकस खुद पर ही रहा है.

खुद के फोकस का ही नतीजा है कि सियासत के वंशवाद की बारात में उन्होंने अब अपने बेटे अबदुल्ला आजम को भी स्वार सीट से दूल्हा बनाया है. स्वार सीट से अब्दुल्ला आजम पहली दफे चुनाव लड़ रहे हैं.

लेकिन इस बार रामपुर का मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है. वजह ये है कि आजम खान के खिलाफ बीएसपी ने डॉ तनवीर अहमद को उतारा है. हालांकि रामपुर की सीट पर पिछले पंद्रह साल से कांग्रेस हमेशा दूसरे नंबर पर रही है. ऐसे में इस बार गठबंधन के बाद आजम खान जरुर सुकून महसूस कर रहे होंगे. लेकिन बीएसपी ने आजम के खिलाफ तनवीर अहमद को उतार कर मास्टरस्ट्रोक चला है.

PTI8_31_2016_000204B

(फोटो: पीटीआई)

साल 2012 के विधानसभा चुनाव में आजम खान के खिलाफ तनवीर अहमद ही कांग्रेस के टिकट से खड़े हुए थे. तनवीर चुनाव भले ही हार गए लेकिन वो दूसरे स्थान पर रहे थे. इस बार तनवीर अहमद को बीएसपी ने अपना सिपहसलार बनाया है. बीएसपी को उम्मीद है कि आजम खान को तनवीर अहमद करारी टक्कर दे सकते हैं. तनवीर अहमद भी दलित-मुस्लिम वोटों की उम्मीद बांधे हुए हैं.

लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि डॉ तनवीर अहमद के भाई जुड़वा हैं. दोनों मिलकर आजम खान के खिलाफ अलग अलग प्रचार कर रहे हैं. दोनों की हूबहू शक्ल तो प्रोफेशन में भी कोई फर्क नहीं.

रामपुर की सीट में बीएसपी और बीजेपी के बीच तीसरे और चौथे नंबर पर मुकाबला होता है. बीजेपी ने शिव बहादुर सक्सेना को मैदान में उतारा है. इससे पहले वो 1980 में आजम के खिलाफ चुनाव लड़े थे और 17, 815 वोट से हार गए थे.

शिवबहादुर सक्सेना बीजेपी की सीट से 1996 में स्वार विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे. इस बार समाजवादी पार्टी ने स्वार सीट से आजम खान के बेटे अबदुल्ला आजम को मैदान में उतारा है.

आजमखान की पहचान समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और तुनकमिजाज नेता के तौर पर होती आई है. आजम खान अपने बेबाक बयानों की वजह से भी सुर्खियों में शुमार करते हैं. रामपुर की गायब भैंसों को जिस तरह से यूपी पुलिस ने ढूंढ निकाला था उसमें पुलिस की काबिलियत नहीं बल्कि आजम खान के खौफ की रईसियत थी.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi