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रामभक्तों में कितना भरोसा बढ़ा पाएंगे योगी आदित्यनाथ?

यह पूरी कवायद योगी की उसी रणनीति का ही परिचायक है जिसके तहत योगी एक बार फिर से अयोध्या के मुद्दे को गरमाए रखना चाहते हैं.

Amitesh Amitesh Updated On: Oct 18, 2017 02:07 PM IST

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रामभक्तों में कितना भरोसा बढ़ा पाएंगे योगी आदित्यनाथ?

ऐसी मान्यता है कि त्रेता युग में राम के अयोध्या आगमन के बाद दीपावली मनाई गई थी, उसके बाद पूरे देश में दीपावली मनाई जाती रही है. लेकिन, इस कलयुग में भी इस बार राम की नगरी में दीपावली के जश्न की जोरदार तैयारी है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद अयोध्या में हैं और लंका विजय के बाद राम के अयोध्या आगमन की अगुआनी करते दिखेंगे.

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त्रेता में पुष्पक विमान से राम का आगमन हुआ था. लेकिन, अब कलयुग में पुष्पक विमान नहीं तो हेलीकॉप्टर से ही राम,सीता और लक्ष्मण अयोध्या की धरती पर उतरेंगे. रात को रंग बिरंगी रोशनी में नहाई अवधपुरी में सरयु के तट पर राम लीला का मंचन भी होगा. कोशिश है राम की नगरी में फिर से उस हजारों साल पुरानी घटना की तस्वीर को फिर से सबके जेहन में उकेरने की.

Ayodhya

लेकिन, योगी सरकार के अयोध्या में दीपावली के मौके पर दीये जलाने का मतलब कुछ और ही लगता है. अबतक अयोध्या में राम का मंदिर नहीं बन पाया है. बीजेपी के एजेंडे में राम मंदिर का निर्माण लगातार रहा है, लेकिन, राम मंदिर को लेकर आंदोलन में शिरकत करने वाली बीजेपी सत्ता में आने के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश या फिर आपसी सहमति से सुलझाने की बात कहकर टालती रहती है जो कि राम भक्तों को रास नहीं आती है.

भगवाधारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद एक कारसेवक रहे हैं जिन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के वक्त चलाए जा रहे आंदोलन में भी हिस्सा लिया था. योगी इस बात को समझते हैं कि अयोध्या में अबतक भव्य राम मंदिर का निर्माण नहीं हो पाया जिससे उनके जैसे लाखों कारसेवकों और राम भक्तों के मन में निराशा है.

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अब मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ की तरफ से उन सभी कारसेवकों का दिल जीतने की कोशिश हो रही है. उन राम भक्तों में भरोसा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है जो अबतक विरोधियों के ताने सुन रहे हैं, जो लगातार कहते हैं कि ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे लेकिन, तारीख नहीं बताएंगे.’

अयोध्या में दीपावली महोत्सव मनाकर योगी आदित्यनाथ की तरफ से यह दिखाने की कोशिश है कि हम ना राम को भूले हैं और ना ही अयोध्या को. राम मंदिर ना सही तो कम से कम राम की मूर्ति ही सरयु नदी के तट पर लगाकर अयोध्या की पहचान को जिंदा रखने की कोशिश की जा रही है.

यूपी बीजेपी के प्रवक्ता डॉ. चन्द्रमोहन मुख्यमंत्री के अयोध्या आगमन और इस भव्य आयोजन को जनभवानाओं के सम्मान का प्रतीक बता रहे हैं. उनका मानना है कि ‘पूरे यूपी  और खासतौर से पूर्वाचंल को इससे काफी लाभ होगा. अयोध्या का हम सबके लिए विशेष महत्व है, ऐसे में मुख्यमंत्री का वहां जाना प्रशंसनीय है और ऐतिहासिक भी.’

दरअसल, बीजेपी योगी आदित्यनाथ के अयोध्या में दीपावली बनाने को बड़ा गेमचेंजर मान कर चल रही है. बीजेपी को लगता है कि पार्टी कैडर्स में इससे एक बड़ा और सकारात्मक संदेश जाएगा.

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हिंदुत्व के फायर ब्रांड नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले योगी आदित्यनाथ की तरफ से अयोध्या की धरती पर राम का राज्याभिषेक करना अपने कोर वोटर को अपने साथ जोड़े रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है जो कई बार ठगा हुआ महसूस करते हैं.

Ayodhya

यह पूरी कवायद योगी की उसी रणनीति का ही परिचायक है जिसके तहत वो एक बार फिर से अयोध्या के मुद्दे को गरमाए रखना चाहते हैं. चर्चा के केंद्र में राम को रखना चाहते हैं, जिससे आस्था के इस मुद्दे पर जन भावनाओं को अपने पक्ष में किया जा सके. इस कवायद में योगी को बीच-बीच में सुब्रमण्यन स्वामी जैसे बीजेपी नेताओं का साथ भी खूब रास आता रहा है.

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