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चुनाव के समय संघ ने गरमाया राम मंदिर का मुद्दा, अब आगे क्या करेगी बीजेपी?

अयोध्या में स्वामी भद्राचार्य के बयान के बाद पुणे में आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी मंदिर मुद्दे पर फिर से अपनी बात दोहराते हुए कानून बनाने की मांग की

Updated On: Nov 25, 2018 09:56 PM IST

Amitesh Amitesh

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चुनाव के समय संघ ने गरमाया राम मंदिर का मुद्दा, अब आगे क्या करेगी बीजेपी?

25 नवंबर को राम की नगरी अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी की तरफ से बुलाई गई ‘धर्मसभा’ की बैठक में चित्रकूट धाम के स्वामी राम भद्राचार्य ने बयान दिया कि 11 दिसंबर के बाद केंद्र की मोदी सरकार राम मंदिर पर कोई बड़ा फैसला ले सकती है.

स्वामी राम भद्राचार्य ने दावा किया कि केंद्र सरकार 6 दिसंबर को ही कुछ करने की तैयारी में थी. लेकिन, इस वक्त चुनाव आचार संहिता होने के चलते ऐसा नहीं कर पाई. उनका दावा था, ‘मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने उन्हें इस बात का भरोसा दिलाया है और उन्हें उम्मीद है कि 11 दिसंबर के बाद कोई बड़ा निर्णय जरूर होगा. यह निर्णय अध्यादेश भी हो सकता है.’

संघ परिवार की तरफ से भी पूरा समर्थन मिला

स्वामी राम भद्राचार्य का बयान अयोध्या से आया तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी दिन राजस्थान के अलवर में चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस पर राम मंदिर की सुनवाई के मामले में देरी कराने का आरोप लगा दिया. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘जब सुप्रीम कोर्ट का कोई जज अयोध्या जैसे गंभीर संवेदनशील मसलों में देश को न्याय दिलाने की दिशा में सबको सुनना चाहता है तो कांग्रेस के राज्यसभा के वकील सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्तियों के खिलाफ महाभियोग लाकर उनको डराते धमकाते हैं. कांग्रेस न्याय प्रक्रिया में दखल देती है.’

अयोध्या की धर्म सभा में स्वामी राम भद्राचार्य का मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के हवाले से दावा तो दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री मोदी का चुनावी रैली में कांग्रेस पर मंदिर निर्माण में रोड़ा अटकाने का आरोप इस वक्त राम मंदिर मुद्दे पर गरमाए माहौल की कहानी बयां कर रहा है.

Security heightened ahead of VHP, Sena events in Ayodhya Ayodhya: Security personnel stand guard at Lakshman Kila ahead of the Ram Temple event separately organised by Shiv Sena and the Vishva Hindu Parishad (VHP) to be held tomorrow, in Ayodhya, Saturday, Nov.24, 2018. (PTI Photo/Nand Kumar)(PTI11_24_2018_000080B)

पहले बात वीएचपी की तरफ से बुलाई गई धर्मसभा की करें तो, धर्मसभा में साधु-संतों के साथ-साथ वीएचपी और संघ परिवार के कार्यकर्ताओं के जमावड़े के बीच राम मंदिर निर्माण को लेकर सरकार से कानून बनाने की मांग की जाती रही. अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के समर्थन में बुलाई गई इस धर्मसभा को लेकर संघ परिवार की तरफ से भी पूरा समर्थन मिला था.

रविवार 25 नवंबर को सुबह से ही धर्मसभा में जुटे साधु-संतों और ‘राम-भक्तों’ के जमावड़े ने पूरी अवध नगरी को ‘राममय’ कर दिया था. राम-नाम के जयघोष के बीच अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं की बस एक ही मांग थी कि जल्द से जल्द राम लला का मंदिर बनाया जाए. वीएचपी नेताओं से लेकर सभी साधु-संतों ने एक सुर में एक ही मांग की, अध्यादेश के जरिए मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जाए. वीएचपी ने साफ कर दिया कि किसी भी कीमत पर अयोध्या में राम जन्म भूमि के टुकड़े करने की कोशिश मंजूर नहीं होगी.

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दरअसल, संघ परिवार की तरफ से देशभर में राम मंदिर के पक्ष में माहौल बनाने की तैयारी की गई थी, लिहाजा, 25 नवंबर को एक ही दिन अयोध्या के अलावा, पुणे और बेंगलुरु में भी इसी तरह से धर्मसभा का आयोजन किया गया था. भारत के हर कोने को राम मय करने और वहां राम मंदिर के लिए माहौल बनाने की तैयारी में इस तरह का आयोजन पुणे और बेंगलुरु में भी किया गया था.

अयोध्या में स्वामी भद्राचार्य के बयान के बाद पुणे में आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी मंदिर मुद्दे पर फिर से अपनी बात दोहराते हुए कानून बनाने की मांग की. भागवत ने साफ कर दिया, ‘मंदिर के मसले पर लड़ना नहीं है लेकिन अड़ना है.’ उन्होंने कहा,  ‘एक साल पहले मैंने कहा था कि धैर्य रखना लेकिन अब धैर्य नहीं रखना है बल्कि जन जागरण करना है.’

मोहन भागवत का बयान ही संघ परिवार और वीएचपी की रणनीति को बयां कर रहा है. भागवत मंदिर निर्माण के लिए सरकार से कानून बनाने की मांग तो कर रहे हैं, लेकिन, ऐसा कोई काम नहीं करना चाहते जिससे सरकार को परेशानी हो. उनकी तरफ से मंदिर निर्माण के लिए लड़ने की बात नहीं करना और महज अड़ने की बात करना उनकी इसी रणनीति का परिचायक है.

कुछ महीने पहले ही विजयादशमी के मौके पर अपने संबोधन के दौरान उन्होंने सरकार से कानून बनाने की मांग की थी, लेकिन, संघ भी समझता है कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है. ऐसे में कानून बनाने या अध्यादेश लाने की जरूरत को सरकार की सहुलियत पर ही छोड़ देना चाहता है. मोहन भागवत का नहीं लड़ने की बात करना  लेकिन, मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन के बजाए जनजागरण की बात करना यही दिखा रहा है. दरअसल, संघ नहीं चाहता है कि चुनावी मौसम में किसी भी तरह से मोदी सरकार को मंदिर मुद्दे पर परेशानी का सामना करना पड़े.

RSS chief Mohan Bhagwat attend VHP's Hunkaar Sabha in Nagpur Nagpur: Shankracharya Vasudevanand Saraswati (C) addresses during the "Hunkaar Sabha" organised by Vishwa Hindu Parishad (VHP) to mobilise support in favour of Ram Mandir at Ayodhya, while RSS Chief Mohan Bhagwat, Sadhvi Rutumbara look on, in Nagpur, Maharashtra on Sunday. (PTI Photo) (PTI11_25_2018_000244B)

सरकार को बिना परेशान किए संघ मंदिर निर्माण चाहता है

बीजेपी की इस रणनीति को दिखा रहा है

संघ को पता है कि अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा जितना गरमाएगा और देशभर में जनजागरण अभियान के तहत जितना माहौल बनेगा, उसका सीधा फायदा बीजेपी को ही मिलने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस पर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश का आरोप लगाना संघ परिवार और बीजेपी की इस रणनीति को दिखा रहा है.

मध्यप्रदेश से लेकर राजस्थान तक कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगी है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंदिर-मंदिर जाकर अपने-आप को कभी ‘शिवभक्त’ तो कभी ‘रामभक्त’ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. अब मोदी की तरफ से कांग्रेस पार्टी को ही कठघड़े में खड़ा किया जा रहा है. बीजेपी कांग्रेस को राम विरोधी बता कर उसके सॉफ्ट हिंदुत्व की काट निकाल रही है.

संघ परिवार ने मंदिर मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का फैसला कर लिया है. लेकिन, बीजेपी इस पर किस हद तक जाएगी यह सब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम पर काफी हद तक निर्भर करेगा. 11 दिसंबर को आने वाला परिणाम तय करेगा, बीजेपी सरकार का आगे का कदम क्या होगा, जिसका संकेत स्वामी रामभद्राचार्य के दावे में भी दिख रहा है.

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