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बीजेपी के इस दांव से टोंक में सचिन की हालत अजहरुद्दीन की तरह न हो जाए?

टोंक को मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है और पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां से मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा किया था तो इस बार बीजेपी ने कांग्रेस का दांव कांग्रेस पर चला है

Updated On: Nov 19, 2018 03:54 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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बीजेपी के इस दांव से टोंक में सचिन की हालत अजहरुद्दीन की तरह न हो जाए?

राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार सभी दिग्गज नेताओं की साख दांव पर है. ये विधानसभा चुनाव बेहद निर्णायक होने वाला है क्योंकि छह महीने बाद ही लोकसभा चुनाव भी हैं. ऐसे में कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए न तो कोई रिस्क उठा रही है और न ही कोई चूक करना चाहती है. यही वजह रही कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ-सिंधिया फॉर्मूले के उलट राजस्थान में कांग्रेस ने अपने दोनों दिग्गज पूर्व सीएम अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को चुनाव मैदान में उतार दिया है.

अशोक गहलोत सरदारपुरा की सीट से तो सचिन पायलट टोंक से मैदान में हैं. पिछले बीस साल से बीजेपी के पास सरदारपुरा सीट का तोड़ नहीं है. बीजेपी के प्रत्याशी यहां अशोक गहलोत से चुनाव हारने के लिए ही मैदान में उतरते हैं. इस बार भी अशोक गहलोत अपनी पारंपरिक और सबसे सुरक्षित ‘जादुई’ सीट से मैदान में हैं लेकिन सचिन पायलट को नजदीकी मुकाबले वाली सीट मिली है.

सचिन पायलट के साथ रघु शर्मा

सचिन पायलट के साथ रघु शर्मा

राजस्थान में 50 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाता आया है. कई सीटों पर 40 हजार से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं. टोंक सीट भी मुस्लिम बहुल सीट है. इस विधानसभा सीट में 40 से 50 हजार मुस्लिम, 20 से 30 हजार गुर्जर, 35 हजार अनुसूचित जाति और 15 हजार माली जाति के वोटर्स आते हैं. कांग्रेस को यहां मुस्लिम गुर्जर और अनुसूचित जाति के वोटर्स पर भरोसा है. जबकि मुस्लिम वोटर्स की तादाद को देखते हुए ही बीजेपी यहां से लगातार आरएसएस समर्थित नेता को टिकट देती आई है.

लेकिन इस बार बीजेपी ने यहां से सचिन पायलट को टक्कर देने के लिए अपने कद्दावर मुस्लिम नेता यूनुस खान को उतारकर इतिहास बदल दिया है. युनूस खान डीडवाना से विधायक है. वो वसुंधरा सरकार में परिवहन मंत्री भी हैं. लेकिन आलाकमान का आदेश सिर आंखों पर. आदेश होते ही टोंक का टिकट पकड़ लिया और अब टक्कर देने के लिए तैयार हैं.

सवाल उठता है कि कहीं बीजेपी ने अनजाने में सीएम पद की रेस में शामिल अशोक गहलोत की मन की मुराद तो पूरी नहीं कर दी? क्या यूनुस खान मुस्लिम बहुल टोंक में सचिन पायलट को हराने का उलटफेर तो नहीं कर देंगे?  सवाल ये भी है कि पिछले विधानसभा चुनाव में टोंक से चुनाव हारने वाली कांग्रेस ने इस बार सचिन पायलट को टोंक से टिकट क्यों पकड़ाया? हालांकि टोंक सीट पर मुसलमानों के बाद संख्याबल के आधार पर गुर्जरों का स्थान आता है.

जो भी होगा वो भविष्य की बात है. लेकिन युवा सचिन पायलट के सामने राजनीति ने इम्तिहानों का सिलसिला शुरू कर दिया है. पहले तो वो ये नहीं चाहते थे कि गहलोत और खुद वो चुनाव लड़ें. लेकिन पार्टी ने जिम्मेदारी दे डाली. अब ये जिम्मेदारी भी ऐसी सीट से मिली जहां चुनाव जीतना इतना आसान नहीं है.

मुस्लिम बहुल टोंक से सचिन पायलट को टक्कर देने के लिए युनूस खान को उतारना बीजेपी का बड़ा दांव है. बीजेपी पहले टोंक से मौजूदा विधायक अजित सिंह मेहता को टिकट देने वाली थी. लेकिन सचिन पायलट के मैदान में उतरने के बाद उसने अपनी रणनीति ही बदल दी. अपने प्रत्याशी में बदलाव करते हुए आखिरी लिस्ट में टोंक से युनूस खान को टिकट दे दिया.

Vasundhara Raje

ये मुकाबला कुछ वैसा ही रोमांचक हो सकता है, जैसी संभावना झालरापाटन में सीएम वसुंधरा राजे बनाम मानवेंद्र सिंह होने वाली है. झालरापाटन सीट से वसुंधरा पिछले 15 साल से चुनाव जीतती आ रही हैं. लेकिन इस बार वसुंधरा के सामने बीजेपी के कभी कद्दावर नेता रहे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह चुनाव मैदान में हैं. मानवेंद्र सिंह पिछले महीने ही कांग्रेस में शामिल हुए हैं. ऐसे में जहां टोंक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की साख दांव पर है तो वहीं झालरापटन की सीट से वसुंधरा को भी कड़ी चुनौती मिलने वाली है. वैसे भी एंटी इंकंबेंसी में जनता के मूड को देखते हुए नतीजों के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है.

कांग्रेस के लिए ऐसे में जरूरी ये है कि टोंक की सीट से ज्यादा से ज्यादा निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतरें ताकि बीजेपी उम्मीदवार यूनुस खान के वोटों को काटा जा सके. क्योंकि ऐसा ही साल 2013 के विधानसभा चुनाव में हुआ था. उस वक्त कांग्रेस की मुस्लिम उम्मीदवार जकिया को टोंक में निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवार सईद सऊदी की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ा था. यहां बीजेपी उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी जबकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी.

Former Indian cricketer and Congress candidate Mohammad Azharuddin (2L) and his wife, former Miss India and actress, Sangeeta Bijlani (L) are pictured prior to Azharuddin filing his nomination in the upcoming elections in Moradabad on April 21, 2009. India is holding its 15th parliamentary general elections in five phases on April 23, April 30, May 7 and May 13 and the new parliament will be constituted before June 2. AFP PHOTO/ STR / AFP PHOTO / STR

राजस्थान में राजनीति पुराने ही दांव-पेचों पर चल रही है. साल 2013 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समुदाय को साधने के लिए मुस्लिम उम्मीदवार चुना था. 2014 के लोकसभा चुनाव में टोंक-सवाईमाधोपुर की सीट से पूर्व क्रिकेटर मो. अजहरुद्दीन को मैदान में उतारा था जो कि बीजेपी के उम्मीदवार गुर्जर नेता सुखबीर सिंह जौनपुरिया से चुनाव हार गए थे. लेकिन इस बार कांग्रेस ने बीजेपी की तरह ही दांव चलते हुए मुस्लिम समुदाय के नेता की बजाए सचिन पायलट को उतार कर गुर्जर समुदाय को साधने की कोशिश की तो बीजेपी की कोशिश मुस्लिम वोटर साधने की है. हालांकि सोचने वाली बात ये भी है कि पिछली बार के विधानसभा नतीजे के बाद टोंक में बीजेपी ने ये दांव क्यों चला?

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