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गुजरात चुनाव: वोटबैंक में सेंध लगाने को भड़काऊ प्रचार कर रहीं पार्टियां

कोई भी दल इस चुनाव में मतदाताओं के दिल की थाह नहीं ले पा रहा है, ताकि सटीक रणनीति बनाकर चुनाव में जीत दर्ज की जा सके

Updated On: Nov 27, 2017 06:03 PM IST

RK Misra

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गुजरात चुनाव: वोटबैंक में सेंध लगाने को भड़काऊ प्रचार कर रहीं पार्टियां

गुजरात में मतदाताओं के मौन ने इस बार राजनीतिक दलों को विचलित कर दिया है. कोई भी दल इस चुनाव में मतदाताओं के दिल की थाह नहीं ले पा रहा है, ताकि सटीक रणनीति बनाकर चुनाव में जीत दर्ज की जा सके. लिहाजा फतह हासिल करने के लिए 'साम दाम दंड भेद' का फॉर्मूला अपना लिया गया है. राजनीतिक दलों को लगता है कि कुछ रियायत के साथ प्यार, जंग और चुनावों में सब कुछ जायज होता है.

गुजरात विधानसभा चुनाव में अब एक महीने से भी कम वक्त बचा है. सभी दल जोर-शोर से प्रचार अभियान में जुटे हैं. ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी जैसी पार्टियां, चुनाव प्रचार के दौरान एक-दसरे के वोट बैंक को रिझाने का हर संभव प्रयास कर रही हैं. हमने हाल ही में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को गुजरात के कई मंदिरों में मत्था टेकते देखा है. ऐसा करके राहुल ने कांग्रेस के हिंदुत्व विरोधी पार्टी होने का आरोप धोने की कोशिश की है.

वहीं दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री मोदी की पार्टी बीजेपी के सदस्य गुजरात के मुल्ला-मौलवियों को पटाने का प्रयास कर रहे हैं. इसके अलावा कांग्रेस ने जाति का कार्ड खेलकर बीजेपी के सामने कड़ी चुनौती पेश कर दी है. चुनाव में हर एक वोट का महत्व होता है, लिहाजा हर वर्ग, धर्म और जाति के मतदाताओं के वोट हथियाने के लिए कोई भी दल जरा भी संकोच नहीं कर रहा है. जिससे साफ हो जाता है कि, गुजरात चुनाव में इस बार दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर होने वाली है.

कांग्रेस का सॉफ्ट हिंदुत्व और बीजेपी की घुसपैठ

कांग्रेस ने सॉफ्ट हिंदुत्व का एजेंडा अपनाकर एक नई रणनीति बनाई है. इसके तहत बीजेपी के उस प्रोपेगेंडा को बेअसर करने की कोशिश की जा रही है, जिसमें कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया जाता है. सॉफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे के तहत ही राहुल पिछले 50 दिनों में करीब 20 मंदिरों में मत्था टेक चुके हैं. अगर बीजेपी राहुल के मंदिरों में जाने से परेशान है, तो वहीं कांग्रेस भी मुस्लिम मतदाताओं में बीजेपी की घुसपैठ से विचलित है. दरअसल ऐसी खबर है कि मौलवियों की एक टीम गुजरात के अल्पसंख्यक बहुल्य इलाकों में बीजेपी के लिए प्रचार करेगी. लिहाजा बीजेपी की इस चाल को नाकाम करने और पेशबंदी के लिए 10 नवंबर को कांग्रेस माइनॉरिटी सेल की एक अहम बैठक हुई. इस बैठक में फैसला लिया गया कि मौलवियों की टीम जब बीजेपी के पक्ष में प्रचार करने मुस्लिम इलाकों में आएगी, तब कांग्रेस माइनॉरिटी सेल के लोग उन क्षेत्रों में 'गांधीगिरी' का सहारा लेंगे.

गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने मंदिरों में जाकर शीश नवाया है.

गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने मंदिरों में जाकर शीश नवाया है.

कांग्रेस माइनॉरिटी सेल के एक सदस्य ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि, 'हम मुस्लिम इलाकों में जाएंगे, और हाथ जोड़कर मौलवियों से गुजारिश करेंगे कि वह सिर्फ अपने धार्मिक कर्तव्यों पर ध्यान दें और राजनीति से दूर रहें.'

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वहीं गुजरात बीजेपी के सूत्रों से संकेत मिलता है कि आरएसएस से संबद्ध संगठन 'राष्ट्रीय मुस्लिम मंच' ने भी गुजरात के मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के लिए खास रणनीति बनाई है. अपनी रणनीति के तहत 'राष्ट्रीय मुस्लिम मंच' बीजेपी शासित राज्यों से मौलवियों की एक टीम को गुजरात भेजगा. मौलवियों की यह टीम अल्पसंख्यक मतदाताओं को बीजेपी के पक्ष में लुभाने की कोशिश करेगी.

बीजेपी ने इस बार एक भी मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया है. लेकिन मुस्लिम मतदाताओं पर पार्टी की खास नजर है. लिहाजा बीजेपी ने महाराष्ट्र के मुसलमानों के एक दल को प्रचार के लिए सूरत भेजा है. इस दल का नेतृत्व माइनॉरिटी मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इरफान अहमद कर रहे हैं. सूरत और उससे सटे भरूच समेत कुछ इलाकों में काफी संख्या में मुसलमान रहते हैं. माइनॉरिटी मोर्चा की टीम इन्हीं मुसलमानों पर फोकस कर रही है. हाल ही में मध्य गुजरात के एक मौलवी अपने अनुयायियों के साथ बीजेपी में शामिल हुए हैं, वह भी इन इलाकों में बीजेपी के लिए प्रचार करने उतर पड़े हैं. हालांकि, इस मौलवी का मानना है कि बाहरी लोगों के लिए स्थानीय मुस्लिम जनता को बीजेपी के पक्ष में कर पाना मुश्किल है.

मौलवी के मुताबिक, 'स्थानीय नेताओं को यहां के लोगों की अच्छी जानकारी है. वह इलाके के मुसलमानों के दिलो-दिमाग को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं. ऐसे में स्थानीय नेताओं का महत्व उन लोगों से ज्यादा है जो बाहर से आए हैं.'

मोदी का मुस्लिमों के प्रति झुकाव

सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ अहमदाबाद की ऐतिहासिक सिदी सैय्यद मस्जिद जाकर बड़ा संदेश देने की कोशिश की थी. मोदी पहली बार किसी मस्जिद में पहुंचे थे. ऐसा माना जाता है कि मोदी ने वह कदम गुजरात चुनाव के मद्देनजर बहुत सोच-समझकर उठाया था. सिदी सैय्यद मस्जिद दर्शन के बाद मोदी-आबे का अहमदाबाद में रोड शो, अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन की आधारशिला रखे जाने का कार्यक्रम और भारत-जापान व्यापार सम्मेलन को भी मोदी की चुनावी रणनीति का हिस्सा ही कहा जाता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जापानी प्रधानमंत्री आबे की अहमदाबाद यात्रा के दौरान मोदी सरकार ने जो कुछ किया, वह गुजरात के आगामी चुनाव के लिए बीजेपी का प्री-पोल प्रोपेगेंडा था.

PM Modi

नरेंद्र मोदी जिस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब सितंबर 2011 को अहमदाबाद में सद्भावना उपवास के दौरान उन्होंने एक मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल द्वारा भेंट की गई टोपी पहनने से इनकार कर दिया था. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस महीने के शुरूआत में जब एक मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी को साफा बांधना चाहा, तो उन्होंने इनकार नहीं किया. यानी मोदी ने एक मुसलमान के हाथ से खुशी-खुशी साफा बंधवा लिया.

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गुजरात में कांग्रेस के चक्रव्यूह में घिरी बीजेपी को राष्ट्रीय उलेमा परिषद (आरयूसी) से भी मदद मिल सकती है. आरयूसी का मुख्यालय उत्तर प्रदेश में है. राष्ट्रीय उलेमा परिषद ने अपने उम्मीदवारों के लिए गुजरात में 18 सीटों की मांग की है. दिलचस्प बात यह है कि आरयूसी ने अपनी मांग बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों के सामने रखी है. आरयूसी ने धमकी दी है कि अगर उसकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह गुजरात की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर देगी. आरयूसी ने उत्तर प्रदेश चुनाव में 50 उम्मीदवार खड़े किए थे, जिससे मुस्लिम वोट विभाजित हो गए थे और अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी को बड़ा फायदा पहुंचा था. आरयूसी अगर उत्तर प्रदेश वाली रणनीति दोहराती है तो, गुजरात में बीजेपी विरोधी वोटों का विभाजन आसान हो जाएगा. जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है.

गोधरा की घटना के बाद से नरेंद्र मोदी 'हिंदू हृदय सम्राट' की उपाधि पा चुके हैं. मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने जब राज्यव्यापी गौरव यात्रा निकाली, तब गुजरात में बड़े पैमाने पर मुस्लिम विरोधी फिजा बनी. जिसके नतीजे में साल 2002 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को भरपूर सीटें मिलीं. बाद में मोदी के दिल में राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति करने की लालसाएं जगीं. लिहाजा उन्होंने सितंबर 2011 में तीन दिवसीय सद्भावना उपवास रखा. इसके बाद मोदी ने अल्पसंख्यकों में पैठ बनाने की कोशिशें शुरू कर दीं. उन्होंने अहमदाबाद के एक व्यापारी जफर सरेशवाला के माध्यम से मुसलमानों को लुभाने की मुहिम शुरू की. इसके तहत जफर सरेशवाला को हैदराबाद की मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी का कुलपति नियुक्त किया गया.

साइबर कैंपेन में सांप्रदायिक जहर

अपनी तमाम रैलियों और रणनीतियों के साथ राजनीतिक दल साइबर कैंपेन पर भी खास जोर दे रहे हैं. लेकिन खराब बात यह है कि, साइबर कैंपेन में सांप्रदायिकता के मुद्दे को जमकर उछाला जा रहा है.

एक साइबर कैंपेन के तहत प्रचार किया जा रहा है कि, 'कांग्रेस आपको बेवकूफ बना रही है.'

आइए ऐसी ही कुछ सांप्रदायिक साइबर अभियानों के नमूनों पर नजर डालते हैं:

'इंदिरा गांधी ने एक बार गाय चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव जीता था, आज कांग्रेस गाय खाकर चुनाव जीतने का प्रयास कर रही है. होशियार रहना, कांग्रेस आपको बेवकूफ बना रही है.'

'कांग्रेस कहती आई है कि भगवान राम काल्पनिक हैं, लेकिन अब वह मंदिरों में जाकर वोट मांग रही है. होशियार रहना, कांग्रेस आपको बेवकूफ बना रही है.'

'राहुल खान ने कहा था कि मंदिर जाने वाले लोग महिलाओं को छेड़ते हैं, अब वह खुद गुजरात के मंदिरों में जा रहे हैं. होशियार रहना, कांग्रेस आपको बेवकूफ बना रही है.'

'कांग्रेस ने 100 करोड़ हिंदुओं को भगवा आतंकवादी कहा था. लेकिन आज वह सद्भाव के बारे में बोल रही है. होशियार रहना, कांग्रेस आपको बेवकूफ बना रही है.'

'कांग्रेस ने कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा पर कभी ध्यान नहीं दिया. लेकिन अब वह रोहिंग्या मुसलमानों के लिए अदालत में जा रही है. होशियार रहना, कांग्रेस आपको बेवकूफ बना रही है.'

मुस्लिमों के प्रति असुरक्षित माहौल बनाने की कोशिश

इस तरह के सांप्रदायिक और नफरत फैलाने वाले कई संदेश साइबर स्पेस पर छाए हुए हैं. जिन्हें व्हाट्सएप और उस जैसे अन्य माध्यमों से फैलाया जा रहा है. जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, सांप्रदायिक वीडियो और जहरीले होते जा रहे हैं. ऐसी ही एक जहरीली वीडियो क्लिप इनदिनों गुजरात में खूब वायरल हो रही है.

Rahul Gandhi in Dwarka

इस वीडियो क्लिप में एक दंपति को घर में चिंतित बैठे हुए दिखाया गया है. दंपति इसलिए चिंतित है क्योंकि शाम होने पर भी उनकी बेटी घर नहीं लौटी है. वीडियो के अगले सीन में दिखाया गया है कि, दंपति की बेटी रास्ते में है और अपने घर की ओर लौट रही है, लेकिन सीन की पृष्ठभूमि में अजान की आवाज आ रही है, जिससे दंपति की बेटी डर जाती है. उसके बाद जैसे ही बेटी घर पहुंचती है, चिंतित माता-पिता राहत की सांस लेते हैं. इसके बाद दंपति ये कहते हुए सुने जाते हैं कि, "बीस साल पहले, गुजरात में यही स्थिति थी, तब महिलाएं सुरक्षित नहीं थीं।" इसके बाद बेटी बोलती है कि, "वैसी स्थिति फिर कभी नहीं आएगी, क्योंकि गुजरात में मोदी हैं." यह वीडियो क्लिप 'आपका वोट, आपकी सुरक्षा' की टैगलाइन के साथ समाप्त होती है.

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सूत्रों का कहना है कि ऐसी और भी कई वीडियो क्लिप के जरिए मुसलमानों के प्रति भय और नफरत फैलाई जा रही है. साथ ही यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि हिंदू नेता के तौर पर मोदी की छवि बहुत मजबूत है. हालांकि बीजेपी प्रवक्ता भरत पंड्या ने ऐसी किसी साइबर कैंपेन में बीजेपी का हाथ होने से इनकार किया है. लेकिन कांग्रेस का दावा है कि समाज को बांटने वाली इस कैंपेन के पीछे सत्ताधारी दल का ही काम है.

कांग्रेस नेता डॉ. मनीष दोशी के मुताबिक, 'यह सीधी सी बात समझना बहुत आसान है कि कौन जनता के दिलो-दिमाग में डर पैदा करना चाहता है? कौन समाज में असुरक्षा की भावना जगाना चाहते है? जाहिर है, वह बीजेपी ही है.'

कांग्रेस का काउंटर कैंपेन

गुजरात में जारी सांप्रदायिक प्रचार अभियान को जवाब देने के लिए कांग्रेस ने भी कमर कस ली है. कांग्रेस ने इसके लिए ऑफिशियल काउंटर कैंपेन शुरू की है. जिसमें 'गुजरात ने डराओसो नहीं' (गुजरात को डराओ मत) टैगलाइन के साथ कई मीम शामिल किए गए हैं. इन मीम में गुजरात के पाटीदारों और दलितों पर हुए अत्याचारों का जिक्र किया गया है. वहीं नलिया और कच्छ में महिलाओं के यौन शोषण की भी चर्चा की गई है. इसके अलावा गुजरात के कई और अहम मुद्दों को भी उठाया गया है.

हाल ही में गुजरात में एक डराने वाली घटना सामने आई है. अहमदाबाद के पालड़ी इलाके में मुस्लिम समाज के कुछ घरों के दरवाजों पर लाल रंग से क्रॉस का निशान बना पाया गया. घटना की शिकायत तुरंत चुनाव आयोग से की गई. छानबीन के बाद पुलिस ने जो कहानी सुनवाई वो किसी के गले नहीं उतरी.

पुलिस ने बताया कि मुस्लिम घरों के बाहर लाल क्रॉस के निशान नगर निगम के एक अति उत्साही पर्यवेक्षक ने बनाए थे. उसने ऐसा इसलिए किया था ताकि कचरा उठाने वाले ट्रक के स्टॉपेज के स्थानों को चिह्नित किया जा सके. पुलिस की दलील से स्थानीय मुसलमान संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन उनके पास देखने और इंतजार करने के सिवा कोई और विकल्प भी तो नहीं है.

Gujarat Election Results 2017

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