S M L

ओवैसी ने किया सवाल- धारा 377-497 अपराध नहीं तो तीन तलाक पर सजा क्यों?

फैसला आने के बाद ओवैसी ने तीन तलाक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक नहीं कहा था

Updated On: Sep 27, 2018 01:48 PM IST

FP Staff

0
ओवैसी ने किया सवाल- धारा 377-497 अपराध नहीं तो तीन तलाक पर सजा क्यों?

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एडल्टरी पर फैसला आने के बाद फिर तीन तलाक का मुद्दा उठाया है.

अोवैसी का कहना है कि जब समलैंगिकता और व्याभिचार गैर कानूनी नहीं हैं, तो तीन तलाक में क्यों दंड का प्रावधान है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एडल्टरी पर फैसला सुनाते हुए धारा 497 (A) को खत्म कर दिया और कहा कि एडल्टरी अपराध नहीं होगी.

फैसला आने के बाद ओवैसी ने तीन तलाक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक नहीं कहा था, बल्कि इसे अलग रखा था. लेकिन कोर्ट ने धारा 377(समलैंगिकता) और 497(एडल्टरी) को असंवैधानिक कहा है. तो क्या अब मोदी सरकार इससे सबक लेते हुए अपने तीन तलाक के असंवैधानिक विधेयक को वापस लेगी?'

अोवैसी ने कहा, 'तीन तलाक विधेयक को कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए क्योंकि ये फ्रॉड है. विधेयक के पहले पेज में सरकार ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा था, बल्कि इसे अलग रखा था. '

ओवैसी का कहना है कि इस्लाम में निकाह एक कॉन्ट्रैक्ट है, ऐसे में इसमें कोई आपराधिक प्रावधान नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि तीन तलाक का विधेयक महिलाओं के खिलाफ जाता है. उनका तर्क है कि हमारा समाज पितृसत्तात्मक है, ऐसे में उन महिलाओं की देखभाल कौन करेगा, जिनके पति जेल में होंगे. उन्होंने इस विधेयक को संविधान की समानता के मूलभूत अधिकार के खिलाफ भी बताया है.

ओवैसी का कहना है कि सरकार को तीन तलाक को अपराध घोषित करने के बजाय उन लाखों महिलाओं की मदद के लिए कानून लाना चाहिए, जिनके पति उन्हें बिना तलाक दिए छोड़ चुके हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi