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कालेधन रखने वाले को वक्त दे रहे हैं तो बूचड़खानों को क्यों नहीं ?

ओवैसी का आरोप है कि इलीगल के साथ कुछ लीगल बूचड़खानों को भी बंद किया जा रहा है

Updated On: Mar 27, 2017 06:18 PM IST

FP Staff

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कालेधन रखने वाले को वक्त दे रहे हैं तो बूचड़खानों को क्यों नहीं ?

यूपी में अवैध बूचड़खानों को बंद कराने से बड़ी तादाद में लोग बेरोजगार हो गए है. ऐसे में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष व हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को इस कदम को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों को जल्दबाजी में बंद करने की बजाय उन्हें वक्त देना चाहिए.

किसकी गलती है ये?

ओवैसी ने संसद से बाहर कहा, ‘यह समाजवादी पार्टी की गलती है. पार्टी ने बूचड़खानों को नियमित नहीं किया.'

उन्होंने कहा, 'बीजेपी सरकार को उन्हें बंद करने के बजाय नियमित करने के लिए वक्त देना चाहिए. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उत्तर प्रदेश में न केवल अवैध, बल्कि कुछ वैध बूचड़खाने भी बंद किए जा रहे हैं.'

काले धन जमा करने वालों को क्यों दिया जा रहा है वक्त

ओवैसी ने कहा, 'यदि सरकार काला धन जमा रखने वालों को अपनी संपत्ति घोषित करने और उसे वैध बनाने का समय दे सकती है, तो फिर बूचड़खानों को नियमित करने के लिए समय क्यों नहीं दिया जा सकता?'

'इसका अर्थ यह है कि वे किसी खास समुदाय को निशाना बना रहे हैं.”

ओवैसी ने कहा कि भारत से भैंस के मांस के निर्यात का कारोबार 26,000 करोड़ रुपए का है. इनमें से आधी से भी ज्यादा निर्यात इकाइयां उत्तर प्रदेश में हैं.

ओवैसी ने कहा, 'सरकार के इन कदमों से आर्थिक समस्याएं पैदा होंगी. क्या सरकार इन निर्यातों को रोकना चाहती है? यदि ऐसा होता है तो पांच से 10 लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे.'

एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि सरकार को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि किसी को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वैध बूचड़खानों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि मांगों की पूर्ति की जा सके.

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