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आजकल राजनीति नहीं नीति पर काम कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल

आजकल सियासी शोर-शराबे से दूर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से फ़र्स्टपोस्ट की खास बातचीत

Pallavi Rebbapragada Pallavi Rebbapragada Updated On: Aug 06, 2017 11:35 AM IST

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आजकल राजनीति नहीं नीति पर काम कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आजकल कहां हैं? उनकी लंबी खामोशी ने सबको अचरज में डाल रखा है. न तो बीजेपी की तरफ से रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने पर उनका कोई बयान आया, और न ही चीन पर पीएम मोदी की चुप्पी पर.

यहां तक कि जब एक ट्वीट के जरिए पीएम मोदी ने मॉब लिंचिंग यानी भीड़ के हाथों हत्या की घटनाओं की निंदा की, तब भी केजरीवाल ने अपना मौन नहीं तोड़ा. दलितों और मुसलमानों की भीड़ के हाथों हत्या के खिलाफ जंतर-मंतर पर 'नॉट इन माई नेम' मार्च से भी केजरीवाल ने दूरी बनाए रखी.

केजरीवाल ने बिहार के सियासी भूचाल पर भी अपनी ज़ुबान खामोश रखी. ऐसा करके केजरीवाल ने शायद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एहसान को उतारने की कोशिश की, दरअसल साल के शुरुआत में जब आम आदमी पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर आरोपों की बौछार की थी, तब नीतीश ने खुलकर केजरीवाल का बचाव किया था और कपिल के आरोपों को बीजेपी की साजिश करार दिया था.

कभी बात-बात में ट्वीट करने वाले और हमेशा ट्रोल्स के निशाने पर रहने वाले केजरीवाल इन दिनों सिर्फ अपने नायब मनीष सिसोदिया के ट्वीट्स को ही रिट्वीट करते नजर आते हैं. यहां तक कि वो उन तस्वीरों को भी रिट्वीट करते हैं, जिनमें लोग सिसोदिया के साथ सेल्फी लेते दिखाई देते हैं.

आखिर कहां व्यस्त हैं केजरीवाल?

सियासी टकराव और कलह को छोड़िए, केजरीवाल पहले की तरह सोशल मीडिया पर फिल्मों की बात भी नहीं कर रहे हैं, और न ही लोगों को कोई खास फिल्म देखने की सलाह देते नजर आते हैं.

आखिर कहां गायब हैं केजरीवाल की सक्रियता, ड्रामा और सियासी शोरशराबा? केजरीवाल की खैर-खबर लेने के लिए फ़र्स्टपोस्ट की संवाददाता उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में स्थिति उनके निवास पर पहुंचीं, और केजरीवाल से सवाल किया कि 26 अप्रैल 2017 को एमसीडी चुनाव में बीजेपी के हाथों आप की शिकस्त के बाद से वो क्या कर रहे हैं?

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जनता संवाद में लोगों की समस्या सुनते केजरीवाल

पता चला कि केजरीवाल इन दिनों जनता संवाद में व्यस्त हैं. ये जनता संवाद मुख्यमंत्री निवास पर फिलहाल सप्ताह में तीन दिन होता है, लेकिन जल्द ही इसके रोजाना आयोजन की तैयारी है.

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इस जनता संवाद में कोई भी शामिल हो सकता है, और अपनी शिकायतों को मुख्यमंत्री और अलग-अलग सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों के सामने रख सकता है. जनता संवाद में दिल्ली के 17 सरकारी विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं, इनमें सामाजिक कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, यातायात और जल बोर्ड के प्रतिनिधि भी शामिल हैं.

अब काम करना है 

फ़र्स्टपोस्ट संवाददाता ने जब केजरीवाल से पूछा कि वो लंबे समय से लाइम लाइट से क्यों गायब हैं, तो केजरीवाल ने जवाब दिया, 'अब काम करना है.' केजरीवाल ने आगे कहा, 'राजनीति किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं होती, इसका असल मकसद आम लोगों की शिकायतों को दूर करना, उन्हें सुरक्षा, न्याय और विकास की गारंटी देना होता है.'

केजरीवाल ने स्पष्ट करते हुए कहा कि वो सार्वजनिक जीवन से दूर नहीं हैं, बल्कि फिलहाल तो वो इसके केंद्र में हैं. केजरीवाल के मुताबिक, 'जनता से मिलना-जुलना और उससे सीधे संवाद स्थापित करना एक राजनेता का कर्तव्य होता है. जनता संवाद में हम लोगों को उनकी समस्याओं का आसान और सीधा उपाय सुझाते हैं. वो लोग जिनकी शिकायतें अबतक कहीं भी नहीं सुनी गई हैं, उनके लिए जनता संवाद वो आखिरी जगह है जहां उन्हें न्याय मिल सकता है.'

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केजरीवाल के जनता संवाद में आए लोग

जनता संवाद के जरिए दूर कर रहे हैं लोगों की समस्या 

जनता संवाद में सुबह 9 बजे से लेकर 11 बजे के बीच करीब 70 से 90 याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं, लेकिन ज्यादातर शिकायतकर्ता तीन से चार लोगों के ग्रुप में आते हैं, इनमें मंडियों के अलग- अलग समूह, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और होम गार्ड्स भी शामिल होते हैं.

जनता संवाद में 41 साल का एक ऐसा मरीज भी नजर आया, जिसका लोकनायक अस्पताल में डायलिसिस चल रहा है, उसकी शिकायत थी कि अस्पताल के उपकरण बहुत पुराने हो चुके हैं.

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वहीं वजीरपुर इलाके की झुग्गी बस्ती में रहने वाली 30 साल की एक विधवा महिला भी जनता संवाद में हाजिर थी, जो शिकायत लेकर आई थी कि सिंचाई और बाढ़ विभाग ने उसकी झुग्गी को ढहा दिया है, जिससे वो बेघर हो गई है.

जबकि पहाड़गंज निवासी एक दंपति की शिकायत थी कि उन्हें पिछले एक साल से बीएसईएस को बिजली का दोगुना बिल भरना पड़ रहा है, वो भी बिजली अफसरों की गलती की वजह से, क्योंकि उन्होंने एक ही पते पर दो बिजली मीटर लगा रखे हैं.

रोचक बात तो ये है कि बिहार, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब से भी लोग अपनी शिकायतें लेकर जनता संवाद में आ रहे हैं. ऐसे मामलों को केजरीवाल कार्रवाई के लिए उनके संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बढ़ा देते हैं.

आखिर किस बात का है केजरीवाल को अफसोस?

केजरीवाल ने बताया कि, 'हमारे पास एमसीडी, डीडीए और दिल्ली पुलिस से संबंधित शिकायतें भी आती हैं, जबकि ये तीनों विभाग दिल्ली सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं, ऐसे में गंभीर पुलिस केसों की मैं व्यक्तिगत तौर पर उपराज्यपाल के साथ मिलकर जांच करता हूं. लोगों की शिकायतों पर हम एमसीडी कमिश्नरों को भी सूचित करते हैं, मैं आशा करता हूं कि दिल्ली के अन्य विभाग भी मेरे शब्दों को गंभीरता से लेंगे.'

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जनता संवाद में केजरीवाल

केजरीवाल ने अफसोस जताते हुए आगे कहा कि, 'लोगों की शिकायतों और परेशानियों के प्रति पूरा सिस्टम असंवेदनशील है, इसकी कई वजह हैं, पहली वजह तो ये है कि, हर विभाग के पास काम ज्यादा है, लेकिन काम करने वाले कम. कई सालों से नई भर्तियां भी नहीं हुई हैं, कई पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण कुछ लोगों पर काम का भारी बोझ है, वहीं दूसरी वजह, सरकार के पास विशेषज्ञों कमी है, जबकि तीसरी और सबसे अहम वजह सरकारी कर्मचारियों की उदासीनता है. स्थायी नौकरी और वक्त पर तनख्वाह मिलने की अकड़ में उन्हें लगता है कि वो लोगों की मदद क्यों करें.'

केजरीवाल ने आगे कहा कि, 'देश की बड़े सियासी दल जहां सिर्फ राजनीति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, वहीं वो जनता के साथ जुड़ना चाहते हैं.'

केजरीवाल का आज का दिन जनता संवाद से शुरू हुआ, अब उनका अगला मकाम दिल्ली सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री दफ्तर है, जहां वो दोपहर तक बैठकों में व्यस्त रहेंगे.

हर दूसरे दिन केजरीवाल उपराज्यपाल के साथ भी बैठक करते हैं, वहीं मौका मिलने पर निर्वाचन क्षेत्रों के दौरों पर निकल जाते हैं. बीते दो हफ्तों में केजरीवाल बवाना, नरेला, आजादपुर, नजफगढ़ जैसे क्षेत्रों के दौरा कर चुके हैं, जबकि हर रविवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच वो नई दिल्ली के निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करते हैं.

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