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हमें ईवीएम दें, 72 घंटे में दूध का दूध पानी का पानी कर देंगे: केजरीवाल

चुनाव आयोग के पास डाटा डिकोड करने का तंत्र उपलब्ध नहीं है तो हमारे विशेषज्ञ 72 घंटे में ऐसा कर सकते हैं

Updated On: Apr 03, 2017 09:19 PM IST

Bhasha

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हमें ईवीएम दें, 72 घंटे में दूध का दूध पानी का पानी कर देंगे: केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मध्य प्रदेश के भिंड में गड़बड़ी वाले ईवीएम के सॉफ्टवेयर से जुड़े डाटा को सार्वजनिक करने की मांग की है. केजरीवाल ने कहा कि, 'अगर चुनाव आयोग के पास डाटा डिकोड करने का तंत्र उपलब्ध नहीं है तो उनके विशेषज्ञ 72 घंटे में ऐसा कर सकते हैं.'

चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल खड़े करते हुये केजरीवाल ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में आयोग की इस दलील को नकार दिया कि ईवीएम में एक बार साफ्टवेयर लगाने के बाद ना तो इसे पढ़ा जा सकता है और ना ही इस पर कुछ लिखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर आयोग के पास ईवीएम के सॉफ्टवेयर को डीकोड करने का तंत्र नहीं है तो वह अपने विशेषज्ञों की टीम से गड़बड़ पायी गई मशीनों का सॉफ्टवेयर 72 घंटे में डीकोड करके इसकी रिपोर्ट दे सकते हैं.

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केजरीवाल ने आयोग को पत्र लिख कर यह प्रस्ताव दिया है. उन्होंने कहा कि आयोग गड़बड़ी वाली मशीनों के सॉफ्टवेयर को डीकोड करने का तंत्र नहीं होने की लाचारी बता कर इन्हें चुनाव प्रक्रिया से अलग कर देता है. उन्होंने दलील दी कि ईवीएम में छेड़छाड़ के पुख्ता सबूत मिलने के बाद चुनाव प्रक्रिया को गंभीर आशंकाओं के घेरे से बचाने के लिए उन्होंने अपने सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों की सेवाएं देने की पहल की है.

गड़बड़ी वाले ईवीएम का यूपी चुनाव में इस्तेमाल

केजरीवाल ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में ईवीएम की गड़बड़ी मिलने के दो दिन बाद कुछ और सबूत मिले हैं जो पूरे चुनाव व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हैं. इसमें चौंकाने वाली बात पता चली है कि भिंड में गड़बड़ी वाली मशीन का यूपी विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा ट्रायल के दौरान इस मशीन में वोट डालने के बाद वीवीपैट मशीन की पर्ची पर उत्तर प्रदेश की गोविंदपुरी सीट से प्रत्याशी सत्यदेव पचौरी का नाम छपा है.

उन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई मशीनों को मध्य प्रदेश में उप-चुनाव में इस्तेमाल के लिए भेजने को कानून का उल्लंघन बताया. केजरीवाल ने कहा कि कानून के मुताबिक एक बार इस्तेमाल हो चुकी मशीन का डाटा 45 दिन तक बरकरार रखना अनिवार्य है.

केजरीवाल ने सवाल किया कि चुनाव आयोग के सामने ऐसी क्या मजबूरी थी कि 11 मार्च को उत्तर प्रदेश का चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिन के भीतर उन्हीं मशीनों को दोबारा इस्तेमाल के लिए भेज दिया गया.

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