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बयानों से यू-टर्न लेने वाले केजरीवाल ने माफी मांग कर लिया 'पॉलिटिकली राइट टर्न'

विरोधी मजाक उड़ा सकते हैं कि दिल्ली में ‘मफलरमैन’ के बाद अब ‘माफीमैन’ की वापसी हुई है लेकिन केजरीवाल की 'माफीगीरी' उनकी राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है

Updated On: Mar 20, 2018 09:50 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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बयानों से यू-टर्न लेने वाले केजरीवाल ने माफी मांग कर लिया 'पॉलिटिकली राइट टर्न'

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार वो अपने किसी विवादित बयान या फिर किसी पर संगीन आरोप लगाने की वजह से सुर्खियों में नहीं हैं. बल्कि अपने पुराने बयानों पर खेद जताते हुए माफी मांगने की वजह से हैं.

राजनीति में यात्रा जरूरी है. केजरीवाल आरोप-यात्रा के पड़ावों को पार कर अब पश्चाताप के दौर में हैं. वो अपनी कही गई बातों को लेकर माफी मांग रहे हैं. विरोधी मजाक उड़ा सकते हैं कि दिल्ली में ‘मफलरमैन’ के बाद अब ‘माफीमैन’ की वापसी हुई है. लेकिन केजरीवाल की ये रणनीति उनकी राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है. वो वक्त के साथ राजनीति के दांव-पेंच में माहिर हो चुके हैं. तभी उन्होंने विवादों से पीछा छुड़ाने के लिए सिर्फ एक शब्द को अपना अस्त्र बनाया है. वो जानते हैं कि उनकी माफी से राजनीतिक हालात बदल सकते हैं. इसके पीछे साल 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त उनकी बनारस यात्रा का अध्याय एक बड़ा प्रमाण है.

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दिल्ली की सत्ता छोड़कर जब मोदी विरोध की यात्रा करने केजरीवाल बनारस पहुंचे और गंगा किनारे से खाली हाथ बैरंग दिल्ली लौटे तो उन्हें अहसास हुआ कि राजनीति में रहना है तो दिल्ली को सॉरी कहना है. उन्होंने माफी मांगी. बड़े बड़े बैनरों में उन्होंने कहा कि ‘मुझे माफ कर दीजिए. अब गलती नहीं करूंगा.’  दिल्ली की जनता ने ऐसा माफ किया कि 67 सीटें ही झोली में डाल दीं. बस यहीं से केजरीवाल ने अपनी राजनीति का पहला गुर सीख लिया.

वो ये जान गए कि कोर्ट कचहरी और बहस-विवाद से कुछ हासिल नहीं होने वाला है. पार्टी को मिले फंड के पैसे से वो कब तक वकीलों की फीस और हर्जाने की रकम भरेंगे. साथ ही कोर्ट में उलझे रहेंगे तो राजनीति कब करेंगे. वैसे भी मानहानि के मामलों में वो जिस तरह से फंसे हैं उनसे जय-जयकार भी नहीं होगी. न ही कोई राजनीतिक फायदा मिलेगा. मानहानि के मुकदमों का जवाब देने की बजाए अगर उस शक्ति और समय को दिल्ली में लगाएं तो फायदा भी मिल सकता है.

New Delhi: Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal and Deputy CM Manish Sisodia come out after meeting Lt Governor Anil Baijal at his residence in New Delhi on Friday. PTI Photo by Arun Sharma (PTI2_23_2018_000148B)

केजरीवाल ये भी जानते हैं कि अगर किसी भी मामले में वो लंबा फंस गए तो बाकी राजनीति फिर जेल से ही हो पाएगी. अब केजरीवाल इस स्थिति में भी नहीं हैं कि वो खुद को आम आदमी बताते हुए उसूलों की सूली पर चढ़ जाएं. वो ये जानते हैं कि एक साल बाद ही लोकसभा चुनाव हैं. ऐसे में उनको अपनी पार्टी के संगठन को मजबूत कर दूसरे राज्यों में आप के विस्तार की रणनीति बनानी है. लेकिन पार्टी का चेहरा ही जब कोर्ट के फरमान को तामील करने पर मजबूर होगा तो आप का क्या होगा?

उन्होंने दिल्ली को बोली गई सॉरी को ही अपनी बोली बना लिया है. अब वो माफी मांग कर जैसे-तैसे छुटकारा चाहते हैं ताकि कोई गैरजमानती वारंट या फिर भारी भरकम हर्जाना आप को मिले अबतक के चंदे का चूना न लगा दे. लेकिन केजरीवाल भूल रहे हैं कि सबकुछ वैसा कभी नहीं होता जैसा कि आम आदमी सोचता और चाहता है. वैसे भी केजरीवाल आम आदमी तो रहे नहीं और ऐसे में उन्हें राजनीति के मैदान में आम आदमी बनाने का मौका विरोधियों को मिला है. विरोधी भी मानहानि को अपना ब्रम्हास्त्र बना चुके हैं. वो भी केजरीवाल की सीमाओँ से भली-भांति वाकिफ हैं. ऐसे में केजरीवाल सिर्फ माफी से बच जाएं ये मुमकिन नहीं दिखाई देता है.

New Delhi: Union Finance Minister Arun Jaitley and Chief Economic Adviser Arvind Subramanian arrive for the signing of MoU between Department of Economic Affairs and NBCC (India) Ltd. for construction of housing project for Indian Economic Service (IES) officers, in New Delhi on Friday. The Minister also conferred awards to IES officers, winners under the Research Promotion Scheme. PTI Photo by Atul Yadav (PTI2_23_2018_000075B)

केजरीवाल की माफी-गीरी से विरोधियों के अलावा उनकी पार्टी के लोग भी हैरान हैं. पंजाब में तो भगवंत मान की राजनीति ही दांव पर लग गई है. अबतक अरविंद केजरीवाल पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम मजीठिया, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, कपिल सिब्बल और अवतार सिंह भड़ाना से माफी मांग चुके हैं.

लेकिन असली पेंच तो दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में बीजेपी नेता अरुण जेटली की वजह से फंसा है. ऐसी सुगबुगाहट है कि अरविंद केजरीवाल को माफ करने के लिए अरुण जेटली तैयार नहीं हैं. अरुण जेटली ने केजरीवाल पर मानहानि के दो मुकदमे किए हैं. दरअसल केजरीवाल ने जेटली पर डीडीसीए में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था तो साथ ही सीएम ऑफिस में पड़े छापों के पीछे भी जेटली को जिम्मेदार बताया था. ऐसे में अरुण जेटली अब निर्णायक जंग के लिए तैयार हैं और केजरीवाल की माफी-पॉलिटिक्स बस यहीं पर गच्चा खा रही है.

file photo

केजरीवाल पर मानहानि का केस दायर करने वाले कई बड़े नाम हैं. पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी नेता चेतन चौहान, बीजेपी सांसद रमेश विधूड़ी, शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव पवन खेड़ा जैसे नाम हैं तो वहीं उनकी पार्टी के दूसरे नेताओं पर भी कोर्ट में मानहानि के मुकदमे चल रहे हैं. बहरहाल केजरीवाल इस कोशिश में हैं कि उनके माफीनामे से ज्यादा से ज्यादा मानहानि के मुकदमें कम हो सकें. फिलहाल सियासी गलियारों में ये संदेश तो चला गया कि अपने बयानों से यू-टर्न लेने वाले केजरीवाल राजनीति में राइट टर्न लेना भी सीख चुके हैं.

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