S M L

विजय माल्या के बयान पर हमलावर कांग्रेस कितना सियासी फायदा उठा पाएगी?

माल्या के बयान के बाद भले ही उसमें भी कोई तथ्य नहीं हो, लेकिन, कांग्रेस की तरफ से राफेल की तरह इस मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाने की कोशिश तेज होगी

Updated On: Sep 13, 2018 10:12 PM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

0
विजय माल्या के बयान पर हमलावर कांग्रेस कितना सियासी फायदा उठा पाएगी?

देश छोड़ कर भागे शराब कारोबारी विजय माल्या के लंदन में दिए बयान के बाद सियासी बवाल मच गया है. विजय माल्या ने कहा कि ‘देश छोड़ने से पहले सेटलमेंट के लिए उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी.’ माल्या ने दावा किया कि ‘संसद भवन में उनसे मिलकर मैंने बैंकों के सेटलमेंट का ऑफर रखा.’

माल्या के इस बयान के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली की तरफ से सफाई भी आ गई. उन्होंने कहा कि ‘माल्या का दावा गलत है. 2014 से अब तक मैंने माल्या को कोई अप्वाइंटमेंट ही नहीं दिया. वह राज्यसभा सदस्य थे. कभी-कभी सदन में भी आते थे. मैं जब एक बार सदन से निकलकर अपने कमरे में जा रहा था तो वो साथ हो लिए.’ जेटली के मुताबिक, ‘माल्या ने चलते-चलते ही कहा कि वो सेटलमेंट की पेशकश कर रहे हैं, लेकिन, मैंने कहा कि मेरे साथ बात करने का कोई मतलब नहीं है. यह पेशकश बैंकों के सामने करे.’

विजय माल्या का बयान और उस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की सफाई आ गई. लेकिन, माल्या के बयान को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सीधा हमला बोल दिया. कांग्रस ने विजय माल्या के बयान के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली का इस्तीफा मांगा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अरुण जेटली और माल्या के रिश्ते के मुद्दे को उठाया.

राहुल गांधी ने कहा कि ‘आमतौर पर जेटली लंबा ब्लॉग लिखते हैं लेकिन ऐसा क्या हुआ कि कल उन्होंने छोटा सा ब्लॉग लिखकर यह बताया कि विजय माल्या ने उन्हें जबरदस्ती पकड़ा.’ राहुल गांधी, विजय माल्या और अरुण जेटली के बीच रिश्ते को साबित करने के लिए अपने नेता पीएल पुनिया को लेकर प्रेस कांफ्रेंस में आए थे.  पीएल पुनिया का दावा है कि उन्होंने खुद अरुण जेटली और विजय माल्या को बातचीत करते हुए देखा था.

पुनिया ने दावा किया कि ‘2016 के बजट सत्र के पहले दिन मैंने अरुण जेटली और विजय माल्या को एकसाथ खड़े होकर बात करते देखा. वो अंतरंग तरीके से बात कर रहे थे. सेंट्रल हॉल में करीब 5-7 मिनट तक उनकी बातचीत चलती रही. 1 मार्च 2016 को विजय माल्या वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात करते हैं. उसके बाद 3 मार्च को यह खबर आती है कि 2 मार्च को माल्या देश छोड़कर भाग चुके हैं.’

पुनिया ने बताया कि यह खबर पढ़कर मैंने हैरानी से कहा, 'अरे दो दिन पहले तो यह अरुण जेटली से मिले थे.' उन्होंने आगे यह कहा कि तब से लेकर अब तक मेरे किसी भी मीडिया बाइट को देख लीजिए, मैं लगातार यह कह रहा हूं कि विजय माल्या अरुण जेटली से मिले थे.

कांग्रेस की तरफ से इस मुद्दे पर पीएल पुनिया ने मोर्चा संभालते हुए दावा किया कि ‘मेरी चुनौती है कि वह सीसीटीवी फुटेज चेक करें. अगर मेरी बात सच साबित होती है तो वो राजनीति छोड़ दें, अगर मेरी बात सच नहीं साबित होती है तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा.’

पुनिया ने दोहराया कि वह पहली मार्च को आए. रजिस्टर में साइन किया कि वह जेटली से मिलना चाहते हैं. उनसे मिलकर लंदन भाग गए. पुनिया ने कहा, 'मेरा मानना है और मेरा आरोप है कि जेटली ने माल्या से कहा कि आप लंदन चले जाइए.'

New Delhi: Union Finance Minister Arun Jaitley addresses during the 90th Annual General Meeting of the FICCI, in New Delhi on Thursday. PTI Photo by Kamal Singh (PTI12_14_2017_000126B)

कांग्रेस इस मुद्दे पर सियासी हमले तेज करेगी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सवाल किया कि ‘ऐसा करने के लिए क्या अरुण जेटली के ऊपर कोई दबाव था.’ साफ है कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर काफी आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. कांग्रेस की आक्रामकता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मुद्दे पर प्रेस कांफ्रेंस करने के लिए सीधे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सामने आ गए. कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने और विजय माल्या के साथ जेटली की मुलाकात को साबित करने के लिहाज से एक गवाह के तौर पर अपने नेता पीएल पुनिया को भी सामने कर दिया.

दरअसल, विपक्ष की तरफ से सरकार पर माल्या का बचाव करने और देश से भगाने के लिए सेफ पैसेज देने का आरोप पहले से ही लगाया जाता रहा है. विजय माल्या पर बैंकों का बकाया है. लेकिन, उनके विदेश भागने के बाद कांग्रेस की तरफ से लगातार यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सख्ती दिखाने की बात कहने वाली सरकार किस तरह भ्रष्टाचार रोकने में नाकाम रही है.

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की रणनीति है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों और फिर आगे लोकसभा चुनाव तक इस मुद्दे को गरमाया जाए. हालांकि नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और ललित मोदी के मामले को लेकर भी पहले से ही कांग्रेस सरकार पर निशाना साधती रही है. लेकिन, विजय माल्या के हाल के बयान ने उसे चुनावों से पहले पूरे मुद्दे को नए सिरे से उठाने का मौका दे दिया है.

हालाकि कांग्रेस इस मुद्दे का कितना सियासी फायदा उठा पाएगी ये कहना कठिन है. क्योंकि कांग्रेस के इन दावों की पोल खोलने के लिए बीजेपी की तरफ से भी पूरी तैयारी की जा रही है. बीजेपी ने विजय माल्या के साथ राहुल गांधी-सोनिया गांधी के रिश्तों को उजागर कर उसके आरोपों की हवा निकालने की कोशिश की जा रही है.

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि ‘एक बार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि किंगफिशर को मुश्किलों से निकालना होगा.’ पात्रा ने सवाल उठाया कि मनमोहन सिंह के इस बयान का क्या मतलब है. उन्होंने सवाल उठाया है कि यह रिश्ता क्या कहलाता है?

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा का कहना था कि ‘उस वक्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ चाय पर मीटिंग के बाद माल्या लोन दिलाने में मदद के लिए धन्यवाद पत्र लिखते हैं.’ बीजेपी ने इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी पर भी सवाल खड़ा किया है. बीजेपी प्रवक्ता ने सवाल पूछा है कि ‘राहुल गांधी आप बताएं कि विजय माल्या के गुड टाइम्स में आपकी कितनी हिस्सेदारी है. किंगफ़िशर एयरलाइन्स विजय माल्या का था या राहुल गांधी और सोनिया गांधी का था.’

Vijay Mallya arrives to attend 'Magistrates Court in London,

बीजेपी की हमले का जवाब दूसरे बड़े हमले से देने की तैयारी

बीजेपी की तरफ से इस पूरे मामले में कांग्रेस पर पलटवार किया जा रहा है. बीजेपी यह दिखाना चाह रही है कि कांग्रेस और नेहरु-गांधी परिवार के साथ विजय माल्या के रिश्ते रहे हैं. ऐसा कर बीजेपी वित्त मंत्री अरुण जेटली पर लगे आरोपों की हवा निकालने की कोशिश कर रही है.

बीजेपी और जेटली की बातों को देखें तो यह बात साफ है कि जब विजय माल्या को जेटली से कोई अप्वांइटमेंट नहीं मिला तो फिर उनकी मुलाकात कैसे हुई. बतौर सांसद माल्या की संसद भवन में एंट्री थी और उस वक्त एक सांसद के नाते अगर चलते-चलते उन्होंने कुछ कहा भी तो उसका कितना मतलब होगा और इसका क्या असर होगा.

लेकिन,कांग्रेस की तरफ से कोशिश यही हो रही है कि इस मुद्दे को जोर-शोर से उछाला जाए. कांग्रेस राफेल डील के मुद्दे को भी उठा रही है, लेकिन, उस मुद्दे पर भी फ्रांस सरकार की तरफ से सफाई आने के बाद अब कांग्रेस के पास कोई ठोस तथ्य नहीं है. लेकिन, कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार हमले कर रही है. भ्रष्टाचार का आरोप लगातार लगा रही है. सरकार पर राफेल डील में गड़बड़ी का आरोप लगा रही है.

अब माल्या के बयान के बाद भले ही उसमें भी कोई तथ्य नहीं हो, लेकिन, कांग्रेस की तरफ से राफेल की तरह इस मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाने की कोशिश तेज होगी. लेकिन, तथ्य विहीन मुद्दे पर सियासी फायदा मिलने की उम्मीद करना कांग्रेस के लिए बेमानी होगी.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi