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कांग्रेस की राजनीति की वजह से लोग गांधी और पटेल के पिता का नाम नहीं जानते: अरुण जेटली

जेटली ने कहा कि जब जवाहर लाल नेहरू ने अपनी बेटी को विरासत सौंपी थी तभी वंशवादी लोकतंत्र की नींव रखी जा चुकी थी

Updated On: Nov 27, 2018 07:15 PM IST

FP Staff

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कांग्रेस की राजनीति की वजह से लोग गांधी और पटेल के पिता का नाम नहीं जानते: अरुण जेटली

पीएम मोदी के माता-पिता पर कांग्रेस नेताओं के कमेंट के बाद सियासी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी की मां की उम्र को चुनावी बहस का मुद्दा बना दिया गया, उनके पिता पर सवाल उठाए गए और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आप एक बड़े राजनीतिक रसूख वाले परिवार से आते हैं.'

उन्होंने कहा, 'इस पार्टी ने देश के कई बड़े नेताओं के योगदान को कम किया है.' राहुल गांधी का नाम लिए बिना जेटली ने कहा, 'लाखों राजनीतिक कार्यकर्ता जो साधारण परिवार से आते हैं, वह कांग्रेस के लीडरशिप टेस्ट में फेल हो जाएंगे क्योंकि यहां किसी की प्रतिभा कोई मायने नहीं रखती. कांग्रेस केवल एक सरनेम को ही राजनीतिक ब्रांड के रूप में स्वीकार करती है.'

जेटली ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए तीन सवाल पूछे. पहला सवाल यह है कि गांधीजी के पिता का नाम क्या था? दूसरा सवाल सरदार पटेल के पिता का नाम क्या था? और तीसरा सवाल यह है कि सरदार पटेल की पत्नी का नाम क्या था? जेटली ने कहा कि मेरे कई दोस्तों को इस बारे में नहीं पता होगा. यह कांग्रेस की त्रासदी से भरी राजनीति और उसके देश पर पड़े प्रभाव का परिणाम है.

जेटली ने कहा, 'गांधीजी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया था. उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के जरिए लोगों को जागरुक किया. वहीं सरदार पटेल ने सत्ता के हस्तांतरण की बात की और देश की 550 रियासतों को एक किया. उनके पिता का नाम झावेरभाई पटेल और उनकी पत्नी का नाम दिवाली बा था. वहीं गांधीजी के पिता का नाम करमचंद उत्तमचंद गांधी था.'

जेटली ने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा, 'लोग इनके बारे में नहीं जानते क्योंकि सालों से कॉलोनियों, शहरों, पुलों, एयरपोर्ट्स, रेलवे स्टेशनों, स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, स्टेडियमों आदि का नाम केवल एक परिवार के ऊपर रखा गया. इस परिवार को भारत के सबसे रसूखदार परिवार की तरह महिमामंडित किया गया.'

जेटली ने यह भी कहा कि जब जवाहर लाल नेहरू ने अपनी बेटी को विरासत सौंपी थी तभी वंशवादी लोकतंत्र की नींव रखी जा चुकी थी. देश को इसी वंशवादी राजनीति का खामियाजा भुगतना पड़ा. श्रीनगर के दो परिवार और नई दिल्ली में एक परिवार है जो जम्मू-कश्मीर और देश के भाग्य के साथ खेल रहे हैं.'

कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र न होने का आरोप लगाते हुए जेटली ने कहा, 'जब एक परिवार के करिश्मे को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा तभी भारतीय लोकतंत्र की मजबूती सामने आएगी. 2014 में यह साबित भी हो चुका है.'

उन्होंने कहा, '2019 का भारत 1971 के भारत से अलग है. अगर कांग्रेस चाहती है कि यह चुनाव कम चर्चित माता पिता के बेटे बनाम ज्यादा चर्चित माता पिता के बेटे से लड़ी जाए तो बीजेपी इस चुनौती को खुशी से स्वीकार करेगी.'

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