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अमित शाह ने हेमा मालिनी, सोम को चेताया, सोच-समझ कर बोलने की सलाह दी

बैठक में जिन नेताओं को चेतावनी दी गई उनमें संगीत सोम, हेमा मालिनी, सुरेश राणा, मुरली मनोहर जोशी, संजीव बाल्यान और राजेंद्र अग्रवाल के नाम शामिल हैं

Updated On: Aug 13, 2018 12:56 PM IST

FP Staff

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अमित शाह ने हेमा मालिनी, सोम को चेताया, सोच-समझ कर बोलने की सलाह दी

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने यूपी के अपने विधायकों को सख्त लहजे में चेताते हुए 2019 चुनावों के मद्देनजर सोच-समझ कर बोलने की सलाह दी है.

न्यूज18 की खबर के मुताबिक, बंद दरवाजे के पीछे चली एक बैठक में शाह ने विधायकों को क्षेत्रों का दौरा तेज करने और लोगों को केंद्र सरकार की योजनाओं के बारे में बताने-समझाने का निर्देश दिया.

साल 2014 की तर्ज पर जीत का लक्ष्य रखते हुए शाह ने पार्टी के सांसदों-विधायकों से अपने-अपने इलाके के गांवों का दौरा करने को कहा. नेताओं से एक गांव में कम से कम 20 घरों में जाकर चाय पीने और जनसंपर्क करने की सलाह दी गई.

शाह का यह निर्देश कुछ मीडिया रिपोर्टों को देखते हुए काफी अहम माना जा रहा है जिसमें कहा गया है कि 2019 आम चुनाव में आधे से ज्यादा मौजूदा सांसदों के टिकट कट सकते हैं. सूत्रों की मानें तो बैठक में जिन नेताओं को चेतावनी दी गई उनमें संगीत सोम, हेमा मालिनी, सुरेश राणा, मुरली मनोहर जोशी, संजीव बाल्यान और राजेंद्र अग्रवाल के नाम शामिल हैं.

जोशी कानपुर से सांसद हैं और उनके बारे में पार्टी को शिकायत मिलती रही है कि वे अपने क्षेत्र का शायद ही दौरा करते हैं. इसे लेकर लोगों में रोष की खबरें अक्सर आती रहती हैं.

विवादित बयान को लेकर अभिनेत्री से नेता बनीं हेमा मालिनी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. पार्टी को डर है कि इसका खामियाजा भावी चुनावों में भुगतना पड़ सकता है. मथुरा से सांसद हेमा मालिनी ने अभी हाल में कहा था कि अगर वे चाहें तो 'मिनट' में मुख्यमंत्री बन सकती हैं लेकिन वह खुद को 'बंधा हुआ' नहीं चाहतीं.

इसके पहले उन्होंने मुंबई स्थित कमला मिल्स में आग की घटना पर एक विवादित बयान देते हुए इसे बेतहाशा बढ़ती आबादी से जोड़ा था. इस घटना में 14 लोगों की मौत हो गई थी. सोम, राणा और बाल्यान 2013 मुजफ्फरनगर दंगा मामले में आरोपी हैं, जिसमें 62 लोगों की मौत हुई थी.

यूपी में बीजेपी चुनाव जीतने के लिए दोधारी नीति पर अमल कर रही है. विकास का नारा और पीएम मोदी को ब्रांड बताते हुए पार्टी जीत सुनिश्चित करने की तैयारी में है. सपा, बीएसपी, कांग्रेस और छोटी पार्टियों से जुड़े दलित वोटों को भी बीजेपी लुभाने की कोशिश में है. कैराना में पार्टी की हार के बाद समग्र विपक्ष के खिलाफ किसी कारगर रणनीति के बारे में सोचा जा रहा है.

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