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अमित शाह का यूपी दौरा, लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन दोहराने की चुनौती

मृत प्राय यूपी संगठन में नई जान फूंककर ऐतिहासिक सफलता दिलाना शाह की रणनीति का ही परिणाम रहा है.

Updated On: Jul 06, 2018 03:19 PM IST

Amitesh Amitesh

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अमित शाह का यूपी दौरा, लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन दोहराने की चुनौती
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लोकसभा चुनाव 2014 से ठीक एक साल पहले अमित शाह को बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव बनाकर उन्हें यूपी का प्रभार सौंपा गया था. 2013 का यह वो दौर था जब बीजेपी के लिए पूरे यूपी में कमल खिलाना किसी सपने से कम नहीं था. बीजेपी यूपी में तीसरे और चौथे नंबर की पार्टी बनकर रह गई थी.

पार्टी कार्यकर्ताओं में न ही कोई ऊर्जा थी और न ही किसी तरह का बड़ा लक्ष्य. उस वक्त लचर संगठन में नई जान फूंककर अमित शाह ने धीरे-धीरे यूपी के भीतर कार्यकर्ताओं के भीतर ऊर्जा का संचार कर दिया. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने से पहले ही शाह ने यूपी में अपनी सांगठनिक कुशलता के दम पर मजबूत और बड़ा नेटवर्क तैयार कर दिया था.

फिर मोदी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित होने के बाद इसी नेटवर्क ने पूरे यूपी की सियासी फिजा को ही बदल दिया. कभी एसपी तो कभी बीएसपी सरकारों के कार्यकाल को मुद्दा बनाकर शाह ने एक नए विकल्प का भरोसा दिया था. विरोधी भले ही अमित शाह की रणनीति को ध्रुवीकरण की राजनीति कहकर खारिज कर देते हैं. लेकिन, इसमें केवल ध्रुवीकरण ही नहीं था. छोटी-छोटी जातियों के समूहों से अलग-अलग मुलाकत कर उनको अपने साथ जोड़ने की उनकी कला ने ही पूरे यूपी में समीकरण बदल दिया.

गैर जाटव दलित और गैर यादव ओबीसी के अलावा अति पिछड़ी जातियों का बीजेपी के साथ आना अपने-आप में बड़े बदलाव का संकेत था. यह सबकुछ शाह की रणनीति का ही कमाल था. उनकी रणनीति का ही परिणाम था कि खुद मोदी वाराणसी से चुनाव मैदान में आ गए. नतीजा रहा कि यूपी के साथ-साथ बिहार तक इसका प्रभाव रहा.

कुछ लोग इसे मोदी लहर कहकर शाह की काबिलियत को खारिज भी करते रहे हैं, लेकिन, मृत प्राय यूपी संगठन में नई जान फूंककर ऐतिहासिक सफलता दिलाना शाह की रणनीति का ही परिणाम रहा है. यूपी में बीजेपी को 80 में से 71 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि सहयोगी अपना दल 2 सीटों पर जीतने में सफल रही थी.

फिर से ड्राइविंग सीट पर अमित शाह

Varanasi: BJP President Amit Shah with Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath during a function with 'Social Media Volunteers' in Varanasi on Wednesday, July 04, 2018. (PTI Photo) (PTI7_4_2018_000196B)

अब एक बार फिर अमित शाह ड्राइविंग सीट पर हैं. इस बार वो बतौर प्रभारी महासचिव नहीं बल्कि बतौर पार्टी अध्यक्ष मैदान में हैं. इस बार चुनौती और भी बड़ी है. क्योंकि यूपी में अपनी सीटों को बरकरार रखना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती रहने वाली है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की बातों से साफ भी हो जाता है. अपने दो दिनों के यूपी दौरे के वक्त भी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने माना है कि 'दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही गुजरता है.'

शाह यूपी की बादशाहत को समझ रहे हैं. उन्हें पता है कि यूपी के परिणाम पर बहुत कुछ निर्भर है. इसीलिए यूपी में दो दिनों तक डेरा डालकर अपनी रणनीति को अंजाम देने में लगे रहे. चार जुलाई को मिर्जापुर-वाराणसी और पांच जुलाई को आगरा के दौरे में अमित शाह ने पूरे यूपी को लेकर अपनी रणनीति को धार देने की कोशिश की है. उन्होंने संगठन से लेकर सरकार तक में हर तरह के लूप होल को खत्म करने की कोशिश भी की है.

दरअसल, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को इस बात का एहसास है कि पिछली बार की तुलना में इस बार मुकाबला कठिन होगा. अपने लोकसभा सांसदों के खिलाफ एंटीइंबेंसी का डर पार्टी को सता रहा है. लिहाजा अभी से ही सभी सांसदों के प्रदर्शन का फीडबैक लेने की कोशिश हो रही है. अपने दो दिनों की यात्रा के दौरान अमित शाह ने लोकसभा टोली के सभी सदस्यों से बात की है. इस दौरान उन्होंने पार्टी के विस्तारकों( जो कि पूर्णकालिक हैं) से भी पूरे प्रदेश का फीडबैक लिया है.

बीजेपी की चिंता तीन उपचुनावों में मिली हार के बाद बढ़ गई है. पहले गोरखपुर और फूलपुर का चुनाव और फिर कैराना का चुनाव लगातार तीन लोकसभा चुनाव में हार ने बीजेपी आलाकमान की चिंताएं बढ़ा दी हैं. क्योंकि इन तीनों सीटों पर बीजेपी का कब्जा रहा था. बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है क्योंकि इन तीनों सीटों पर विपक्ष ने मिलकर बीजेपी को चुनौती दी थी.

गोरखपुर और फूलपुर की सीटें मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के इस्तीफे से खाली हुई थी. फिर भी इन सीटों पर एसपी-बीएसपी की दोस्ती ने बीजेपी को पटखनी दे दी. कैराना लोकसभा के उपचुनाव में भी यह हाल हुआ. विपक्षी एकता के आगे बीजेपी को हार के लिए मजबूर होना पड़ा. बीजेपी को लग रहा है कि आने वाले दिनों में यूपी में एसपी-बीएसपी-आरएलडी और कांग्रेस का गठबंधन एक होकर चुनाव लड़ता है तो फिर पार्टी के लिए मुश्किलें हो सकती हैं.

पटेल, राजभर, मौर्य और दलित वोटबैंक को साथ जोड़े रखने की रणनीति

BJP National President Amit Shah in Mysore 

लिहाजा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह अभी से ही पटेल, राजभर, मौर्य और दलित वोटबैंक को अपने साथ जोड़े रखने को लेकर रणनीति बनाने में लगे हैं. यूपी में अपने सहयोगी ओमप्रकाश राजभर और अनुप्रिया पटेल के साथ भी संबंधों को लेकर भी अमित शाह ने अपने दौरे के वक्त पार्टी नेताओं से चर्चा की है. उनकी कोशिश हर हाल में इन सहयोगी दलों को अपने पाले में बनाए रखने की है.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह बूथ स्तर तक संगठन को मजूबत करने की कोशिश में लगे हुए हैं. अपने दौरे के वक्त उन्होंने पार्टी नेताओं को बूथ मैनेजमेंट पर फोकस करने की नसीहत दी है. बीजेपी केंद्र के साथ-साथ यूपी में भी सत्ता में है. लिहाजा सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल को लेकर अमित शाह लगातार पार्टी नेताओं को टिप्स दे रहे हैं. उन्होंने पार्टी नेताओं को साफ संदेश दे दिया है कि अगर आपस में तालमेल नहीं रहा तो हम बड़े लक्ष्य को पाने से चूक सकते हैं.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पूर्वी और पश्चिमी दोनों ही क्षेत्रों के दौरे के वक्त सोशल मीडिया के वोलंटियर्स के साथ बैठक में गंभीर दिखे. बीजेपी की नजर हर राज्य में सोशल मीडिया की टीम को मजबूत करना है. आने वाले दिनों में विपक्ष के हमले की काट के तौर पर इसे देखा जा रहा है. अमित शाह ने अपने दौरे में सोशल मीडिया के वालंटियर्स से मोदी सरकार के चार साल के कामकाज की उपलब्धियों को प्रचारित करने को भी कहा है.

दरअसल, आरएसएस ने भी यूपी को लेकर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. पिछले लोकसभा चुनाव की ही तरह इस बार भी संघ की तरफ से बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश भी की जा रही है. संघ ने भी बीजेपी को दलित और पिछड़े समुदाय के लोगों को साथ लेकर चलने की नसीहत दी है. अमित शाह के दौरे में भी संघ की सलाह को आगे बढ़ाने की कोशिश नजर आई.

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