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राज्यसभा में वोटिंग के वक्त बीजेपी सांसदों के गायब रहने से अमित शाह खफा

शाह ने कहा कि क्या अनुपस्थित सांसदों का सबके सामने नाम लिया जाए?

Bhasha Updated On: Aug 01, 2017 02:49 PM IST

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राज्यसभा में वोटिंग के वक्त बीजेपी सांसदों के गायब रहने से अमित शाह खफा

बीजेपी सुप्रीमो अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में व्हिप के बावजूद पार्टी सांसदों के सदन से गायब रहने को गंभीरता से लिया है.

गायब रहने वाले सांसदों से स्पष्टीकरण भी मांगा जा सकता है. बीजेपी संसदीय दल की बैठक में अमित शाह ने इस संबंध में अपनी नाराजगी जाहिर की.

बीजेपी संसदीय दल की बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कहा कि जब पार्टी व्हिप जारी करती है तब सदस्यों को सदन में मौजूद रहना चाहिए. पार्टी अध्यक्ष ने इसे गंभीरता से लिया है. उन्होंने सदस्यों से कहा है कि ऐसा दोहराया ना जाए.'

पार्टी अध्यक्ष ने सांसदों की अनुपस्थिति पर अपनी नाराजगी तब जाहिर की है जब सोमवार को ही ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष के संशोधनों के पारित हो जाने उसे मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा.

राज्यसभा में सत्तारूढ़ दल के सदस्यों की संख्या 88 है और राज्यसभा ने विधेयक के तीसरे महत्वपूर्ण क्लॉज तीन को खारिज करते हुए शेष विधेयक को जरूरी मतों से पारित कर दिया. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान (123वां संशोधन) विधेयक लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी थी.

सोमवार को राज्यसभा में चर्चा के बाद इसके तीसरे क्लॉज में कांग्रेस के संशोधनों को संसद ने 54 के मुकाबले 75 मतों से मंजूरी दे दी. इन संशोधनों में प्रस्ताव किया गया है कि प्रस्तावित आयोग में एक सदस्य अल्पसंख्यक वर्ग से और एक महिला सहित पांच सदस्य होने चाहिए. मूल विधेयक में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित तीन सदस्यीय आयोग का प्रस्ताव किया गया है.

शाह ने कहा कि क्या अनुपस्थित सांसदों का नाम लिया जाए क्योंकि प्रधानमंत्री और पार्टी बार-बार सदस्यों को सदन में उपस्थित रहने को कहती रही है. इस संबंध में राष्ट्रपति चुनाव के समय वोट अमान्य होने का विषय भी उठा.

बैठक में प्रधानमंत्री मौजूद नहीं थे क्योंकि वे असम में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करने गए हैं.

राज्यसभा में सोमवार को ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष के संशोधनों के पारित हो जाने की वजह यह विधेयक मूल स्वरूप में पारित नहीं हो सका. इससे एक ओर जहां सरकार की किरकिरी हुई, वहीं ओबीसी वर्ग के हितों के साथ खिलवाड़ करने का सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर तीखे आरोप लगाए.

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