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50 दिनों की परेशानी से 50 साल के लिए राहत: अमित शाह

नोटबंदी से लोगों की परेशानी को सरकार समझती है, लेकिन ये 50 दिन 50 साल के लिए राहत प्रदान करेंगे

Updated On: Dec 17, 2016 05:40 PM IST

IANS

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50 दिनों की परेशानी से 50 साल के लिए राहत: अमित शाह

शाहजहांपुर. भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को कहा कि उच्च मूल्यों के नोटों के बंद होने से लोगों की परेशानी को सरकार समझती है, लेकिन ये 50 दिन कालाधन से 50 साल के लिए राहत प्रदान करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कठिनाई दूर करने के लिए 50 दिनों का समय मांगा था.

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, 'हम जानते हैं कि लोग (बैंकों व एटीएम बूथों की) कतारों में परेशानी झेल रहे रहे हैं, लेकिन मोदी ने 50 दिनों का समया मांगा है. इन 50 दिनों की परेशानी कालाधन से 50 साल के लिए राहत प्रदान करेगी.'

शाह ने यह भी कहा कि विपक्ष नहीं चाहता कि देश को कालाधन से निजात मिले, इसलिए उसने हंगामा कर संसद के पूरे शीतकालीन सत्र को बर्बाद कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश प्रगति की ओर बढ़ना चाहता है तो लोगों को दो तिहाई बहुमत से भाजपा को सत्ता में लाना होगा. शाह ने कहा, 'मोदी ने हर साल 1 लाख करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश के लिए स्वीकृत किए हैं, लेकिन राज्य में कोई विकास नहीं हुआ है.' नोटबंदी का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया

दूसरी ओर नई दिल्ली में अमित शाह ने कहा कि बड़े मूल्य के नोटों के विमुद्रीकरण का फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श के तहत लिया गया. इंडिया टेलीविजन के कार्यक्रम आप की अदालत में अमित शाह ने कहा कि 50 दिनों की समय सीमा 30 दिसंबर को खत्म हो रही है, जिसकी योजना बेहद सोच-समझकर बनाई गई थी. एटीएम तथा बैंकों को 30 दिसंबर की समय सीमा तक नकदी की समस्या से निजात मिल जाएगी.

अधिकारियों के परामर्श पर लिया फैसला

शाह ने कहा, 'आरबीआई से कुछ छिपाया नहीं गया और उससे परामर्श नहीं लेने की बात भी गलत है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी का फैसला सक्षम अधिकारियों से परामर्श के बाद लिया गया. यह फैसला न तो जल्दबाजी में लिया गया और न ही जल्दबाजी का कोई कारण था.' वर्तमान में नकदी की कमी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसा नोटों की छपाई में विलंब की वजह से हुआ.

नोटों की छपाई में देरी से हुई परेशानी

उन्होंने कहा, 'नोटों की छपाई में विलंब की वजह से नकदी की कमी हुई और इसे गंतव्यों तक पहुंचाने में लगने वाले समय के कारण 50 दिनों की समय सीमा तय की गई. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि 50 दिनों की समय सीमा के बाद बैंकों के बाहर कतारें खत्म हो जाएंगी, लेकिन अधिकांश परेशानी खत्म हो जाएगी.'

भाजपा अध्यक्ष ने यह उम्मीद भी जताई कि दो महीने के अंदर फैक्ट्रियों में व्यापार पटरी पर आ जाएगा. उन्होंने कहा, 'फैक्ट्रियां नकदी की कमी की वजह से बंद नहीं हैं, बल्कि उनमें लगभग 30-40 फीसदी लेनदेन जो पहले चेक के माध्यम से नहीं हो रहे थे, अब उनमें बदलाव होगा और व्यापारी उस लेनदेन को बही में दर्ज करेंगे.'

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