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अमित शाह का जम्मू दौरा: गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज के बयान के बाद और आक्रामक हुई बीजेपी

पीडीपी से अलग होने के बाद बीजेपी घाटी में अपनी रणनीति को फिर से पटरी पर लाने में लगी है, इस वक्त कांग्रेसी नेताओं की तरफ से कश्मीर मुद्दे पर की गई टिप्पणी ने बीजेपी को अपनी आक्रामक रणनीति को और आक्रामक बनाने का मौका दे दिया है

Updated On: Jun 23, 2018 09:39 AM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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अमित शाह का जम्मू दौरा: गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज के बयान के बाद और आक्रामक हुई बीजेपी

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह आज यानी शनिवार 23 जून को जम्मू दौरे पर होंगे तो उनके सामने एक साथ कई मुद्दे होंगे जिनको लेकर वो विपक्ष पर निशाना साधेंगे. पीडीपी से अलग होने के बाद बीजेपी जम्मू-कश्मीर में अपनी रणनीति को फिर से पटरी पर लाने में  लगी है. लेकिन, इस वक्त कांग्रेसी नेताओं की तरफ से कश्मीर मुद्दे पर की गई टिप्पणी ने बीजेपी को अपनी आक्रामक रणनीति को और आक्रामक बनाने का मौका दे दिया है.

कश्मीर को राष्ट्रीयता के प्रतीक के तौर पर देख रही बीजेपी की कोशिश भी कुछ ऐसी है. अब अमित शाह जब जम्मू के ब्राम्हण सभा परेड ग्राउंड में जनसभा को संबोधित करेंगे तो उनके सामने पीडीपी से अलग होने के फैसले को सही ठहराने का पूरा मौका भी होगा और कांग्रेस को राष्ट्रीयता के मुद्दे पर घेरने की कोशिश भी होगी.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद के बयान के बाद बीजेपी कांग्रेस पर लगातार हमला बोल रही है. दरअसल, आजाद ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में कई लोगों ने अपनी जानें गवाई हैं, न कि आतंकवादियों की वजह से ऐसा हुआ है. उनके इस बयान का आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने समर्थन किया है.

आजाद और सोज के बयान पर बीजेपी हुई आक्रामक

उधर, कांग्रेस के एक और नेता सैफुद्दीन सोज ने भी कश्मीर को लेकर विवादित बयान दे डाला. सोज ने एक इटरव्यू के दौरान पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज परवेज मुशर्रफ के पहले के दिए उस बयान का समर्थन किया जिसमें मुशर्रफ ने कश्मीर की आजादी की बात कही थी.

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अमित शाह की रैली के पहले ही बीजेपी ने अपनी तरफ से कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आजाद के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका बयान दुर्भाग्यपूर्ण है. उनके बयान से वो लोग खुश होंगे जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं. रविशंकर प्रसाद ने इसे देश को तोड़ने वालों का समर्थन करने वाली नीति बताकर कांग्रेस से आजाद और सैफुद्दीन सोज के मुद्दे पर माफी मांगने की मांग कर दी.

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अब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 23 जून को जब जम्मू में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के मौके पर पहुंचेगे तो ज्यादा खुलकर अपने पार्टी कैडर्स के बीच पार्टी की विचारधारा और कश्मीर को लेकर अपने एजेंडे को रख पाएंगे. क्योंकि अब बीजेपी कश्मीर में पीडीपी से अलग हो गई है और दूसरा कांग्रेस के नेताओं ने शाह के बोलने की जमीन भी तैयार कर दी है.

पीडीपी से अलग होने के बाद बीजेपी अपनी बात तरीके से रखेगी

कश्मीर को लेकर बीजेपी की रणनीति पहले से ही काफी आक्रामक रही है. बीजेपी डॉ. मुखर्जी की पुण्यतिथि को बलिदान दिवस के तौर पर मनाती रही है. लेकिन, इस बार कार्यक्रम जम्मू में होगा और पार्टी अध्यक्ष के सामने अपने लोगों के बीच संदेश देने का बडा मौका होगा कि हम अपनी विचारधारा और सिद्धांतों पर अडिग है, जिसके कारण ही पीडीपी से अलग होने का फैसला किया गया है.

पीडीपी से अलग होने के बाद बीजेपी अब जम्मू-कश्मीर में फिर से अपने-आप को पुराने रंग में रंगने की कोशिश में है. पीडीपी के साथ सरकार में बने रहते हुए बीजेपी खुलकर अपने एजेंडे को लेकर नहीं बोल पा रही थी. लेकिन, अब पार्टी ने कमर कस लिया है. खासतौर पर अपने जनाधार वाले जम्मू क्षेत्र में संगठन को दुरुस्त करने को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है और इसकी शुरुआत पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के जम्मू दौरे से होगी.

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अमित शाह 23 जून को डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी फाउंडेशन के तत्वाधान में आयोजित एक पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम में जा रहे हैं जिसका नाम है A saga of sacrifices….praja parishad movement in jammu & Kashmir. लेकिन, अब बदले राजनीतिक हालात में इस पुस्तक विमोचन के बाद एक रैली की भी तैयारी की जा रही है. अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच नई परिस्थिति में उर्जा का संचार करने और जम्मू से लेकर घाटी तक में बड़ा संदेश देने के लिए अमित शाह का दौरा महत्वपूर्ण हो सकता है.

आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन से पार्टी को पूरे देश में होगा फायदा

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की नजर लोकसभा चुनाव पर भी है. राज्यपाल शासन लागू करने के बाद अब आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन और तेज किया जा रहा है. बीजेपी को लगता है कि इसका फायदा उसे जम्मू के अलावा पूरे देश में भी मिलेगा. लेकिन, बीजेपी अध्यक्ष के दौरे में संगठन को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी. अपने दो दिवसीय दौरे में बीजेपी अध्यक्ष की संघ परिवार के लोगों के साथ भी बैठक होगी. इस बैठक में संघ के प्रांत कार्यवाह से लेकर वीएचपी और दूसरे संगठनों के भी नेता शामिल होंगे.

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बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह अपने दौरे में बीजेपी सांसदों की कार्यशैली पर संघ के नेताओं से भी फीडबैक लेंगे. इस दौरान उनकी बीजेपी नेताओं के साथ-साथ बीजेपी चुनाव प्रबंध कमिटी के लोगों के साथ भी बैठक होगी. शाह के इस दौरे में बीजेपी के संगठन महामंत्री रामलाल भी मौजूद रहेंगे.

अब बदले हुए सियासी हालात में बीजेपी ने शक्ति प्रदर्शन भी करने का फैसला कर लिया है. पीडीपी से अलग होने के बाद अब फिर से पार्टी संगठन में नई जान फूंकने के लिए अमित शाह के रोड शो की तैयारी भी की जा रही है. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, जम्मू एयरपोर्ट से लेकर उस कंवेंशन सेंटर तक अमित शाह के बड़े रोड शो की तैयारी की जा रही है, जहां पार्टी संगठन को लेकर बैठक होनी है.

आने वाले दिनों में कश्मीर में आक्रामक अंदाज में नजर आएगी बीजेपी

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि ‘आने वाले दिनों में बीजेपी जम्मू-कश्मीर में काफी आक्रामक अंदाज में नजर आएगी. पार्टी किसी भी कीमत पर राष्ट्रीयता, देश की सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता नहीं करने वाली और पीडीपी से अलग होकर इसका संदेश भी दे दिया गया है.’

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लेकिन, बीजेपी के लिए असली चुनौती अब शुरू होगी. बीजेपी को भी इस चुनौती का एहसास है, लेकिन, उसे भरोसा है कि राज्यपाल शासन के दौरान कश्मीर में सरकार और सेना की आक्रामकता और विचारधारा के स्तर पर पार्टी की आक्रामकता के माध्यम से आने वाली चुनौती से सामना किया जा सकता है.

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