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राजनीतिक हत्याओं के लिए मुख्यमंत्री पी विजयन जिम्मेदार: अमित शाह

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने केरल में हो रही राजनीतिक हत्याओं के खिलाफ प्रदेश की विजयन सरकार पर हमला बोला है

Amitesh Amitesh Updated On: Oct 04, 2017 02:23 PM IST

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राजनीतिक हत्याओं के लिए मुख्यमंत्री पी विजयन जिम्मेदार: अमित शाह

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने केरल में हो रही राजनीतिक हत्याओं के खिलाफ प्रदेश की विजयन सरकार पर हमला बोला है. अमित शाह का कहना है कि राज्य में सीपीएम की सरकार आने के बाद से संघ और बीजेपी के लोगों पर लगातार हमले हो रहे हैं लेकिन, प्रदेश सरकार इस पर कुछ नहीं कर रही है. ऐसे में जिम्मेदारी मुख्यमंत्री पी विजयन की बनती है. संघ-बीजेपी के कार्यकर्ताओं की हत्या के खिलाफ जनरक्षा यात्रा के दौरान अमित शाह ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी संवाददाता अमितेश के साथ साक्षात्कार में बताया कि केरल में जारी हिंसा के खिलाफ हम पूरे देश में व्यापक अभियान चलाएंगे. पेश हैं अमित शाह के साथ बातचीत के प्रमुख अंश:

सवाल- आखिर क्या कारण है कि केरल में आपको जनरक्षा यात्रा निकालनी पड़ी, जिसकी शुरुआत आपकी पदयात्रा से हुई ?

जवाब- केरल में राजनीतिक हिंसा के खिलाफ जनजागृति लाने के लिए हमने जनसुरक्षा यात्रा निकालने का फैसला किया है. केरल में पी. विजयन के नेतृत्व में कम्युनिस्ट सरकार आने के बाद जिस तरह से हमारे कार्यकर्ताओं की क्रूर और निर्मम हत्या हुई है, उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए, उनके घर जला दिए गए, कार्यालय जला दिए गए, उसके बाद हमने जनजागृति लाने का फैसला किया है. इस प्रकार की हिंसा के खिलाफ अगर हम जनजागृति नहीं लाते तो फिर ये हिंसा नहीं रुकेगी. कन्नूर से ही जनरक्षा यात्रा की शुरुआत इसलिए की गई है क्योंकि, कन्नूर में ही सबसे ज्यादा इस तरह की घटनाएं हुई हैं.

सवाल- मुख्यमंत्री पी. विजयन का गृह जिला है कन्नूर, उनके इलाके पयीनूर से आपने यात्रा की शुरुआत की है, कितना फर्क पड़ेगा इस यात्रा से ?

जवाब- जनरक्षा यात्रा के बाद निश्चित रूप से माहौल बदलेगा. हमने 9 किलोमीटर में जो दृश्य देखा है, उसमें हमने देखा है कि केरल की जनता इस हिंसा को पसंद नहीं कर सकती.

सवाल- अपने अभियान को लेकर आपकी क्या योजना है, क्योंकि जनरक्षा यात्रा के बाद फिर इस मुहिम को कैसे अंजाम तक लेकर जाएंगे?

जवाब- अभी हम तीन अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक जनरक्षा यात्रा निकाल रहे हैं. हम दिल्ली में इस दौरान सीपीएम दफ्तर का घेराव करेंगे, वहां प्रदर्शन करेंगे. इसके अलावा सभी राज्यों की राजधानी में भी एक-एक दिन हमारे कार्यकर्ता केरल की राजनीतिक हिंसा के विरोध में धरना-प्रदर्शन के जरिए अपना विरोध करेंगे. इसके बाद हम केरल में बहुत बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान लाने वाले हैं. लेकिन, फिलहाल तीन से 17 अक्टूबर तक हमारा फोकस इसी जनरक्षा यात्रा पर है.

सवाल- आरएसएस ने पहले भी मांग की है कि केरल में हो रही राजनीतिक हिंसा के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए. क्या केंद्र सरकार इस दिशा में कुछ सोचेगी?

जवाब- इसीलिए तो हम जनता के पास जा रहे हैं. लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है. फिलहाल हमारा पूरा फोकस जनजागृति अभियान पर है. जनता से संपर्क कर हम जनजागृति करेंगे और उन्हें अपने विचारों के साथ जोड़ने की कोशिश करेंगे.

सवाल– केरल लेफ्ट का अंतिम किला माना जाता है. क्या माना जाए कि लेफ्ट के अंतिम किले में अब सेंधमारी की तैयारी है?

जवाब- इस आंदोलन के पीछे हमारा कोई राजनीतिक मकसद नहीं है. हम अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहना चाहते हैं. उनके परिवार के दुख के अंदर हम हिस्सेदार बनना चाहते हैं. हम चाहते हैं आगे कोई राजनीतिक हिंसा ना हो ऐसा.

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सवाल- आप लोगों की तरफ से इसे राज्य प्रायोजित हिंसा कहा जाता है. ऐसे में मुख्यमंत्री पी. विजयन की कितनी जिम्मेदारी बनती है ?

जवाब- राज्य में घट रही किसी किसी भी हिंसा की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की ही बनती है, क्योंकि कानून-व्यवस्था तो उस राज्य की ही जिम्मेदारी है.

सवाल- सीपीएम की तरफ से आरोप संघ-बीजेपी के लोगों पर भी लगाए जाते हैं कि हिंसा उधर से भी होती है ?

जवाब- दोनों तरफ की हिंसा का तो सवाल ही नहीं है. क्योंकि हम सत्ता में नहीं हैं. सत्ता में तो वो रहे हैं लगातार. आप इतिहास उठाकर देख लीजिए जब-जब कम्युनिस्टों का शासन आया है तब-तब राजनीतिक हत्याएं ज्यादा हुई हैं. राजनीतिक हत्याओं का और कम्युनिस्टों का तो चोली-दामन का संबंध है.

सवाल- अगले लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव में बीजेपी की उम्मीदों को केरल में कैसे देख रहे हैं? क्योंकि आप बार-बार कह रहे हैं कि जनता इन्हें उखाड़ फेंकेगी?

जवाब- इस यात्रा के सियासी मतलब निकालना ठीक नहीं है. लेकिन, यह बताना चाहता हूं कि पिछले चुनाव में हमें 11 फीसदी वोट मिले थे. चुनाव में 11 फीसदी वोट बड़ा महत्वपूर्ण होता है, जिस तरह से बीजेपी के साथ जनता यहां जुड़ रही है, उससे साफ है कि बीजेपी का काम यहां काफी बेहतर हो रहा है.

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