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कमलनाथ के पुत्र नकुल की राजनीति में एंट्री क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनौती है?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही अपने पुत्र नकुल नाथ को भी सक्रिय राजनीति में उतार दिया है.

Dinesh Gupta Updated On: May 02, 2018 04:21 PM IST

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कमलनाथ के पुत्र नकुल की राजनीति में एंट्री क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनौती है?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही अपने पुत्र नकुल नाथ को भी सक्रिय राजनीति में उतार दिया है. कमलनाथ के कार्यभार ग्रहण करने के मेगा शो में आकर्षण का एक केन्द्र नकुल नाथ भी थे. नकुल नाथ के बैठने की व्यवस्था मंच पर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के साथ की गई थी. नकुल नाथ, अपने पिता के संसदीय क्षेत्र में तो अक्सर देखे जाते हैं लेकिन, भोपाल में पार्टी के मंच पर वे पहली बार नजर आए.

नकुल नाथ लड़ सकते हैं विधानसभा का चुनाव

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नेतृत्व की कमान को लेकर नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के बीच लगातार खींचतान देखने में आई है. कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपने के फैसले से पार्टी की पुरानी पीढ़ी उत्साहित है. ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश का भावी मुख्यमंत्री के तौर देखने वाली नई पीढ़ी का उत्साह कुछ कमजोर पड़ा है.

ऐसा माना जा रहा है कि कमलनाथ ने अपने पुत्र नकुल नाथ को एक सोची समझी रणनीति के तहत कांग्रेस के मंच पर बैठाया था. नकुल नाथ के पास पार्टी की कोई जिम्मेदारी नहीं हैं. कार्यभार ग्रहण करने के कार्यक्रम में कमलनाथ के साथ मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह और प्रदेश के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया पहली पंक्ति में बैठे हुए थे.

दूसरी पंक्ति में कांग्रेस के चार नए कार्यवाहक अध्यक्षों के साथ ही नकुल नाथ को बैठाया गया था. पूरे कार्यक्रम में नकुल नाथ की मौजूदगी ने कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को चौंका दिया. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य में कांग्रेस का वनवास समाप्त कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कमलनाथ को सौंपी है.

कमलनाथ घरों में बैठे पुराने कांग्रेसियों को बाहर निकालने की कोशिश में लगे हुए हैं. कमलनाथ ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद जो दो महत्वपूर्ण नियुक्तियां की वे उनके पुराने साथी हैं. पूर्व मंत्री चंद्रप्रभाष शेखर को संगठन के कामकाज के लिए उपाध्यक्ष नियुक्त किया है. मुख्य प्रवक्ता माणक अग्रवाल को बनाया गया है. ये दोनों नेता पिछले कई सालों से अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे थे.

kamalnath

अनुमान यह लगाया जा रहा है कि कमलनाथ अपने पुत्र नकुल नाथ को भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में जगह दे सकते हैं. नकुल नाथ, कमलनाथ के कार्यालय का काम देख सकते हैं. संभावना यह भी प्रकट की जा रही है कि साल के अंत में होने वाले विधानसभा के चुनाव में नकुल नाथ को छिंदवाड़ा की किसी सीट से मैदान में उतारा जा सकता है.

छिंदवाड़ा संसदीय सीट से कमलनाथ नौ बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं. हवाला मामले के बाद इस सीट पर उनकी पत्नी अलका नाथ ने एक बार चुनाव लड़ा था.

कांग्रेस की नई पीढ़ी को आकर्षित कर सकते हैं नकुल नाथ

वैसे वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान नकुल नाथ ने अपनी भावी राजनीतिक रणनीति के संकेत दिए थे. नकुल नाथ ने कहा था कि वे वर्ष 2019 का चुनाव छिंदवाड़ा से लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. कमलनाथ ने अपनी सधी हुई राजनीति का परिचय देते हुए भोपाल में नकुल नाथ की लॉन्चिंग कर दी.

इस लॉन्चिंग से ऐसा लगता है कि कमलनाथ काफी पहले यह तय कर चुके थे कि उन्हें मध्यप्रदेश कांग्रेस की राजनीति में अहम भूमिका अदा करना है. यद्यपि राहुल गांधी ने किसी भी नेता को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट नहीं किया है, लेकिन सरकार बनने की स्थिति में यह तय है कि कमलनाथ ही मुख्यमंत्री बनेंगे.

मुख्यमंत्री पद के एक अन्य दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हैं. सिंधिया को पार्टी ने कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है. बताया यह जाता है कि सिंधिया चाहते थे कि उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर प्रकट किया जाए. राज्य के कई कांग्रेसी नेताओं ने विभिन्न माध्यमों से राहुल गांधी के समक्ष यह मांग रखी थी कि सिंधिया को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाता है तो नतीजे सकारात्मक आएंगे.

वक्त की मांग को समझते हुए कमलनाथ ने एक हाथ से सिंधिया को थाम रखा है और दूसरा हाथ पुत्र नकुल नाथ के हाथ में है. नकुल नाथ की एंट्री राज्य की राजनीति में काफी देरी से हुई है. कांग्रेस के अधिकांश दिग्गिज नेताओं के पुत्र इन दिनों राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका में हैं. अर्जुन सिंह ने अपने पुत्र अजय सिंह को अस्सी के दशक में ही सक्रिय राजनीति में उतार दिया था.

दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह ने पिछला विधानसभा चुनाव अपने पिता की पंरपरागत सीट राघोगढ़ से जीता था. प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव के पिता सुभाष यादव दिग्विजय सिंह सरकार में उपमुख्यमंत्री थे. वे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं.

ऐसे दर्जनों नेता हैं, जिनके पुत्र अपने पिता की परंपरागत सीटों पर चुनाव लड़ते आ रहे हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीति में एंट्री माधवराव सिंधिया की विमान दुर्घटना में निधन हो जाने के बाद हुई थी. सिंधिया राज्य की राजनीति में युवा और लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं. आने वाले दिनों में नकुल नाथ भी उनके समानांतर नजर आ सकते हैं. अब तक सिंधिया को कांग्रेस के किसी भी नेता के उत्तराधिकारी से कोई खास चुनौती नहीं मिली है.

बीजेपी नेताओं के पुत्र भी हैं राजनीति के केंद्र में

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस साल जनवरी में अपने पुत्र कार्तिकेय को सक्रिय राजनीति में आने के लिए मंच उपलब्ध कराया था. कार्तिकेय को कोलारास विधानसभा के उपचुनाव के दौरान प्रचार के लिए भेजा गया था. कोलारस, ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में आता है. कार्तिकेय के वहां सक्रिय होने से प्रचार भी अच्छा खासा मिला. राज्य के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने भी अपेन पुत्र सिद्धार्थ मलैया को चुनाव के लिए तैयार कर लिया है.

Shivraj Singh

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव के पुत्र अभिषेक भार्गव भी पिता के निर्वाचन क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं. राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा और कैलाश जोशी के पुत्र क्रमश. सुरेन्द्र पटवा और दीपक जोशी, शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल के सदस्य हैं.

एक समय बीजेपी के सबसे ताकतवर नेता माने जाने वाले कैलाश सारंग के पुत्र विश्वास सारंग भी मंत्री हैं. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी अपने पुत्र देवेन्द्र तोमर ग्वालियर से विधानसभा का चुनाव लड़ाना चाहते हैं. केंद्रीय मंत्री थावरचंद्र गहलोत के पुत्र जितेन्द्र गहलोत आलोट से विधायक हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा की पत्नी धार से विधायक हैं.

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