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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी: एसपी ने अध्यक्ष सहित चार सीटों पर किया कब्जा

ABVP को एकमात्र सीट मिली है. पार्टी के निर्भय कुमार द्विवेदी ने महामंत्री पद पर जीत दर्ज की है

FP Staff Updated On: Oct 15, 2017 10:14 AM IST

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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी: एसपी ने अध्यक्ष सहित चार सीटों पर किया कब्जा

पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जानेवाले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव के परिणाम शनिवार देर रात घोषित कर दिए गए. यहां समाजवादी छात्रसभा के अवनीश कुमार यादव ने अध्यक्ष पद पर जीत हास‍िल की. वहीं उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर भी समाजवादी छात्रसभा का दबदबा रहा. एबीवीपी को स‍िर्फ महामंत्री पद पर ही जीत मिली है.

अवनीश कुमार यादव ने 3226 मतों के साथ अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय मृत्युंजय राव परमार को 552 मतों के भारी अंतर से पराजित किया. वहीं, उपाध्यक्ष पद पर समाजवादी छात्रसभा के चंद्रशेखर चौधरी ने 2249 मत प्राप्त कर एबीवीपी के शिवम कुमार तिवारी को 72 मतों से हराया.

उपाध्यक्ष पद पर चंदशेखर चौधरी, संयुक्त सचिव पद पर भरत सिंह, सांस्कृतिक सचिव पद पर अवधेश कुमार पटेल ने जीत दर्ज की है. वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के निर्भय कुमार द्विवेदी ने महामंत्री पद पर जीत दर्ज की है. जीत दर्ज करने वाले प्रत्याशियों को 15 अक्तूबर को शपथ दिलाई जाएगी.

इस मौके पर अवनीश यादव ने कहा, 'छात्र हितों के लिए काम करना है. हमने जो भाषण में वादे किए थे उसे पूरा करने की कोशिश करुंगा. विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हमारे ऊपर विश्वास किया है उस पर खरा उतरने का प्रयास करुंगा.'

जेएनयू, डीयू के बाद यहां भी एबीवीपी को नहीं मिली सफलता 

करीब 20 हजार मतदाता छात्र छात्राओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर नए छात्रसंघ का चयन किया है. चुनाव मैदान में 64 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होना था. जेएनयू, दिल्ली यूनिवर्सिटी के बाद यह एक और छात्रसंघ चुनाव है, जिसमें एबीवीपी को बड़ी सफलता नहीं मिली है.

वर्ष 2012 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में सात वर्षों के लंबे इंतजार के बाद दोबारा छात्रसंघ चुनाव की शुरुआत हुई. ये चुनाव जेएम लिंगदोह समिति की सिफारिशों के आधार पर कराए जाते हैं, इस क्रम में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का यह छठवां छात्रसंघ चुनाव है.

एशिया महाद्वीप के सबसे पुराने छात्रसंघ के रूप में प्रसिद्ध इलाहाबाद यूनिवर्सिटी छात्रसंघ की शुरुआत वर्ष 1923 में हुई. यह वह समय था जब देश में मात्र कुछ गिने-चुने विश्वविद्यालय हुआ करते थे. आजादी की लड़ाई के दौरान एस.बी. तिवारी देश के अंदर गठित पहले निर्वाचित छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे.

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