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तेजस्वी और तेजप्रताप में 'ऑल इज़ नॉट वेल' तो कैसे पूरा होगा लालू का मिशन 2019?

लालू के लिए ये मुश्किल भरा दौर है क्योंकि उनके जेल में होने से और बेटों के बीच मेल न होने से पार्टी का विस्तार जहां के तहां ठहरा हुआ है...

Updated On: Oct 09, 2018 04:29 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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तेजस्वी और तेजप्रताप में 'ऑल इज़ नॉट वेल' तो कैसे पूरा होगा लालू का मिशन 2019?

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव रांची की जेल में हैं. चारा घोटाला मामले में सजा और सुनवाई जारी है. लेकिन जेल जाने के बाद दूसरी मुसीबतों से भी पीछा नहीं छूट सका है. बीमारी की वजह से जहां लालू का उनकी सेहत साथ नहीं दे रही है तो दूसरी तरफ राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर तेजस्वी के नेतृत्व को घर से ही चुनौती मिल रही है. राज्यसभा सांसद बेटी मीसा भारती को कहना पड़ गया है कि परिवार में मनमुटाव कहां नहीं होता है. ये बयान दरअसल दोनों भाइयों तेज प्रताप और तेजस्वी यादव से जुड़े एक सवाल पर था. लेकिन तुरंत बाद ही मीसा भारती अपने बयान पर सफाई जारी करती हैं. वो डैमेज कंट्रोल की कोशिश करती हैं. वो कहती हैं कि उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है .

दरअसल, राजनीतिक उत्तराधिकारी की जंग में उलझे भाइयों को देखकर जब मीसा भारती भावनात्मक रूप से कमजोर पड़ीं तो उन्होंने सादगी से घर की बात अपनों के साथ कर दी. मीसा की नजर में ये घर- घर की कहानी है. लेकिन लालू परिवार की कहानी घर-घर की कहानी नहीं हो सकती है. इस परिवार के हाथ में बिहार की सत्ता रही है. इस परिवार की प्रतिष्ठा सार्वजनिक जीवन से जुड़ी हुई है और ये परिवार जनसेवा का भाव लिए सार्वजनिक जीवन में है. बिहार में जनता के लिए ये सिर्फ लालू परिवार नहीं बल्कि वो राजपरिवार है जिसने बिहार में पंद्रह साल शासन किया. ऐसे में लालू परिवार के भीतर एक छोटा सा बवाल भी बिहार की पूरी राजनीति में उथल-पुथल लाने का माद्दा रखता है.

बिहार में आरजेडी ने खुद को उस विकल्प के रूप में जनता के सामने रखा जिसने बीजेपी-कांग्रेस की पारंपरिक राजनीति को ही बदल कर रख दिया. आम जनमानस में लालू और उनकी पार्टी की छाप चुनाव दर चुनाव गहरी होती चली गई. ऐसे में लालू परिवार में तेजप्रताप और तेजस्वी के बीच राजनीतिक उत्तारधिकारी की जंग को घर- घर की कहानी नहीं माना जा सकता है.

Tejaswi Yadav And Tej Pratap Yadav

लालू के लिए ये मुश्किल भरा दौर है क्योंकि उनके जेल में होने से और बेटों के बीच मेल न होने से पार्टी का विस्तार जहां के तहां ठहरा हुआ है तो साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर भी जाम लगा हुआ है.  पार्टी के भीतर दो ध्रुव किसी न किसी रूप में दिखाई दे ही जाते हैं. अगर ऐसा ही हाल रहा तो कार्यकर्ताओं में असमंजस का हाल होगा और ये सवाल होगा कि वो तेजस्वी के साथ जाएं या फिर तेजप्रताप के साथ आएं?

कई मौकों पर तेजप्रताप यादव अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर सार्वजनिक रूप से बिफरे हैं. एक दफे मंच पर तेजप्रताप यादव ने तेजस्वी को अर्जुन और खुद को कृष्ण बताया था. ये भी कहा था कि कृष्ण का विराट रूप देखकर अर्जुन थर-थर कांपने लगे थे. इस बहाने तेजप्रताप ने तेजस्वी के साथ बैठे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को ये बता दिया कि बड़ा भाई बड़ा ही होता है.

तेजप्रताप यादव खुद को सीनियर मास्टर बता चुके हैं. वो पार्टी में अपना दबदबा कम नहीं करना चाहते हैं. उनका रौद्र और अप्रत्याशित रूप ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को असहज बना जाता है.

Tejpratap Yadav

एक दफे राबड़ी देवी ने घर पर ही आरजेडी की बैठक बुलाई. लेकिन तेजप्रताप बैठक में शामिल नहीं हुए. हालांकि तेजप्रताप घर पर ही मौजूद थे. यहां उन्होंने बड़ा बेटा होने का भावनात्मक लाभ उठाया क्योंकि जानते थे कि मां का हृदय उनको लेकर कठोर नहीं होगा. वैसे भी तेजप्रताप यादव राबड़ी देवी की राजनीति में पहली पसंद माने जाते हैं.

मीसा भारती दोनों भाइयों के बीच संबंधों को लेकर कहती हैं कि ‘हाथ की पांचों उंगलियां एक बराबर नहीं होती हैं.’ इसी बात की ही चिंता लालू प्रसाद यादव को सता रही हैं. वो तेजस्वी में अपना उत्तराधिकारी देखते हैं तो तेजप्रताप में उन्हें बागीपुत्र दिखाई देता है क्योंकि तेजप्रताप  कह रहे हैं कि 'वो दिल्ली जाएगा तब हम ना सम्भालेंगे यहां सब कुछ.'

इस बयान को तेजप्रताप की स्टाइल ऑफ पॉलिटिक्स के रूप में भी देखा  जा सकता है. जिस तरह से लालू अपने विचित्र बयानों की वजह से आम लोगों में चर्चित हुए कुछ उसी ही राह पर तेजप्रताप भी चल रहे हैं. वो बिना किसी लाग-लपेट या चाशनी में डूबे हुए शब्दकोश का इस्तेमाल कर कभी खड़ी तो कभी झूलती भाषा में अपनी बात खोल कर रख देते हैं.

tej pratap yadav

आरजेडी के लिये मुश्किल की बात तब हो सकती है जब तेज प्रताप यादव का कोई बयान उलटा पड़ जाए.जैसा कि तेज प्रताप ने हाल ही के दिनों में राजनीति से संन्यास की घोषणा का एलान कर सबको चौंका दिया था. उन्होंने उनकी सार्वजनिक उपेक्षा का आरोप लगाया था. लेकिन बाद में फेसबुक की पोस्ट को डिलीट कर हैक होने का आरोप लगा दिया था.

फिलहाल लालू के जेल में रहने पर तेजस्वी ही पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं. मीसा बड़ी बहन के नाते बता रही हैं कि परिवार और पार्टी में सबकुछ ठीक है लेकिन वो भी ये जानती है कि सार्वजनिक जीवन में पारिवारिक बात को भी राजनीतिक बयान माना जाता है. ऐसे में उन्होंने अपने बयान को तोड़ मरोड़कर पेश करने का आरोप लगा कर सुलगी हुई आग पर पानी डालने का काम किया है लेकिन धुआं जो उठा है वो बता रहा है कि रिश्तो की बस्ती में आग लगी जरूर है कहीं.

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