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यूपी चुनाव: अखिलेश यादव की झगड़ा नहीं रगड़ा राजनीति

छुट्टियों के बाद स्कूल दोबारा खुलने पर अखिलेश प्राय: हेलिकॉप्टर से आते और सारे बच्चे हॉस्टल की छतों पर चढ़ जाते.

Madhukar Upadhyay Updated On: Jan 19, 2017 08:05 AM IST

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यूपी चुनाव: अखिलेश यादव की झगड़ा नहीं रगड़ा राजनीति

समाजवादी पार्टी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थकों की संख्या कितनी है, इसका फैसला चुनाव आयोग ने कर दिया है.

पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्षता पर अब कोई सवाल नहीं उठा रहा है और ना ही ये बहस का मुद्दा है कि साइकिल किसकी है.

लेकिन अखिलेश के समर्थक और शुभचिंतक पार्टी से बाहर भी हैं. उनकी प्रतिबद्धता गजब की है. इन शुभचिंतकों में डॉक्टर, कंप्यूटर विशेषज्ञ, वकील, इंजीनियर, प्रबंधक और उद्योग-व्यापार से जुड़े लोग शामिल हैं.

इनमें से कई अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान और सिंगापुर में रहते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सिलसिले में अपना काम छोड़ कर आए हैं. राज्य के अलग अलग इलाकों में खामोशी से काम कर रहे हैं.

इन्हें किसी ने आमंत्रित नहीं किया है. किसी राजनीतिक दल से उनका संबंध नहीं है. वे अपना नाम और काम सार्वजनिक नहीं करना चाहते. उत्तर प्रदेश और समाजवादी पार्टी से उनका जुड़ाव सिर्फ अखिलेश यादव की वजह से है.

अखिलेश के 200 स्कूली दोस्त कर रहे हैं चुनाव प्रचार

उन्होंने अपनी सुविधा के हिसाब से क्षेत्र बांट लिए हैं, ताकि उस पर ध्यान केंद्रित कर सकें. हर शुभचिंतक के पास औसतन दो विधानसभा क्षेत्र हैं. उनका कहना है, ‘हम समाजवादी पार्टी के संपर्क में नहीं हैं. किसी स्थानीय नेता से कोई संपर्क नहीं है. हमारी कोशिश है कि सारा काम जमीनी स्तर पर चुपचाप किया जाए.’

दो सौ से कुछ अधिक ये लोग अखिलेश के स्कूल के दोस्त और परिचित हैं. उनका कहना है कि वे उत्तर प्रदेश में ‘रगड़ा’ करने आए हैं. ये ‘रगड़ा’ 1983 से 1990 तक सभी दोस्तों का शगल था, जिसका अर्थ मौज मस्ती होता था.

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अखिलेश ने कक्षा छह से बारह तक सात साल धौलपुर मिलिट्री स्कूल में बिताए. लेकिन स्कूल के दोस्तों से धौलपुर बिछड़ने के बाद भी लगातार संपर्क में रहे. प्राय: उनकी मुलाकातें आगरा में होती रहीं. हर बार निमंत्रण अखिलेश की ओर से जाता रहा.

akhilesh yadav

करीब पांच साल पहले धौलपुर मिलिट्री स्कूल की स्वर्ण जयन्ती के अवसर पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मुख्य अतिथि की तरह आमंत्रित थे. बड़ी संख्या में पुराने छात्र आए थे. अखिलेश इस मौके पर अपने भाषण में ‘रगड़ा’ और उसकी मस्ती का उल्लेख करना नहीं भूले.

भाषण के दौरान बीच बीच में तालियां बजती रहीं तो अखिलेश ने कहा, ‘ यहां ताली बजने का पुराना कल्चर है. हमने भी बहुत ताली बजाई है.’

परिवार के नाम का इस्तेमाल कभी नहीं किया

अखिलेश यादव की जीवनी ‘विंड्स ऑफ चेंज’  लिखने वाली सुनीता ऐरन ने लिखा ‘अखिलेश की लोकप्रियता की एक वजह ये भी है कि उन्होंने धौलपुर और मैसूर में पढ़ाई के दौरान परिवार के नाम पर लाभ उठाने की कोशिश नहीं की. सबसे घुलमिल कर रहे.’

हालांकि ये बात छिपी कभी नहीं रही. छुट्टियों के बाद स्कूल दोबारा खुलने पर अखिलेश प्राय: हेलिकॉप्टर से आते और सारे बच्चे हॉस्टल की छतों पर चढ़ जाते. ये आकर्षण अखिलेश का नहीं, हेलिकॉप्टर का होता था.

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जिस समय अखिलेश धौलपुर स्कूल में थे, ओ पी भटनागर उसके प्रिंसिपल थे. उनकी याद में अखिलेश औसत से मामूली बेहतर छात्र थे.

स्कूल के रिकॉर्ड दिखाते हैं कि पढ़ाई-लिखाई में वह औसत थे. लेकिन खेलों, खासकर हॉकी और फुटबॉल में काफी अच्छे थे. उस समय अंग्रेजी के अध्यापक एस पी मिश्र उनके स्थानीय अभिभावक थे.

कक्षा छह की पढ़ाई में अखिलेश की रैंक 31वीं थी. बाद में इसमें थोड़ा सुधार हुआ और कक्षा आठ में रैंक बेहतर हो कर 21 हो गई. दूसरी गतिविधियों में वो अव्वल बने रहे.

अखिलेश के एक दोस्त ने कहा, ‘हम सब जानते थे कि एक दिन वह नेता बन जाएगा और राजनीति करेगा. लेकिन जब अखिलेश मुख्यमंत्री बना तो वाकई बेहद खुशी हुई. हम चाहते हैं कि ये खुशी बरकरार रहे और रगड़ा चलता रहे.

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