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समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन आज, हो सकता है बड़ा ऐलान

राष्ट्रीय अधिवेशन में संविधान संशोधन का प्रस्ताव पास होने से राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 3 से बढ़कर 5 साल हो जाएगा. साथ ही भविष्य के सभी चुनावों में टिकट बंटवारे का भी अधिकार मिल जाएगा

FP Staff Updated On: Oct 05, 2017 09:40 AM IST

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समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन आज, हो सकता है बड़ा ऐलान

समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन गुरुवार को होने वाला है. इसमें कई बड़े फैसले लेने के कयास लगाए जा रहा हैं. पार्टी में दो फाड़ होने से परेशान मुलायम सिंह यादव बड़ा ऐलान कर सकते हैं.

उम्मीद है कि समाजवादी पार्टी आगरा में इस हफ्ते होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी के संविधान में संशोधन कर सकती है. इसके पीछे उद्देश्य पार्टी में लीडरशिप को लेकर उठने वाले सवाल और अखिलेश यादव के खिलाफ किसी भी संभावित विद्रोह को खत्म करना है.

इस अधिवेशन में पार्टी के संविधान को बदलने का प्रस्ताव पास किया जाएगा- जिससे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल से बढ़कर पांच साल हो जाएगा.

संशोधन के पास हो जाने पर, यह सुनिश्चित होगा कि अगले लोकसभा और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अखिलेश यादव के ही नेतृत्व में होंगे. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर अखिलेश यादव ही भविष्य में होने वाले सभी चुनावों के लिए टिकटों का बंटवारा करेंगे.

Akhilesh Mulayam 1

इस कदम का उद्देश्य पार्टी कैडर को आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और 2019 के आम चुनाव से पहले खड़ा करना है. अखिलेश को ताकतवर बनाने का मकसद विद्रोही गुट को स्पष्ट और निर्णायल संदेश देना है, जिसका नेतृत्व उनके चाचा और मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल यादव कर रहे हैं.

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले पिछले साल चाचा-भतीजा के बीच तलवारें खिंच गई थीं. बिगड़ते पारिवारिक संबंधों के बीच, अखिलेश यादव ने नए साल के मौके पर आपात राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाकर पिता मुलायम सिंह यादव को हटाकर खुद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए थे. लंबे समय से चले आ रहे इस परिवारिक विवाद में मुलायम सिंह अपने भाई शिवपाल का समर्थन करते रहे हैं. जबकि अखिलेश ने इस दौरान पार्टी में अपनी स्थिति लगातार मजबूत की है.

इस बदले हालात में शिवपाल के लिए अब समाजवादी पार्टी के अंदर और बाहर कुछ अलग करने के लिए जगह नहीं बची है. ऐसे में वो पार्टी जिसपर एक ही परिवार का दबदबा है, उसके अध्यक्ष को चुनौती देकर अलग संगठन खड़ा करने की कोई भी कोशिश जोखिम से भरा होगा.

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