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कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे अखिलेश, लेकिन मायावती पर संशय बरकरार

17 दिसंबर को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ शपथ लेंगे, एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण के बाद विपक्ष के पास अपनी ताकत का प्रदर्शन करने का यह खास मौका है

Updated On: Dec 15, 2018 11:55 AM IST

FP Staff

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कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे अखिलेश, लेकिन मायावती पर संशय बरकरार

जेडी(एस) नेता और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह के लगभग सात महीने बाद एक और मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की घटना देश के विपक्ष के लिए ताकतवर प्रदर्शन का विषय होगी.

मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह के लिए भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में तैयारियां चल रही हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, जो राज्य में कांग्रेस सरकार का समर्थन कर रहे हैं, और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, जिन्होंने विपक्ष को एक साथ लाने का जिम्मा उठाया है, ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की है.

न्यूज-18 की खबर के मुताबिक, बीएसपी सुप्रीमो मायावती, जिन्होंने 15 वर्षों के बाद राज्य में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस का समर्थन किया है, अभी भी कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में आने को लेकर पुष्टि नहीं की है. अखिलेश यादव के साथ उन्होंने विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के एक दिन पहले हुई विपक्ष की बैठक में भाग नहीं लिया था.

सोनिया गांधी भी हो सकती हैं शपथ ग्रहण में शामिल

केरल के मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) नेता पिनरायी विजयन, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वी नारायणसामी और वरिष्ठ टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं. पूर्व कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकती हैं.

मध्य प्रदेश 'हिंदी हार्टलैंड' के तीनों राज्यों में से सबसे बड़ा राज्य है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने बीजेपी को हराया. 29 लोकसभा सीटों के साथ मध्य प्रदेश, राजस्थान या छत्तीसगढ़ की तुलना में सबसे अधिक सांसद भेजने वाला राज्य है. वर्तमान में यहां पर 26 सीटें बीजेपी के पास हैं जबकि 3 पर कांग्रेस का कब्जा है.

कांग्रेस को एमपी में करना पड़ा मिनी गठबंधन

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बहुमत से दो सीटें कम मिली थी. पार्टी को यहां पर मिनी गठबंधन करना पड़ा. एसपी-बीएसपी के विधायकों के अलावा 4 निर्दलीय विधायकों ने भी पार्टी को समर्थन दिया है. तब जाकर यह आंकड़ा 121 तक पहुंचा है.

लोकसभा चुनाव में मात्र 4 महीने का समय रह गया है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी के प्रभाव को बढ़ाने के लिए सिर्फ जनवरी के महीने में 25 रैलियां पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में करने वाले हैं. खास बात यह है कि इन राज्यों में पार्टी को अभी तक सफलता नहीं मिली है.

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