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स्टालिन के बयान पर अखिलेश बोले- किसी की राय गठबंधन की राय नहीं हो सकती

इससे पहले टीएमसी भी स्टालिन के बयान पर असहमति जता चुकी है. साथ ही ये भी कहा कि ऐसी कोई भी घोषणा जल्दबाजी होगी

Updated On: Dec 19, 2018 10:13 AM IST

FP Staff

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स्टालिन के बयान पर अखिलेश बोले- किसी की राय गठबंधन की राय नहीं हो सकती

एक तरफ जहां पूरा विपक्ष बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन को मजबूत करने में लगा हुआ है, तो वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अपने बयानों से इस महागठबंधन को झटका दे रहे है. हाल ही अखिलेश यादव ने इशारों ही इशारों में कहा है कि वो 2019 में पीएम उम्मीदवार के तौर पर राहुल गांधी को नहीं देखना चाहते हैं.

दरअसल अखिलेश यादव डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन के राहुल गांधी को पीएम के रूप में देखने के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे. मंगलवार को स्टालिन के बयान पर कहा कि उनकी राय गंठबंधन की राय नहीं हो सकती. उन्होंने कहा, 'लोग बीजेपी से खुश नहीं है, तेलंगाना के सीएम नायडू, ममता जी और शरद पवार ने सारे नेताओं को एक साथ लेकर गठबंधन बनाने की कोशिश की है. लेकिन अगर कोई अपनी राय दे रहा है तो वो गठबंधन की राय नहीं हो सकती है.'

क्या कहा था स्टालिन ने?

सोमवार को  स्टालिन ने राहुल गांधी को विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार बनाने की वकालत की थी. उन्‍होंने कहा था, 'मैं पीएम पद के लिए राहुल का नाम देता हूं. राहुल फासीवादी ताकतों को रोक सकते हैं.'

टीएमसी भी जता चुकी है असहमति

इससे पहले टीएमसी भी स्टालिन के बयान पर असहमति जता चुकी है. सोमवार को तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने एमके स्टालिन के राहुल गांधी को संयुक्त विपक्ष का प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने के प्रस्ताव के बाद से खुद को दूर कर दिया है. साथ ही ये भी कहा कि ऐसी कोई भी घोषणा जल्दबाजी होगी.

एक टीएमसी नेता ने कहा कि लोकसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद, विपक्षी दलों के बीच चर्चा के बाद ही प्रधान मंत्री कौन होना चाहिए, इस पर निर्णय लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कोई भी एकतरफा घोषणा गलत संदेश भेज सकती है.

एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि- 'न केवल टीएमसी, बल्कि अन्य विपक्षी पार्टियों का मानना है कि पीएम उम्मीदवार पर किसी भी तरह का फैसला लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही किया जाना चाहिए. पीएम उम्मीदवार पर कोई घोषणा अभी जल्दबाजी होगी क्योंकि यह विपक्ष को विभाजित करेगी.'

उधर मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में भारी जीत के लिए गांधी को श्रेय नहीं देने के लिए राज्य कांग्रेस नेतृत्व भी टीएमसी के खिलाफ मुखर रहा है. पिछले हफ्ते कांग्रेस ने पूछा था कि क्या तृणमूल के नेताओं की रातों की नींद गायब हो गई थीं, क्योंकि वे डर रहे हैं कि बनर्जी का प्रधान मंत्री बनने का उनका सपना पूरा नहीं हो सकता है.

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