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अमिताभ को अखिलेश की नसीहत, 'गुजरात के गधों से दूर रहें महानायक'

यूपी के लड़कों को ये पसंद नहीं कि यूपी के अमिताभ बच्चन गुजरात के नरेंद्र मोदी के गधों का प्रचार करें

Swati Arjun Swati Arjun Updated On: Feb 20, 2017 08:20 PM IST

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अमिताभ को अखिलेश की नसीहत, 'गुजरात के गधों से दूर रहें महानायक'

अखिलेश यादव ने वर्षों से गांधी परिवार का गढ़ रहे है रायबरेली की धरती से सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से कहा कि वे गुजरात के गधों के लिए प्रचार न करें.

अखिलेश यादव इस समय भारतीय राजनीति के सबसे तेज और चमकदार सितारे हैं. उनके हर बयान, हर कदम और हर हाव-भाव को न सिर्फ बड़े ध्यान से देखा और समझा जा रहा है बल्कि उसका मतलब भी निकाला जा रहा है.

समझने और मतलब के इस खेल में जितना जनता शामिल है, उतना ही राजनीतिक विश्लेषक और बड़े-बड़े नेता भी शामिल हैं.

ये सिर्फ संयोग नहीं हो सकता है कि अखिलेश यादव का ये बयान रायबरेली के ऊंचाहार में चुनाव प्रचार के दौरान दी है.

रायबरेली यानी गांधी परिवार का गढ़. रायबरेली जहां से इलाहाबाद की दूरी बहुत ज्यादा नहीं है और चौथे चरण का मतदान भी एक साथ दोनों जिलों यानी इलाहाबाद और रायबरेली में होना है.

इलाहाबाद वो शहर है, जो पिछले चार पीढ़ियों से गांधी परिवार और बच्चन परिवार के रिश्तों का गवाह रहा है. हालांकि, ये रिश्ता लगभग दो दशक से ऐसा लगता है मानो अपनी अंतिम सांसें ले रहा है.

अमिताभ बच्चन की केंद्र की बीजेपी सरकार से नजदीकियां कोई नई बात नहीं है. उनकी पत्नी जया बच्चन समाजवादी पार्टी की तरफ से राज्यसभा की सांसद हैं.

पिछले 15 साल से मोदी का प्रचार कर रहे हैं अमिताभ 

Amitabh 1

अमिताभ बच्चन पिछले 15 सालों से हर उस सरकारी प्रोजेक्ट का प्रचार करते हुए दिख जाएंगे, जिससे पीएम मोदी का नाम जुड़ा है. चाहे वो गुजरात पर्यटन से जुड़ा प्रोजेक्ट हो या फिर स्वच्छता मिशन से.

ऐसे में अचानक से जब अखिलेश सार्वजनिक मंच से सदी के महानायक को संबोधित कर उनसे निवेदन करते हैं तो हर कोई चौंक जाता है. शायद अमिताभ बच्चन ने खुद नहीं सोचा होगा कि अखिलेश ऐसा भी बोल सकते हैं?

समाजवादी पार्टी में अब मुलायम राज नहीं रहा, न ही शिवपाल यादव और अमर सिंह की चलती है. आज जो समाजवादी पार्टी हमारे सामने है वो अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी है. और अब इस पार्टी के सिंबल के जरिए अखिलेश स्टाइल की राजनीति होगी.

अखिलेश और राहुल गांधी हाल ही में गले मिले हैं. दोनों ने यूपी की जनता के सामने एक साथ कसमें खाई हैं कि वे दोनों यूपी के बेटे बनकर उनकी सेवा करेंगे.

सबकी जबाबदेही तय कर रहे हैं अखिलेश 

और यूपी के लड़कों को ये पसंद नहीं कि यूपी के अमिताभ बच्चन गुजरात के नरेंद्र मोदी के गधों का प्रचार करें. अखिलेश को ये भी पसंद नहीं कि उनकी पार्टी से लगातार राज्यसभा की सांसद मनोनीत की जाने वाली जया बच्चन के पति उनके विरोधी नरेंद्र मोदी का गुणगान करें.

मतलब ये कि अगर पत्नी जया बच्चन एसपी की सीट से लगातार सांसद हैं तो अमिताभ सिर्फ एक्टर बनकर पीएम से नजदीकी नहीं बढ़ा सकते हैं और अगर वे ऐसा करते हैं तो उन्हें भी इसका जवाब देना पड़ेगा.

यानी, अखिलेश के राज में हर किसी को जवाबदेही देनी होगी.

मतलब ये भी है कि मुलायम युग सच में खत्म हुआ. मुलायम कुछ खास लोगों के लिए जितने मुलायम थे...अखिलेश उतने नहीं रहेंगे.

अखिलेश ने राहुल से की है मजबूत दोस्ती

Rahul-Akhilesh 

आखिरी और सबसे अहम बात ये कि विपक्ष जितना कांग्रेस-एसपी गठबंधन अव्यावहारिक और अवसरवादी साबित करने कि कोशिश कर रहा है, अखिलेश और राहुल लगातार ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका साथ सिर्फ कागजों या चुनावी सफलता के लिए नहीं है.

वे दोनों ये बताने कि कोशिश कर रहे हैं कि उनके इस फैसले में बहुत सारी तार्किकता, समझदारी और एक-दूसरे का लंबा साथ निभाने की इच्छाशक्ति भी शामिल है.

कांग्रेस पार्टी को ज्यादा दिए जाने की आलोचना पर अखिलेश ने कहा कि, 'जिनका दिल बड़ा होता है और जो दिलदार होते हैं वही मजबूत दोस्ती कर पाते हैं. हम कांग्रेस के साथ मजबूत दोस्ती करना चाहते हैं, अगर दोस्ती कमजोर होगी तो जल्दी टूट जाएगी.'

सबसे अहम बात ये कि, हमें जो दिख रहा है शायद अखिलेश यादव का लक्ष्य उससे कहीं ज्यादा हो. उन्होंने खुद ही कहा है कि ये गठबंधन 2019 के आम चुनावों की दिशा-दशा तय करेगा.

कार्ल मार्क्स ने कहा था कि धर्म जनता के लिए अफीम का काम करती है. मुझे ऐसा लगता है कि जो लोग किसी तरह का नशा नहीं करते उन्हें ऐसी राजनीति भी बिल्कुल वैसी ही मदहोशी देती है जैसी- कोई देसी-विदेशी शराब नहीं दे सकती.

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