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अखिलेश सरकार ने लाखों खर्च कर यादव सिंह को CBI जांच से बचाया

प्रवर्तन निदेशालय ने यादव सिंह की 19.92 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर ली थी

FP Staff Updated On: May 05, 2017 11:26 AM IST

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अखिलेश सरकार ने लाखों खर्च कर यादव सिंह को CBI जांच से बचाया

अखिलेश यादव सरकार ने घूस लेने के आरोपी चीफ इंजीनियर यादव सिंह को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ वकीलों को बतौर फीस 21.15 लाख रुपए दिए थे. इस बात का खुलासा एक आरटीआई के जरिए हुआ है. यादव सिंह को भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सीबीआई जांच से बचाने के लिए अखिलेश सरकार ने लाखों रुपए खर्च थे.

इन वकीलों को दी थी फीस

पीटीआई के मुताबिक, विशेष सचिव (लॉ) सुरेंद्र पाल सिंह ने आरटीआई से जुड़ी जानकारी दी. उनके मुताबिक, अखिलेश यादव सरकार के साथ चार वकील जुड़े हुए थे. कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने उनके द्वारा दायर आरटीआई पर मिले जवाब का हवाला देते हुए कहा कि कपिल सिब्बल को आठ लाख, हरीश साल्वे को पांच लाख, राकेश द्विवेदी को 4.05 लाख और दिनेश द्विवेदी को 3.30 लाख रुपए फीस दी गई थी, जोकि पूरा मिला के 21.25 लाख रुपए होता है.

आपको बता दें कि यादव सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप हैं. उस पर भ्रष्टाचार के जरिए बीस हजार करोड़ का काला साम्राज्य खड़ा करने का आरोप है. वहीं आय से अधिक संपत्ति मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने भी यादव सिंह के खिलाफ कार्रवाई की थी और उनकी 19.92 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर ली थी.

यादव सिंह पर आरोप है कि उसने यूपी के सबसे अमीर विभाग नोएडा प्राधिकरण में चीफ इंजीनियर रहते हुए कई सौ करोड़ रुपये घूस लेकर ठेकेदारों को टेंडर बांटे. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस अथॉरिटी के इंजीनियर रहते हुए यादव सिंह की सभी तरह के टेंडर और पैसों के आवंटन बड़ी भूमिका होती थी.

कौन है यादव सिंह?

यादव सिंह एक डिप्लोमाधारी इंजीनियर था. 80 के दशक में जब दिल्ली से सटे नोएडा को एक शहर के तौर पर बसाने की योजना बनी. तो नोएडा अथॉरिटी में कई बेरोजगारों को नौकरी मिली. इसी दौर में यादव सिंह को भी अथॉरिटी में नौकरी मिल गई. 1995 तक यादव सिंह दो प्रमोशन पाकर पहले जूनियर इंजीनियर से असिस्टेंट इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर से प्रोजेक्ट इंजीनियर बन चुका था.

उत्तर प्रदेश में शासन चाहे किसी भी पार्टी का हो, यादव सिंह सबका चहेता बना रहा. वो मायावती की सरकार में भी उनका करीबी बना रहा. 2003 में समाजवादी पार्टी की सत्ता आने पर उसकी एसपी नेताओं से भी सांठगांठ रही. अपने राजनीतिक रसूख की वजह से यादव सिंह की लखनऊ की सत्ता के गलियारों में पहुंच बनी रही.

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