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मध्य प्रदेश: नींबू-मिर्ची के सहारे लड़ रहे हैं सिंधिया, लेकिन कांग्रेस खुद से कैसे बचेगी?

कांग्रेस को लग रहा है कि बीजेपी ने कुछ तांत्रिकों को अपने पाले में कर लिया है और अपने काले जादू से कांग्रेस के नेताओं को खत्म करने के लिए निकल चुके हैं

Updated On: Aug 14, 2018 11:12 AM IST

Sandipan Sharma Sandipan Sharma

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मध्य प्रदेश: नींबू-मिर्ची के सहारे लड़ रहे हैं सिंधिया, लेकिन कांग्रेस खुद से कैसे बचेगी?

एक खबर ये निकली है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नेता और पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री मान लिए गए ज्योतिरादित्य सिंधिया सूबे में नींबू और मिर्ची की माला पहनकर घूम रहे हैं.

जिन लोगों ने रामसे बंधुओं की बनाई भूतिया फिल्में 90 के दशक में सिनेमाघरों में देखने का दुर्भाग्य झेला है या फिर बाद के वक्त में बॉलीवुड की फैक्ट्री से निकली ‘फूंक’ या ‘भूत’ मार्का फिल्में देखी हैं, उन्हे पता है कि नींबू और मिर्च का मतलब होता है- जादू-टोना और शैतानी आत्माओं के खुराफात को अपने से दूर भगाना.

तो फिर आखिर, सिंधिया खुद को किस बुरी बला से बचाने की कोशिश कर रहे हैं?

नारियल फेंककर किया घोर अधर्म!

कुछ दिनों पहले सिंधिया ने एक नारियल अपनी कार के विंडो से बाहर फेंका था. यह नारियल उन्हें पन्ना में दिया गया था. बीजेपी ने कहा कि नारियल फेंक कर सिंधिया ने ‘घोर अधर्म’ किया है. जी हां, चौंकिए मत, सूबे में प्रचार अभियान ऐसी ही बेसिर-पैर की बातों के सहारे चल रहा है. बीजेपी के इस आरोप के जवाब में सिंधिया की टीम ने जवाब दिया कि नारियल में जादू-टोना करके दिया गया था, इससे सिंधिया और पार्टी को खतरा था. सो, नारियल को फेंकना ही पड़ा.

अब आपको बात समझ में आ जानी चाहिए. सिंधिया को जादू-टोने से डर लग रहा है. कांग्रेस को लग रहा है कि बीजेपी ने कुछ तांत्रिकों को अपने पाले में कर लिया है और वे तांत्रिक 'श्रूमन द ह्वाईट' की तरह अपने काले जादू से कांग्रेस के नेताओं को खत्म करने के लिए निकल चुके हैं जबकि ये नेता अभी चुनावी अखाड़े में भी नहीं उतरे. लेकिन जैसा कि उस मशहूर शेर में कहा गया है कि ‘हुए तुम दोस्त जिसके, दुश्मन उसका आस्मां क्यों हो’ उसी तर्ज पर यहां कहा जा सकता है कि जब दोस्त ही कांग्रेस को बर्बाद करने की काबिलियत रखते हैं तो फिर इस काम के लिए कांग्रेस को काला जादू जैसा दुश्मन तलाशने की क्या जरूरत है ?

दो दशक में पहली बार ऐसा वक्त आया है जब कांग्रेस के पास बीजेपी को हराने का अच्छा मौका है. लगातार तीन दफे सत्ता की बागडोर संभालने वाले मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए लोगों में कोई खास उत्साह का भाव नहीं है. मंदसौर में किसानों पर गोली चली, बेरोजगारी बढ़ी है, व्यापार-व्यवसाय ठहराव के शिकार हैं और बीएसपी के साथ गठबंधन होने के आसार मजबूत नजर आ रहे हैं. इन सारी बातों के कारण माहौल कांग्रेस के पक्ष में बनता दिख रहा है. लेकिन लगता है, पार्टी टेरेन्टिनो के रिजर्वॉयर डॉग्स की स्क्रिप्ट के हिसाब से काम कर रही है: आपसी विश्वास एक सिरे से गायब है और अंदरूनी तौर पर उठा-पटक करने वाले प्रतिद्वन्द्वियों को एकदम से खत्म कर देने की छुपी हुई हसरत जोर मार रही है.

कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का अलग तमाशा

सूबे के कांग्रेस महासचिव दीपक बवारिया पर जुलाई में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हमला किया था. बवारिया ने कहा था कि केवल कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं. पार्टी के एक कद्दावर नेता अजय सिंह के समर्थक बवारिया की इस बात से भड़क उठे. दरअसल बवारिया ने अपनी बात रीवा में कही थी जहां अजय सिंह की स्थिति मजबूत है. कांग्रेस महासचिव का बयान उन्हीं पर भारी पड़ा, लोगों को एक भद्दा सा तमाशा देखना पड़ा कि महासचिव का कुर्ता फटा हुआ है और वे उसी दशा में बदहवास बाहर निकल रहे हैं.

इसके कुछ ही दिन बाद बवारिया के सामने कांग्रेस कार्यकर्ता एकबार फिर से आपस में भिड़ गए और बावरिया से कुछ करते ना बना. कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शोर-शराबे और सिरफुटौव्वल से परेशान बवारिया ने उन्हें सलाह दी कि वे आरएसएस के अनुशासित कार्यकर्ताओं से सीख लें. उनके ऐसा कहने से कांग्रेस का मुंह मलिन हुआ और बीजेपी के चेहरे पर चमक आई.

बीजेपी के खेमे में जैसा जोश है उससे जमीनी स्तर पर निबट पाना कांग्रेस के लिए बहुत कठिन पड़ रहा है. जन आशीर्वाद यात्रा शुरू हो चुकी है और शिवराज सिंह चौहान की सभा में बड़ी संख्या में भीड़ जुट रही है. शिवराज सिंह चौहान आत्मविश्वास से लबरेज हैं और कांग्रेस पर पुरजोर ताकत से हमला बोल रहे हैं.

दूसरी तरफ कांग्रेस समय काटने में लगी है, संसाधनों की कमी के कारण वह लंबे समय तक खर्चीला चुनाव-अभियान जारी रख पाने के काबिल नहीं. उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अगस्त के आखिर में मशहूर ओंकारेश्वर मंदिर से अपने अभियान की शुरुआत करेंगे. इसके पहले कांग्रेस के खेमे से बस यही संदेश निकलकर सामने आ रहा है कि धींगामुश्ती आपस में ही मची है और महत्वाकांक्षाओं के जोर में कांग्रेस के नेता एक-दूसरे से भिड़ रहे हैं. ऐसे में लोग-बाग एक-दूसरे से पूछने लगे हैं कि ये लोग आपस ही में लड़ने में लगे हैं तो फिर बीजेपी को पटखनी देने की कोई योजना कैसे बनाएंगे.

भैंस के आगे बीन बजाने गए, भैंस ने खदेड़ दिया

दरअसल कांग्रेस के कार्यकर्ता जब आपस में लड़ नहीं रहे होते तो ऐसे-ऐसे करतब कर दिखाते हैं कि वह मजाक का विषय बन जाए और लोगों की बरबस ही हंसी छूट निकले. एक मुहावरा है भैंस के आगे बीन बजाय-भैंस बैठी पगुराय. तो इसी मुहावरे से प्रेरित होकर रविवार के रोज कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने यह जताने के लिए कि शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने सूबे की समस्या से मुंह फेर रखा है, एक विरोध प्रदर्शन करने की ठानी और देवास (इंदौर और भोपाल के बीच की जगह) में वे सचमुच ही भैंस ले आए, बांसुरी भी आई ताकि मतदाताओं के गुस्से का इजहार किया जा सके. अब बदकिस्मत कहिए कि विरोध-प्रदर्शन के तमाशे को कामयाब बनाने का दारोमदार जिस नायिका यानी की भैंस पर था वह ऐन वक्त पर भड़क उठी और उसने कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को खदेड़ दौड़ाया और इस तरह नवंबर-दिसंबर में होने जा रहे चुनावी मुकाबले में उतरने से पहले ही कांग्रेस के कार्यकर्ता मैदान से बिदके घोड़े बनते नजर आए.

कांग्रेस के भितरखाने बतकही ये चल रही है कि बीएसपी, शरद यादव की अगुवाई वाले जेडी(यू), एसपी और एनसीपी के साथ महागठबंधन बनाकर बीजेपी को पटखनी दी जाए. इन दलों के नेताओं को यकीन है कि चुनाव की घोषणा होने के पहले महागठबंधन बन जाएगा. लेकिन महागठबंधन बनाने का मंसूबा अभी दूर की कौड़ी लग रहा है क्योंकि पार्टी के अलग-अलग गुट अभी आपस में ही लड़ने-भिड़ने में लगे हैं.

जादू-टोना भगाने के लिए सिंधिया भले ही नींबू और मिर्च की माला पहनकर घूमते नजर आए लेकिन चुनाव जीतने के लिए दरअसल उन्हें दबंग फिल्म के लोकप्रिय ‘आइटम सॉन्ग’ का वीडियो देखना चाहिए ताकि याद रहे कि पार्टी को आपस में जोड़ने की जरूरत है. जी हां, गीत की तर्ज पर कहें तो- फेविकोल से.

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