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तैयारियां पूरी न होने पर टल सकते हैं निकाय चुनाव: चुनाव आयोग

एसके अग्रवाल ने कहा कि समय से आरक्षण की कार्रवाई होना जरूरी है, ऐसा तभी होगा, जब ओबीसी का रैपिड सर्वे हो जाएगा

FP Staff Updated On: May 22, 2017 10:01 PM IST

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तैयारियां पूरी न होने पर टल सकते हैं निकाय चुनाव: चुनाव आयोग

उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव टल सकते हैं. राज्य निर्वाचन आयुक्त ने सोमवार को आगरा में कहा कि सभी तैयारियां पूरी नहीं हुईं तो निकाय चुनाव टल भी सकते हैं.

राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल और एडीजी कानून व्यवस्था सोमवार को आगरा में थे. यहां उन्होंने आगरा जोन के सभी आठ जिले के अधिकारियों की बैठक ली. बैठक में कमिश्नर से लेकर सभी जिलों के डीएम और एसएसपी मौजूद रहे.

निकाय चुनावों की इस समीक्षा बैठक के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी नहीं हुईं तो निकाय चुनाव टल भी सकते हैं. उन्होंने कहा कि समय से आरक्षण की कार्रवाई होना जरूरी है, ऐसा तभी होगा, जब ओबीसी का रैपिड सर्वे हो जाएगा .

नामजद अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई

रैपिड सर्वे पूरा नही हुआ तब तक चुनाव नहीं हो सकते. अगर दोबारा सर्वे शासन स्तर पर होता है तो ऐसी दशा में चुनाव टल सकते हैं. सितंबर या अक्टूबर में भी हो सकते है निकाय चुनाव.

Voters

मतदाता सूची की कमियां दस दिनों में पूरी हो जाएगी. इस दौरान निर्वाचन आयुक्त ने प्रदेश में कानून व्यवस्था के मामले में पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्पेशल रिपोर्ट केस में भी पुलिस लापरवाही बरत रही है.

नामजद अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई हो रही है. जांचें लंबे समय तक चलती रहती हैं, इससे जनता का विश्वास पुलिस प्रशासन पर से हटता है.

48 घंटे तक शराब की सभी दुकानें बंद रहेंगीं

अपराधियों की गिरफ्तारी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि आर्म्स की दुकानों और शराब पर खास ध्यान रखने का निर्देश है. शराब की तस्करी पर रोक लगाना जरूरी है. इस दौरान प्रदेश की सीमाओं पर खास ध्यान रखा जाएगा.

Indian Voters

एसके अग्रवाल ने कहा कि जिस भी जिले में चुनाव होंगे, उस जिले में 48 घंटे तक शराब की सभी दुकानें बंद रहेंगीं. हिस्ट्रीशीटरों, ईनामी बदमाश और वांटेड अपराधियों के खिलाफ भी कार्रवाई संतोषजनक नहीं हो रही है. ऐसे अपराधियों पर गुंडा एक्ट, गैंगस्टर और एनएसए की कार्रवाई होनी चाहिए.

प्रोटेक्टिव गियर का इस्तेमाल

साम्प्रदायिक और जातिगत हिंसा जैसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई ज़रूरी है. जहां कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति हो वहां पुलिसकर्मी और अधिकारियों को प्रोटेक्टिव गियर का इस्तेमाल करना चाहिए.

इनका इस्तेमाल ना करने से ही पुलिसकर्मी घायल होते हैं. चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हों, इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है. संवेदनशील पोलिंग बूथों की वेब कास्टिंग, वीडियोग्राफी होगी. सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे. बड़े शहरों में ड्रोन का भी इस्तेमाल होगा.

न्यूज़ 18 साभार

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