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SC के फैसले के बाद केजरीवाल ने दिया IAS अधिकारियों को काम में तेजी लाने का आदेश

दिल्ली सरकार ने बुधवार को नौकरशाहों के तबादलों और तैनातियों के लिए भी एक नई प्रणाली शुरू की जिसके लिए मंजूरी देने का अधिकार मुख्यमंत्री केजरीवाल को दिया गया है

Updated On: Jul 05, 2018 09:02 AM IST

Bhasha

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SC के फैसले के बाद केजरीवाल ने दिया IAS अधिकारियों को काम में तेजी लाने का आदेश
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद  मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कैबिनेट की बैठक बुलाई और अफसरों को राशन की घरों पर आपूर्ति और सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसी परियोजनाओं को पूरा करने के  लिए की रफ्तार तेज करने का निर्देश दिया.

दिल्ली सरकार ने बुधवार को नौकरशाहों के तबादलों और तैनातियों के लिए भी एक नई प्रणाली शुरू की जिसके लिए मंजूरी देने का अधिकार मुख्यमंत्री केजरीवाल को दिया गया है.

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने करीब आठ मिनट तक चली मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार काम करने का निर्देश दिया गया है.

सिसोदिया ने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच सत्ता संघर्ष पर कोर्ट के फैसले के बाद आप सरकार को अपने हर निर्णय को उपराज्यपाल अनिल बैजल से मंजूर कराने की जरूरत नहीं है.

क्या था फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता लेकिन यह भी कहा कि उपराज्यपाल को स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार नहीं है.

केजरीवाल ने बैठक के बाद ट्वीट किया , ‘ दिल्ली सरकार के सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कामकाज करें. अब राशन की घरों पर आपूर्ति और सीसीटीवी लगाने के प्रस्तावों पर भी तेजी लाने का निर्देश दिया है.’

अभी तक आईएएस और दानिक्स (दिल्ली , अंडमान निकोबार द्वीपसमूह सिविल सेवा) अधिकारियों के तबादलों और तैनातियों के लिए मंजूरी देने का अधिकार उपराज्यपाल के पास रहा है.

सेवा संबंधी ममाले अब भी LG के पास

हालांकि दिल्ली सरकार में कार्यरत वरिष्ठ नौकरशाहों ने दावा किया कि ‘ सेवा संबंधी मामले ’ अब भी उपराज्यपाल के कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं क्योंकि दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है.

एक शीर्ष अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट की यथोचित नियमित पीठ सेवा संबंधी मामलों और अन्य मुद्दों पर अंतिम निर्णय करेगी.

एक अन्य अधिकारी ने दावा किया कि शीर्ष अदालत ने गृह मंत्रालय की मई , 2015 की अधिसूचना को रद्द नहीं किया है जिसके मुताबिक सेवा संबंधी मामले उपराज्यपाल के अधीन आते हैं.

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