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गुजरात, कर्नाटक में 'सॉफ्ट हिंदू' बने राहुल अब फिर सेक्युलरिज्म की शरण में

राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग के साथ मुलाकात की है. कांग्रेस को कैसे इस तबके के करीब लाया जाए, ये इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा था.

Syed Mojiz Imam Updated On: Jul 12, 2018 04:21 PM IST

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गुजरात, कर्नाटक में 'सॉफ्ट हिंदू' बने राहुल अब फिर सेक्युलरिज्म की शरण में

राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग के साथ मुलाकात की है. कांग्रेस को कैसे इस तबके के करीब लाया जाए, ये इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा था. हालांकि राहुल गांधी ने सिर्फ ऐसे लोगों को बुलाया था,जो मुसलमानों में कट्टर छवि का ना दिखाई देता हो. इस बैठक में राहुल गांधी से कई तीखे सवाल भी किए गए हैं. गुजरात और कर्नाटक में मदिरों में जाने को लेकर मुस्लिम समाज नें अपनी आशंकाए जाहिर की हैं. जिस पर राहुल गांधी ने कहा कि वो मंदिर के अलावा मस्जिद और चर्च में जाते हैं. लेकिन मीडिया इसका प्रचार नहीं करती है. ये बात दीगर है कि राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव में 27 मंदिरों में जाकर दर्शन किया था.

सोमनाथ मंदिर के रजिस्टर विवाद के बाद पार्टी ने कहा कि राहुल गांधी जनेऊधारी ब्राह्मण हैं. लेकिन कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी को अंदाजा हो गया है कि सॉफ्ट हिंदुत्व कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा नहीं है. वरिष्ठ पत्रकार राजेश सुंदरम कहते है कि 2019 का चुनाव बीजेपी के खिलाफ लड़ना है, इसलिए राहुल गांधी को सॉफ्ट हिंदुत्व की जगह सेकुलर बने रहना होगा. क्योंकि गुजरात में कई सीट कांग्रेस नोटा की वजह से हार गई थी. कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व की लाइन पर चलने के बाद भी हिंदुत्व वोट को अपने खाते में लाने में बीजेपी से बेहतर परफॉर्म नहीं कर सकती है.

असंमजस में राहुल गांधी ?

Rahul Gandhi attends Seva Dal meeting

राहुल गांधी कर्नाटक और गुजरात के नतीजों से शायद सबक ले रहे हैं, जिनमें तमाम मंदिर जाने के बाद बीजेपी जैसा समर्थन कांग्रेस को नहीं मिला था. कांग्रेस के नेता पहले ये दिखाने की कोशिश करते रहे कि वो भी सॉफ्ट हिंदुत्व की लाइन पर हैं. लेकिन बीजेपी के हिंदुत्व का मुकाबला करना कांग्रेस के बस की बात नहीं है. इसलिए राहुल गांधी ने मुस्लिम समाज से डॉयलाग की शुरुआत की है.क्योंकि इस तबके को लग रहा था कि कांग्रेस को भी मुसलमानों का साथ देने में दिक्कत हो रही है. खासकर ऐसे वक्त पर जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है.

कांग्रेस भी पिछले चार साल में इस तरह खुलकर मुसलमानों से मिलने में परहेज कर रही थी. वरिष्ठ पत्रकार अजित द्विवेदी का कहना है कि ये सच है कि कांग्रेस पार्टी मुसलमानों से दूरी बनाए हुए है लेकिन राहुल गांधी को लग रहा कि मुसलमान अगर अलग-थलग महसूस करने लगेगा तो इसका सामाजिक नुकसान होगा. मुसलमानों के पास भी कांग्रेस के अलावा पूरे देश में कोई विकल्प नहीं है. जो बीजेपी के खिलाफ खड़ा हो सकता है.

हालांकि अब राहुल गांधी को लग रहा है कि बीजेपी की पिच पर खेलने की जगह अपने पिच पर खेलना ज्यादा मुफीद है. इस बैठक में गए सुप्रीम कोर्ट के वकील फुजैल अहमद अय्यूबी ने कहा कि राहुल गांधी से बात करके कांग्रेस के बारे में काफी शंकाए दूर हुई हैं. एक तो राहुल गांधी मुस्लिम समाज को विश्वास में लेना चाहते हैं. दूसरे बीजेपी के मुकाबले मुसलमानों के लिए कांग्रेस ठीक है. राहुल गांधी ने बातचीत में कहा कि कांग्रेस इसलिए कमजोर हुई है क्योंकि हिंदू-मुस्लिम के बीच रिश्ता कमजोर हुआ है.

कांग्रेस इस रिश्ते को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है. जो नफरत और डर का माहौल है इसको लेकर राहुल गांधी काफी चिंतित दिखाई दिए हैं. राहुल गांधी ने मुस्लिम समाज को विश्वास दिलाया है कि जो कांग्रेस की विचारधारा है उससे पार्टी हटी नहीं है. राजनीतिक नफा-नुकसान के हिसाब से कांग्रेस कोई फैसला नहीं लेने जा रही है. इसका मतलब ये है कि 2019 के चुनाव में राहुल गांधी पार्टी की पुरानी विचारधारा पर ही चलने वाले हैं. वो सॉफ्ट हिंदुत्व की लाइन पर आगे नहीं बढ़ेंगे.

राजनीतिक मजबूरी

सॉफ्ट हिंदुत्व की लाइन पर आगे ना बढ़ना राजनीतिक मजबूरी भी है. कांग्रेस को समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ आगे गठबंधन करना है. इसमें सॉफ्ट हिंदुत्व आड़े आ सकता है. खासकर लेफ्ट पार्टियों को कांग्रेस के साथ जाने में दिक्कत हो सकती है, जिससे महागठबंधन की योजना फेल हो सकती है. रीजनल पार्टियां राहुल गांधी के साथ सहज नहीं है.

ममता बनर्जी कई बार कह चुकी हैं कि राहुल गांधी के साथ जाने में उनको परहेज है. क्षेत्रीय दल कांग्रेस को बहुत स्पेस देने के मूड में नहीं है. उत्तर भारत में कांग्रेस रीजनल पार्टियों पर निर्भर है. पार्टी का वजूद सिर्फ क्षेत्रीय दलों के बदौलत बच सकता है. बंगाल में पार्टी के भीतर इसको लेकर काफी तनातनी है कि टीएमसी के साथ जाए या लेफ्ट के साथ जाना चाहिए.

कट्टर छवि के मुसलमानों से परहेज

RPT WITH CAPTION CORRECTION...Mandsaur: Congress President Rahul Gandhi waves at farmers during 'Kisan Samriddhi Sankalp' rally at Khokhra in Mandsaur, Madhya Pradesh on Wednesday, June 06, 2018. (PTI Photo) (PTI6_6_2018_000154B) *** Local Caption ***

राहुल गांधी से मिलने वाले लोगों मे कोई ऐसा नहीं था, जिसकी धार्मिक या कट्टर छवि रही हो. ज्यादातर लोग दिल्ली में रहते हैं और अपने पेशे के माहिर लोगों मे शुमार होते हैं. अबू सालेह शरीफ सच्चर कमेटी के सदस्य थे. वहीं सैयद इरफान हबीब एकेडेमिक बैकग्राउंड से आते है. अबू सालेह ने मुसलमानों की नौकरियों में कम हो रही संख्या पर अपनी चिंता जाहिर की है. वहीं सैयद इरफान हबीब ने कहा कि जो समाज के मसले हैं उन पर राहुल गांधी को जोर देना चाहिए जैसे रोजगार गरीबी और डर का माहौल ये सबके लिए है.

मुसलमान इसमें अपवाद नहीं है. हालांकि कांग्रेस के दस साल के यूपीए के शासन में इन सब मसलो पर गौर नहीं किया गया. सच्चर कमेटी की सिफारिश थी कि मुस्लिम बहुल जिलों में आवासीय स्कूल खोले जाएं लेकिन उसपर काम नहीं हो पाया है. प्रधानमंत्री के पंद्रह सूत्रीय प्रोग्राम में काफी त्रुटियां थीं, जिससे लोगों को लाभ नहीं मिल पाया है.

( लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)

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