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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 12 नवंबर तक सीबीआई के कई अधिकारियों की नींद क्यों गायब रहेगी?

केंद्र सरकार का मानना है कि सीवीसी की सिफारिश पर जो कदम उठाया गया उस पर अदालत ने किसी भी तरीके से कोई रोक नहीं लगाई. सरकार ने अंतरिम डायरेक्टर की नियुक्ति की थी, जिसे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला केंद्र सरकार के निर्णयों के खिलाफ है.

Updated On: Oct 26, 2018 10:26 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 12 नवंबर तक सीबीआई के कई अधिकारियों की नींद क्यों गायब रहेगी?
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सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ देशभर में कांग्रेस पार्टी का विरोध प्रदर्शन का असर दिखने लगा है. सालों से मुद्दा विहीन कांग्रेस पार्टी को मोदी सरकार ने एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है. सीबीआई के बहाने ही कांग्रेस पार्टी अब अपना चुनावी वैतरणी पार लगाना चाह रही है.

शुक्रवार को दिल्ली के दयाल सिंह कॉलेज के सामने एकत्रित कांग्रेसी नेताओं के चेहरे पर खिली मुस्कुराहट से यह साफ झलक रहा था. कांग्रेसी नेताओं के चेहरे की चमक से साफ था कि पार्टी, सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा के बहाने रफाल डील को अब आने वाले चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बनाने जा रही है.

शुक्रवार को दिल्ली के दयाल सिंह कॉलेज के सामने मीडिया से दूर रहने वाले कांग्रेस पार्टी के कई दिग्गज, अचानक ही अवतरित होने लगे. मीडिया ने भी काफी साल बाद उन नेताओं के अपने कैमरे में भरपूर जगह दी. कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश में सीबीआई मुख्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया.

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद दिल्ली स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया. दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय पर घेराव के बाद राहुल गांधी और कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं ने लोधी रोड पुलिस स्टेशन जाकर गिरफ्तारी भी दी.

कई पार्टियों का मिला समर्थन:

दिल्ली में कांग्रेस पार्टी को कई विपक्षी दलों का समर्थन मिला. सीपीआई के डी राजा, जेडीयू से निलंबित शरद यादव, एनसीपी के डीपी त्रिपाठी और टीएमसी सहित कई पार्टियों के नेताओं ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन मार्च में शामिल होकर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला. कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में तेलुगु देशम पार्टी का भी साथ मिला. हैदराबाद में सीबीआई मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन में कांग्रेस और टीडीपी साथ-साथ दिखे.

विरोध प्रदर्शन में अंबिका सोनी

विरोध प्रदर्शन में अंबिका सोनी

दिल्ली में कांग्रेस प्रदर्शनकारियों को काबू में रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने हल्का वॉटर कैनन का इस्तेमाल भी किया. कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन दायल सिंह कॉलेज से शुरू होकर लोधी रोड थाने पर खत्म हुआ. इस बीच राहुल गांधी और कई कांग्रेसी कार्यकर्ता सीबीआई के मुख्यालय की तरफ भी बढ़े थे. लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनको पहले ही रोक दिया. अहमद पटेल, आनंद शर्मा, अंबिका सोनी, महाबल मिश्रा, जतिन प्रसाद, दीपेंद्र हुड्डा जैसे कांग्रेसी नेताओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया.

कई राज्यों की राजधानी में भी हुआ प्रदर्शन:

कांग्रेस पार्टी ने कई राज्यों की राजाधानी में भी विरोध प्रदर्शन किया. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने कार्यकर्ताओं के साथ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. लखनऊ में सीबीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और राज बब्बर को पुलिस ने हिरासत में भी लिया. कांग्रेसी कार्यकर्ता 'गली-गली में शोर है, देश का चौकीदार चोर है' जैसे नारे लगा रहे थे.

शुक्रवार को देशभर में चले कांग्रेस के प्रदर्शन पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि कांग्रेस के पास कोई जनहित का मुद्दा नहीं है इसलिए वो बिना मतलब के मुद्दों को उठा रही है. उन्होंने कहा कि हमें जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए.

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दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के बीच राहुल गांधी ने कहा कि देश का चौकीदार चोर है. सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को जानबूझकर मोदी सरकार ने छुट्टी पर भेजा है. मोदी सरकार को डर था कि अगर सीबीआई ने राफेल डील की जांच की तो सारे राज खुल जाएंगे.

राहुल गांधी का बीजेपी पर हमला:

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री किसान का एक रुपया कर्जा माफ नहीं कर सकते. मेहुल चोकसी, नीरव मोदी पैसे लेकर भाग गया. अब शायद अनिल अंबानी भी भाग जाएगा. सबके मन में एक ही बात है कि देश का चौकीदार चोर है. पीएम भाग सकते हैं. छुप सकते हैं. लेकिन अंत में, सच सामने आता है. सीबीआई डायरेक्टर को हटाया गया. पीएम ने सीबीआई डायरेक्टर के खिलाफ एक्शन लिया, यह एक अलग काम है. यह परेशान करने जैसा काम है.’

कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने भी केंद्र सरकार के कदम की आलोचना की. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि हम सीबीआई के खिलाफ प्रोटेस्ट नहीं कर रहे हैं, हम नरेंद्र मोदी की दखलअंदाजी के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे हैं. यह प्रोटेस्ट सरकार का देश की अहम संस्थाओं में दखल अंदाजी के खिलाफ है.

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कांग्रेस के प्रदर्शन के ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:

एकतरफ जहां कांग्रेस पार्टी पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर रही थी ठीक उससे कुछ समय पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुना दिया. छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की याचिका पर सुनवाई करने के बाद सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस एसके पॉल और जस्टिस केएम जोसफ की बेंच ने फैसला दिया कि आलोक वर्मा द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच सीवीसी दो सप्ताह के भीतर पूरी करे. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एके पटनायक मामले की जांच करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस दौरान सीबीआई के अंतरिम चीफ बनाए गए नागेश्वर राव कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे. सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जबतक इस मामले में दोबारा सुनवाई नहीं कर लेता, तबतक सीबीआई के नए डायरेक्टर एम नागेश्वर राव एक भी नीतिगत फैसला नहीं लेंगे. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी, केंद्र सरकार और सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को भी नोटिस जारी किया. इस मामले की अगली सुनवाई अब 12 नवंबर को होगी.

दो हफ्तों में पूरी करनी होगी जांच:

सीवीसी को अब इस मामले की जांच दो हफ्तों में पूरी करनी होगी. इस जांच को अब एके पटनायक सुपरवाइज करेंगे. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार और विपक्ष दोनों ने स्वागत किया. केंद्र सरकार जहां मान रही है कि जो फैसला उसने लिया था कोर्ट का आदेश उसी से मिलता-जुलता है. केंद्र सरकार का मानना है कि सीवीसी की सिफारिश पर जो कदम उठाया गया उस पर अदालत ने किसी भी तरीके से कोई रोक नहीं लगाई.

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सरकार ने अंतरिम डायरेक्टर की नियुक्ति की थी, जिसे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला केंद्र सरकार के निर्णयों के खिलाफ है. कांग्रेस पार्टी के नेताओं का मानना है कि भले ही अंतरिम डायरेक्टर पर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ फैसला नहीं किया, लेकिनअंतरिम डायरेक्टर को बांध दिया है.

कुल मिलाकर अगले कुछ दिनों तक सीबीआई अब हर रोज अखबारों की सुर्खियां बनती रहेगी. सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना अब अपने-अपने किले की घेरांबदी करने में लग जाएंगे.

क्योंकि, आने वाला हर दिन तो छोड़ दीजिए हर मिनट दोनों अधिकारियों के लिए काफी अहम साबित होने वाला है. एकदूसरे के खिलाफ आरोपों की फेहरिस्तों की भी खबर छन-छन कर मीडिया में आएगी. दोनों अधिकारी मीडिया के जरिए भी एक दूसरे पर आरोपों की बौछार करेंगे. यहां तक कि आईपीएस लॉबियों में खेमेबंदी शुरू हो जाएगी.

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