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एक और चुनावी हार के साथ राहुल गठबंधन से सत्ता हथियाने वाले नायक के रूप में उभरे हैं

गुजरात में जबरदस्त एंटी इंकंबैंसी होने के बावजूद कांग्रेस चुनाव हारी, राहुल जेडीएस से समझौते के दौरान नदारद थे लेकिन येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद क्रेडिट लेने के लिए तुरंत आ गए

Updated On: May 19, 2018 08:25 PM IST

FP Staff

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एक और चुनावी हार के साथ राहुल गठबंधन से सत्ता हथियाने वाले नायक के रूप में उभरे हैं

कर्नाटक के नवनियुक्त मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने विश्वास मत का सामना किए बगैर ही शनिवार को इस्तीफा देने की घोषणा कर दी और इस तरह कर्नाटक में तीन दिन पुरानी येदियुरप्पा सरकार गिर गई. इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और बीजेपी पर जमकर हमला बोला.

राहुल गांधी को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नरेंद्र मोदी, अमित शाह और संघ पर डेमोक्रेसी की हत्या के लिए भड़कते देखना बेहद दिलचस्प वाकया था. राहुल गांधी के जीत में उन्मत शब्द, टीवी मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर उत्साहजनक कमेंटरी, देखकर कोई भी भूल वश ये समझ सकता है कि कांग्रेस कर्नाटक में पूरी तरह जीती है और बीजेपी बैकडोर से सत्ता तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.

थोड़ी देर के लिए खुद को शांत रखकर सोचना होगा. तथ्य ये है कि कांग्रेस चुनाव में जेडीएस को बीजेपी की बी टीम कहकर लड़ रही थी. लड़ाई उसने दूसरे नंबर पर आकर खत्म की और नतीजे आने के बाद तीसरे नंबर की पार्टी को मुख्यमंत्री पद का न्योता दिया. येदियुरप्पा को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस ने अपना बेहतरीन प्रयास किया. लेकिन सच्चाई ये कि राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस लगातार दो विधानसभा चुनाव हार चुकी है.

गुजरात में जबरदस्त एंटी इंकंबैंसी होने के बावजूद कांग्रेस चुनाव जीतने में नाकाम रही. राहुल गांधी जेडीएस से समझौते के दौरान नदारद थे. नतीजे के दिन जब उन्होंने देखा कि बीजेपी विजेता बनकर उभरी है तो उसके बाद नेपथ्य में चले गए थे. जब तक फ्लोर टेस्ट अपनी आखिरी परिणति में नहीं पहुंचा राहुल गांधी तब तक पीछे ही रहे.

जब येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया उसके बाद राहुल गांधी लोगों के बीच जीत का क्रेडिट लेने के लिए सामने आए. निश्चित रूप से उन्हें इस बात का क्रेडिट तो मिलना ही चाहिए कि वो हार दर हार के बावजूद मीडिया से मुखातिब होते रहे हैं. लेकिन अगर कर्नाटक के चुनाव नतीजों की बात की जाए तो बहुमत साबित न कर पाने के बावजूद ये भारतीय जनता पार्टी है जो विजेता बनकर उभरी है.

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