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कर्नाटक चुनाव: इन दो बड़े नेताओं की लड़ाई में फंसी बीजेपी

पार्टी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा बीएस येदियुरप्पा और उनके शिष्य केएस ईश्वरप्पा के बीच एक बार फिर से जंग छिड़ गई है

Updated On: Feb 23, 2018 03:17 PM IST

FP Staff

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कर्नाटक चुनाव: इन दो बड़े नेताओं की लड़ाई में फंसी बीजेपी

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी हो गईं है. प्रदेश में पार्टी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा बीएस येदियुरप्पा और उनके शिष्य केएस ईश्वरप्पा के बीच एक बार फिर से जंग छिड़ गई है. कुछ महीने पहले पार्टी हाईकमान ने दोनों के बीच सुलह करवा दी थी. लेकिन एक बार फिर से दोनों नेता आमने-सामने आ गए हैं.

येदियुरप्पा ने ही ईश्वरप्पा को राजनीति के गुर सिखाए. दोनों कर्नाटक के शिमोगा जिले से ही हैं. ईश्वरप्पा खुद कहते हैं कि येदियुरप्पा ने ही पहली बार 1989 में शिमोगा से उन्हें विधायक बनाया. इसके अलावा 1990 के शुरूआती दौर में येदियुरप्पा ने ही उन्हें कर्नाटक में बीजेपी अध्यक्ष भी बनाया था.

ईश्वरप्पा बीजेपी सरकार में एक ताकतवर मंत्री थे और कर्नाटक में दो बार पार्टी के अध्यक्ष भी बने थे. इस वक्त ईश्वरप्पा विधान परिषद में विपक्ष के नेता हैं.

येदियुरप्पा बनाम ईश्वरप्पा

'गुरु-शिष्य' के रिश्तों में खटास की शुरूआत 2011 में हुई जब येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया. ईश्वरप्पा 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ हार गए थे. साल 2014 में जब लोकसभा चुनाव के दौरान येदियुरप्पा की बीजेपी में वापसी हुई तो ईश्वरप्पा खुश नहीं थे.

साल 2016 में जब एक बार फिर येदियुरप्पा को राज्य में बीजेपी का अध्यक्ष और मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया गया तो दोनों नेताओं के बीच घाव गहरे हो गए. बदले राजनीतिक हालात में ईश्वरप्पा काफी असुरक्षित महसूस करने लगे.

रायाना ब्रिगेड

ईश्वरप्पा ने दलितों और पिछड़े वर्गों के लिए 'रायाना ब्रिगेड' नामक एक राजनीतिक मंच तैयार कर लिया. सोंगोली रायना कुरुबा जाति से स्वतंत्रता सेनानी थे, उन्हीं के नाम पर ईश्वरप्पा ने चतुराई से अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी. जबकि येदियुरप्पा लिंगायत जाति के नेता माने जाते हैं.

कुछ महीने पहले ईश्वरप्पा ने न्यूज़ 18 से कहा था "मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी एक कुरुबा हैं. उनके पास अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों के लिए 'आहिंद' आंदोलन है. मैंने दलितों और पिछड़े वर्गों को बीजेपी में लाने के लिए 'रायाना ब्रिगेड' की स्थापना की है. येदियुरप्पा से लड़ने के लिए नहीं. बीजेपी को ये समझना चाहिए."

ईश्वरप्पा ने पूरे राज्य में अपने ब्रिगेड के साथ कई बैठके की. उनकी इस हरकत के बाद पार्टी के हाई कमान ने उन्हें चेतावनी दी और उनकी सारी गतिविधियों पर लोक लगा दी. लेकिन उनके समर्थक इससे खासे नाराज हो गए और बीजेपी हाई कमान की चेतावनी के बावजूद उन्होंने अपने ब्रिगेड के साथ बैठकों का दौर जारी रखा.

टिकट को लेकर लड़ाई

ईश्वरप्पा शिमोगा सिटी से टिकट की मांग कर रहे हैं. लेकिन येदियुरप्पा इसके लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने ईश्वरप्पा से कहा है कि वो टिकट को लेकर कोई गारंटी नहीं देंगे. टिकट को लेकर पार्टी हाईकमान का फैसला आखिरी होगा. ईश्वरप्पा को लगता है कि येदियुरप्पा इस बात का बहाना बना कर उनका टिकट काट रहे हैं कि वो पहले से ही एमएलसी हैं.

ईश्वरप्पा ने रखी मांग

गुरुवार की रात ईश्वरप्पा के 'रायना ब्रिगेड' के नेताओं ने कर्नाटक में बीजेपी के प्रभारी मुरलीधर राव से मुलाकत की. ईश्वरप्पा के समर्थकों ने 21 टिकटों की मांग की है. जिसमें शिमोगा सिटी से ईश्वरप्पा का टिकट भी शामिल है. बैठक में मौजूद लोगों के मुताबिक बीजेपी प्रभारी से कहा गया कि ईश्वरप्पा ओबीसी के एक बड़े नेता है और उन्हें अनदेखा कर चुनाव में पार्टी को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है.

राव ने कहा है कि वो उनकी मांग को पार्टी के हाई कमान तक ले कर जाएंगे. जब न्यूज़ 18 ने येदियुरप्पा से संपर्क किया, तो उन्होंने गुस्से में कहा कि कोई 'रायना ब्रिगेड' नहीं है और उन्होंने कुछ महीने पहले इसे भंग कर दिया था. उन्होंने कहा 'अगर आपके पास उनके उम्मीदवारों की सूची है, तो कृपया मुझे इसे दें मैं देखूंगा.'

पिछले हफ्ते मैसूर में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली में ईश्वरप्पा नहीं गए थे. तब से ही उनको लेकर कई अटकलें शुरू हो गई थी.

(न्यूज18 के लिए डीपी सतीश की रिपोर्ट)

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