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AAP Vs LG: दिल्ली पर राज करने को लेकर SC का बड़ा फैसला, केजरीवाल ने दिया ऐसा जवाब

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ की इस सवाल पर अलग-अलग राय रही कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सेवाओं पर नियंत्रण किसके पास है, राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण पर अपना खंडित फैसला कोर्ट ने बड़ी पीठ के पास भेज दिया है

Updated On: Feb 14, 2019 03:29 PM IST

FP Staff

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AAP Vs LG: दिल्ली पर राज करने को लेकर SC का बड़ा फैसला, केजरीवाल ने दिया ऐसा जवाब

दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल (LG) के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ की इस सवाल पर अलग-अलग राय रही कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सेवाओं पर नियंत्रण किसके पास है. राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण पर अपना खंडित फैसला कोर्ट ने बड़ी पीठ के पास भेज दिया है. दो जजों की बेंच ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), राजस्व, जांच आयोग और लोक अभियोजक (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की नियुक्ति के मुद्दे पर सहमत जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इस अधिसूचना को बरकरार रखा कि दिल्ली सरकार का एसीबी भ्रष्टाचार के मामलों में उसके कर्मचारियों की जांच नहीं कर सकता.

वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केजरीवाल ने कहा कि जो सरकार इतने भारी बहुमत से चुनकर आती है अगर उसके पास काम करने की शक्तियां नहीं होगी, तो काम कैसे करेंगे. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन सीट वाली पार्टी ट्रांसफर तय करेगी. अब क्या भ्रष्टाचार रोकने के लिए हम विपक्ष से बोलें. इस मामले में केजरीवाल ने कहा, विवाद का समाधान अब जनता करेगी. दिल्ली के लोगों को उनका अधिकार मिलना चाहिए. दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए. मैं दिल्ली के लोगों से अपील करना चाहता हूं कि आने वाले लोकसभा चुनाव में सातों सीटों पर आम आदमी पार्टी को जिताएं, ताकि हम दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग लोकसभा में उठा सकें. वहीं केजरीवाल ने कहा- कोर्ट का फैसला जनता और जनतंत्र के खिलाफ है. 67 सीटें जीतने वाली पार्टी को अधिकार नहीं है. हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. केजरीवाल ने कहा- हमारे मन में देश को लेके बहुत ज्यादा चिंता है. उसी वजह से हम लालायित हैं. उन्होंने (कांग्रेस) ने लालबाग मना कर दिया है.

वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि केंद्र के पास जांच आयोग नियुक्त करने का अधिकार होगा. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि बहरहाल, दिल्ली सरकार के पास बिजली आयोग या बोर्ड नियुक्त करने या उससे निपटने का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपराज्यपाल के बजाय दिल्ली सरकार के पास पब्लिक प्रॉसिक्यूटर या कानूनी अधिकारियों को नियुक्त करने का अधिकार होगा. भूमि राजस्व की दरें तय करने समेत भूमि राजस्व के मामलों को लेकर अधिकार दिल्ली सरकार के पास होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने एलजी को भी चेताया और कहा कि उपराज्यपाल को अनावश्यक रूप से फाइलों को रोकने की जरूरत नहीं है और राय को लेकर मतभेद होने के मामले में उसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एंटी करप्शन ब्यूरो, ग्रेड-1 और ग्रेड-2 अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग के साथ-साथ जांच आयोग के गठन पर केंद्र सरकार का अधिकार होगा. बिजली विभाग, राजस्व विभाग, ग्रेड-3 और ग्रेड-4 अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेगा. इन मामलों में भी अलग राय होने पर एलजी की बात को वरीयता दी जाएगी.

दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल (LG) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने केंद्र सरकार के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट को भी निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा, क्या मोदी जी की मर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट निर्णय नही देता? राफेल में खुला भ्रष्टाचार हुआ केंद्र सरकार ने SC में झूठ बोला पर SC खामोश ? CBI पर SC ने निर्णय दिया या मजाक किया? दिल्ली की करोड़ों जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया सुप्रीम कोर्ट है या नायब तहसीलदार कोर्ट?

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