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आप-मुख्य सचिव विवाद : लोकतंत्र के प्रहरी ही उसका गला घोंटने पर उतारू हैं

मुख्यमंत्री आवास के भीतर मीटिंग के बाद पनपे इस नए विवाद ने पूरी लड़ाई को एक ऐसे मुकाम पर ला कर खड़ा कर दिया है, जहां से अब लोकतंत्र की दुहाई भी मुश्किल काम हो गया है

Amitesh Amitesh Updated On: Feb 20, 2018 07:27 PM IST

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आप-मुख्य सचिव विवाद : लोकतंत्र के प्रहरी ही उसका गला घोंटने पर उतारू हैं

‘आप’ एक बार फिर निशाने पर हैं. ‘आप’ फिर विवादों में हैं. ‘आप’ की छवि फिर धूमिल हुई है. ‘आप’ की साख पर बट्टा फिर लगा है.

ऐसा होना ही था, क्योंकि आप की काम करने की शैली और छवि ऐसी है कि उस पर सवाल खडे़ होंगे ही. रह-रह कर ऐसा कोई न कोई बवाल आ ही जाता है जो दिल्ली की राजनीति में बवाल मचा देती है. लीक से अलग हटकर चलने की आपकी आदत ने ही आप को फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया.

लेकिन, आप की लीक से हर बार अलग चलने की आदत ही आपको फिर से धरातल पर ला पटक सकती है, शायद इसका अंदाजा आपको नहीं है. वरना इस तरह बेमतलब के बवाल के बजाए आप दिल्ली में शांतिपूर्वक सरकार चला रहे होते.

कभी दिल्ली में एलजी के साथ तनातनी, तो कभी केंद्र सरकार से टकराव, तो कभी पार्टी के भीतर की कलह और खींचतान लगातार आप की छवि को ही तार-तार कर रही है. लेकिन, लगता है कि आप को इसकी उतनी चिंता नहीं है. वरना अपने कैडर्स और विधायकों को इतनी खुली छूट ना देते.

अभी दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ पैदा हुए विवाद की हकीकत जो भी हो, लेकिन, इस विवाद ने फिर से आप की छवि को ही नुकसान पहुंचाया है. सोमवार 19 फरवरी को देर रात दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ कथित तौर पर मारपीट की घटना ने फिर से दिल्ली में भूचाल ला दिया है. आरोप आप के विधायकों पर है.

इस मुद्दे पर आईएएस एसोसिएशन और आप आमने-सामने है. आईएएस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर दिल्ली के उपराज्यपाल से मुलाकात कर अपना विरोध भी जताया है. मामला गृह मंत्रालय तक भी जा पहुंचा है. मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ कथित बदसलूकी के बाद लगातार विरोध जारी है. आखिर देर रात को क्या हुआ था ?

आईएएस एसोसिएशन का कहना है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्य सचिव को अपने आवास पर टीवी विज्ञापन से जुडे मसले पर चर्चा के लिए बुलाया था. इसी दौरान आप के दो विधायकों ने उनके साथ धक्का-मुक्की भी की.

आप के निलंबित विधायक कपिल मिश्रा ने भी इस मामले में ट्वीट कर कहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कॉन्सटिट्यूशनल ब्रेकडाउन की तरफ ले कर जा रहे हैं. कपिल मिश्रा ने इस कथित हमले को पहले से सुनियोजित बताया. मिश्रा ने भी आरोप लगाया कि इस मीटिंग का मकसद राशन का मामला नहीं था, बल्कि इसका मकसद टीवी एड का था.

आईएएस एसोसिएशन की सेक्रेटरी मनीषा सक्सेना ने एलजी से मुलाकात के बाद बताया कि ‘हमने एलजी से मुलाकात कर अपनी बात रखी है. मुख्य सचिव को देर रात बैठक के लिए बुलाया गया था. बैठक में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और विधायक मौजूद थे. जब मुख्य सचिव पहुंचे तो उनके साथ बदसलूकी की गई. पिछले कुछ सालों से इस तरह की चीजों हो रही हैं. अफसरों का अपमान किया जा रहा है.’

अफसरों का प्रतिनिधिमंडल गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी मिलकर अपनी बात रखा. मुख्य सचिव के साथ कथित दुर्व्यवहार के बाद सचिवालय के कर्मचारियों ने भी हंगामा किया है. इस दौरान दिल्ली सचिवालय में आप नेता आशीष खेतान का भी घेराव किया गया. हंगामे के बाद दिल्ली सचिवालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

दिल्ली विधानसभा में बीजेपी विधायक दल के नेता विजेंद्र गुप्ता का आरोप है कि ‘सोमवार रात की मीटिंग में मुख्यमंत्री केजरीवाल के साथ 9 विधायक मौजूद थे, जहां आईएएस को लात मारी, थप्पड़ मारा और गाली दी गई.’

दूसरी तरफ आप का कहना है कि राशन की दूकानों पर मशीन लगाए जाने से करीब ढाई लाख परिवार राशन से वंचित रह गए हैं. लिहाजा, उनकी समस्या को लेकर मुख्य सचिव से बैठक की जा रही थी. आप का आरोप है कि मुख्य सचिव ने इस दौरान कहा कि हम एलजी को जवाब देंगे, आपको नहीं. इसके बाद मुख्य सचिव ने गलत भाषा का इस्तेमाल कर दिया.

उधर आप के विधायक अमानतुल्लाह ने इस मुद्दे पर अपनी सफाई में कहा है कि यह मीटिंग राशन के मुद्दे पर हो रही थी, लेकिन, पहले हाथापाई मुख्य सचिव की तरफ से ही हुई थी. लेकिन, आप की तरफ से हमला जारी है. आप ने पूरे विवाद की जड़ मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को बताने में लगी है. आप के विधायक प्रकाश जारवाल ने दिल्ली के उपराज्यपाल और पुलिस कमिश्नर को खत लिखकर मुख्य सचिव पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.

आप विधायक जारवाल का आरोप है कि ‘राशन की समस्या को लेकर कई बार मैंने मुख्य सचिव से वक्त मांगा लेकिन, उन्होंने हमेशा टाल दिया कि मेरे पास अभी वक्त नहीं है. इसके बाद मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों की समस्या सुनकर मुख्य सचिव के साथ मीटिंग फिक्स की गई जिसमें आठ से दस विधायक थे.’ जारवाल ने अपने पत्र में मुख्य सचिव पर इस दौरान दलित समुदाय के खिलाफ अपशब्द बोलने का आरोप लगाया है. आप विधायक का दावा है कि मुख्य सचिव ने गाली-गलौज करते हुए विधायकों को फर्जी और झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी. आप विधायक ने दिल्ली के मुख्य सचिव के खिलाफ बदसलूकी औऱ दलित समुदाय के खिलाफ कही गई बातों के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

दोनों ही पक्षों में इस मुद्द पर आरोप-प्रत्यारोप जारी है. मुख्य सचिव के समर्थन में आईएएस एसोसिएशन इस मुद्दे को लेकर काफी आक्रामकर रवैया अपनाए हुए है. दूसरी तरफ, आप ने भी इस पूरे मामले को जनता से जुड़े राशन का मामला बताकर उल्टे मुख्य सचिव को ही हालात का जिम्मेदार बता दिया है.

फिलहाल इस घटना की हकीकत जो भी हो, लेकिन, इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से दिल्ली में राज्य सरकार के सीमित अधिकारों और उससे जुड़ी लड़ाई को लेकर जारी तनातनी को सतह पर ला दिया है. पहले भी यह लड़ाई कोर्ट से लेकर सड़क तक जारी थी. लेकिन, शायद इसका अंदाजा किसी को नहीं था कि इस लड़ाई का एक पड़ाव आधी रात को मुख्यमंत्री आवास की चहारदीवारी के भीतर भी होगा.

मुख्यमंत्री आवास के भीतर मीटिंग के बाद पनपे इस नए विवाद ने पूरी लड़ाई को एक ऐसे मुकाम पर ला कर खड़ा कर दिया है, जहां से अब लोकतंत्र की दुहाई देने वाले सभी लोकतंत्र के प्रहरी के बजाए लोकतंत्र का गला घोंटने वाले ज्यादा दिख रहे हैं.

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