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केजरीवाल सरकार के तीन साल (पार्ट-2): क्या हुआ तेरा वादा

Updated On: Feb 13, 2018 08:33 AM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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केजरीवाल सरकार के तीन साल (पार्ट-2): क्या हुआ तेरा वादा

अरविंद केजरीवाल की सरकार के तीन साल विवादों में रहा है. कभी पार्टी के भीतर आक्रोश कभी केंद्र सरकार और एलजी के साथ तनातनी. जिसका कोई हल नहीं निकल पाया है. शुरुआत के दिनों मे ही केजरीवाल से प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव अलग हो गए. तीसरा साल आते-आते कपिल मिश्रा भी बागी हो गए.

केजरीवाल सरकार के कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए. जिसमें एक मंत्री पर रुपया लेने का आरोप लगा तो दूसरे पर फर्जी डिग्री रखने का मामला दर्ज हुआ. हाल-फिलहाल में हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. केजरीवाल अपनी नाकामी छुपाने के लिए कभी केंद्र सरकार पर तोहमत लगाते है. तो कभी एलजी के ऊपर साजिश का आरोप. इस बीच एलजी भी नए आ गए लेकिन केजरीवाल की पटरी नहीं खा रही है. दिल्ली के विकास का काम रूक गया है.

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अपनी किताब में केंद्र सरकार के साथ कैसे काम किया है इसका जिक्र भी किया है. शीला दीक्षित का कहना है कि दिल्ली की सरकार चलाना काफी पेचीदा काम है और केंद्र सरकार के साथ सामंजस्य बैठा कर ही काम किया जा सकता है.

हालांकि अरविंद केजरीवाल के साथ मामला उल्टा है. दिल्ली में पुलिस और जमीन का मामला केंद्र सरकार के हाथ में हैं. केजरीवाल ने सत्तर वादे दिल्ली की जनता से किए थे. जिसमें लोकपाल और महिला सुरक्षा एक बड़ा मसला रहा है.

महिला सुरक्षा में ढिलाई

ये प्रकरण इसलिए महत्वपूर्ण है कि डीटीसी की चलती बस में एक छात्रा के साथ गंदी हरकत की गई है. ये मसला सात फरवरी का है. जिस पर पुलिस कार्रवाई कर रही है. हालांकि दिल्ली से केजरीवाल ने कहा था कि हर बस में मार्शल की ड्यूटी लगायी जाएगी यानी पांच हजार मार्शल. बसों में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएगें.

बस का मसला इसलिए भी अहम है क्योंकि निर्भया कांड को बस में अंजाम दिया गया था. जिसके बाद आप ने तत्कालीन सरकार के खिलाफ काफी बड़ा प्रदर्शन किया था. जिससे शीला दीक्षित सरकार की बुनियाद हिल गई थी. आप का वादा था कि मोबाइल कंपनियों से बात करके हर फोन में पैनिक बटन भी दिया जाएगा. लेकिन सवाल ये उठता है कि बस में मार्शल होते तो डीयू की इस छात्रा को सोशल मीडिया के जरिए मदद की गुहार ना लगानी पड़ती.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली सरकार कह रही है कि महिला सुरक्षा दल बनाया जाएगा. जबकि आप के वादा पत्र में ये कहा गया है कि महिला होमगार्ड को गैरजरूरी कामों से निकाल कर इस काम में लगाया जाएगा. जिनकी तादाद दस हजार होगी. लेकिन ऐसा कब तक होगा इसका जवाब आप सरकार ही दे पाएगी.

दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि हर एक विधानसभा में तकरीबन 2000 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएगें. तकरीबन 140000 कैमरे लगाने की योजना है. निर्भया कांड की बरसी पर केजरीवाल ने खुद माना है कि महिला सुरक्षा के नाम पर अभी ज्यादा कुछ नहीं हो पाया है.

लोकपाल बिल- वादा कुछ किया कुछ

केजरीवाल ने लोकपाल बिल भी पास कर दिया. लेकिन वैसा नहीं जैसा वो मांग करते थे.जब सत्ता में नहीं थे. ये बात उनके साथी योगेंद्र यादव ने कही है. प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि लोकपाल आंदोलन के जरिए ही केजरीवाल सत्ता की सीढ़ियों पर चढ़े लेकिन मजबूत लोकपाल को ठोकर मार दिया.

यही नहीं विधायकों की तनख्वाह चार गुना बढ़ाने की अनुशंसा की गई. केजरीवाल कहा करते थे कि कोई मंत्री सरकारी सुविधा नहीं लेंगे वो सब मसले अब गौण हो गए हैं.

पब्लिक ट्रांसपोर्ट में फिसड्डी

जहां तक परिवहन की बात है. दिल्ली सरकार पिछले तीन साल में कोई वैकल्पिक व्यवस्था पर आगे नहीं बढ़ पायी है. दिल्ली में बस को लाइफ लाइन माना जाता है. शीला दीक्षित सरकार जाने के बाद से कोई एडिशनल बस दिल्ली की सेवा में नहीं जुड़ पाई है. फरवरी में तकरीबन 800 बसों को जोड़ने की योजना दिल्ली सरकार ने पास की है.

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हालांकि दिल्ली सरकार का कहना है कि डीडीए ने बसों को पार्क करने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई. इसलिए बसों को खरीदने की योजना अमल में नही आ पाई है. बसों में फिर से भीड़ बढ़ने लगी है क्योंकि मेट्रो का किराया काफी बढ़ गया है. एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली को तकरीबन 11000 बसों की जरूरत है. 32 लाख यात्री बसों से रोजाना सफर करते हैं.

आप ने वादा निभाया होता तो दिल्ली में तकरीबन 9000 बस होने चाहिए थे. ऑफिस जाने वाले लोगों का कहना है कि ऐप पर आधारित टैक्सी सर्विस से कुछ राहत मिल रही है.

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पूर्ण राज्य का दर्जा

दिल्ली में सरकार बनाने के बाद आप ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है. आप का मानना है कि बिना पुलिस और जमीन के अधिकार के सरकार के पास सीमित पावर है. जिसकी वजह से कई मसलों पर सरकार कुछ नहीं कर सकती है. अरविंद केजरीवाल लगातार कहते रहे है कि पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद ही दिल्ली का विकास होगा.

हालांकि बीजेपी के नेता तंज करते हुए कहते है कि केजरीवाल अपनी नाकामी छुपाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं. हालांकि समय-समय पर बीजेपी और कांग्रेस ने भी दिल्ली को ये दर्जा देने की मांग की है. आप की सरकार एलजी के अधिकार को लेकर कोर्ट में भी गई है. हाई कोर्ट ने एलजी को प्रशासनिक हेड माना है.

पर्यावरण संरक्षा

दिल्ली मे बीते दो सालों से प्रदूषण के स्तर को देखा है. जिसमें नागरिकों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी. इस साल केंद्र सरकार नें दिल्ली के प्रदूषण मुक्त करने के लिए अलग से स्कीम लॉन्च किया है. जिसमें हरियाणा यूपी पंजाब के किसानों को ऐसी मशीन उपलब्ध कराने की बात कही गई है. जिससे वो फसल कटने के बाद खेतों में पराली ना जलाए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली में प्रदूषण के कारण 8 लोग प्रतिदिन जान से जा रहे हैं. जबकि दिल्ली में ग्रीन टैक्स लागू है. सरकार इस टैक्स का सही मद में इस्तेमाल करने में नाकाम रही है. प्रदूषण को कम करने के लिए ऑड-ईवन लागू किया लेकिन जनता के विरोध की वजह से वापस लेना पड़ा. जाहिर है कि ये फॉर्मूला फेल हो गया.

A man holds a poster during a protest against pollution in Delhi, India November 7, 2016. REUTERS/Cathal McNaughton - D1BEULLHZZAA

रोजगार का मुद्दा

दिल्ली सरकार रोजगार को लेकर मेला लगाती रही है. जिसमें प्राइवेट कंपनियां आती है. दिल्ली में आप ने 55000 लोगों की भर्ती का वादा किया था. जिसमें गेस्ट टीचर्स, कॉंन्ट्रैक्ट पर रखे डॉक्टरों और पारामेडिकल कर्मियों को परमानेंट करने का आश्वासन दिया गया था. दिल्ली में तकरीबन 50000 गेस्ट टीचर है. 15000 को स्थायी सेवा में रखने का बिल सरकार ने पास किया था. लेकिन ये मामला एलजी के पास लटका हुआ है. वहीं मोहल्ला क्लीनिक चलाने के लिए गेस्ट कर्मचारी रखे जा रहे हैं.

केजरीवाल का जलवा कायम

दिल्ली में इन तमाम कमियों के बाद केजरीवाल का जलवा कायम है. हालांकि बीस सीटों पर उपचुनाव होने की संभावना है. जिसमें केजरीवाल को जनता का विश्वास हासिल करना है. लेकिन दिल्ली के मुद्दे पीछे छूट गए है.

आंकड़ों की बाजीगरी हर सरकार करती है. वही दिल्ली में हो रहा है. लेकिन केजरीवाल को पता है कि किस मुद्दे को किस तरह भुनाना है. केजरीवाल मंझे हुए नेता हो गए हैं. केजरीवाल के पास हिंदुस्तान के दिल दिल्ली की बागडोर दो साल और रहेगी. चाहे तो वे अपने वायदे पूरे कर सकते है. कम और अधिक ही सही लेकिन इसके लिए भी नीयत साफ होनी चाहिए.

(इस लेख का पार्ट-1 पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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