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केजरीवाल की 'आप' सरकार: 3 साल चली अढ़ाई कोस

अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता का सही आकलन उपचुनाव में होना है लेकिन तीन साल में आप की सरकार का लेखा जोखा जनता के सामने है

Updated On: Feb 12, 2018 10:26 AM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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केजरीवाल की 'आप' सरकार: 3 साल चली अढ़ाई कोस

आम आदमी पार्टी के तीन साल 14 फरवरी को पूरे हो जाएंगे. अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी ने दिल्ली की जनता से कई वायदे किए थे. आप ने सत्तर वायदे दिल्ली की जनता से किया था. जिसमें सस्ती बिजली साफ पानी से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मसले शामिल थे. दिल्ली की जनता ने आप पर भरोसा किया और प्रंचड बहुमत की सरकार दी, जिसमें विपक्ष को पांच फीसदी से कम सीटे मिली.

मोदी सुनामी को केजरीवाल ने दिल्ली में रोक दिया. 15 साल दिल्ली में सरकार चलाने वाली कांग्रेस का सफाया हो गया, जिससे अभी तक कांग्रेस उभर नहीं पाई है. हाल में बवाना में हुए उपचुनाव में फिर से आप ने बाजी मारी है. अभी 20 सीटों पर उपचुनाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता का सही आकलन उपचुनाव में होना है. तीन साल में आप की सरकार का लेखा जोखा जनता के सामने है.

स्वास्थ्य का क्या है हाल?

आप की सरकार ने वायदा किया था कि 900 पीएचसी (प्राइमरी हेल्थ सेंटर) खोलेंगें. दिल्ली के अस्पतालों में 30,000 बेड बढ़ाए जाएंगे. जिसमें 4,000 बेड मैटरनिटी के लिए होंगे. आप की सरकार ने ऐतिहासिक फैसला किया. जिसमें मोहल्ला क्लीनिक खोलने की बात की गई. कई जगह मोहल्ला क्लीनिक खुले भी है. तकरीबन 162 मोहल्ला क्लीनिक काम कर रहे हैं. दिल्ली के जोगाबाइ (ओखला) में मोहल्ला क्लीनिक में मरीजों की संख्या कम दिखाई दी है.

लोगों से बात करने पर पता चला है कि लोगों को पता नहीं है कि मोहल्ला क्लीनिक कहां चल रहा है. दिल्ली सरकार ने कई पैथॉलिजकल टेस्ट भी फ्री किए हैं. दवाएं भी फ्री मिल रही हैं. जिसमें लोग जा रहे हैं और फायदा उठा रहें हैं. इस तरह कई इलाकों में मोहल्ला क्लीनिक खुल नहीं पाए हैं. दिल्ली के मदनपुर खादर वेस्ट में नागरिकों ने बताया कि यहां कोई मोहल्ला क्लीनिक नहीं खुला हैं. कई जगह क्लीनिक खुले लेकिन बंद भी हो गए हैं.

हालांकि दिल्ली सरकार की योजना है कि 1000 मोहल्ला क्लीनिक खोले जाएंगे, जबकि जगह के अभाव में मोहल्ला क्लीनिक का काम रुक गया है. लेकिन अब वक्त कम बचा है कैसे होगा इसका जवाब दिल्ली सरकार के पास नहीं है. लेकिन 2017 में फैले डेंगू को रोकने में सरकार नाकाम रही है. हालांकि दिल्ली सरकार इस पर आरोप एमसीडी पर मढ़ती रही है. लेकिन मोहल्ला क्लीनिक से लोगों को फायदा मिल रहा है. खासकर गरीब लोगों को, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है.

MOHALLA CLINIC

दिल्ली सरकार के हेल्थ मिनिस्टर सतेंदर जैन का कहना है कि जिस टेस्ट के लिए आम आदमी को दो से तीन हज़ार रूपये खर्च करने पड़ रहे थे, वो सरकार ने फ्री कर दिए है. लेकिन सवाल ये है कि 30,000 बेड बढ़ाने के वादे के साथ आई सरकार 2018 तक 3200 नए बेड ही जोड़ पाएगी. हालांकि मैनिफेस्टो के हिसाब से दिल्ली सरकार को काफी काम करना पड़ेगा क्योंकि वक्त सिर्फ 2 साल का बचा है. हालांकि दिल्ली सरकार ने फरवरी 2018 में अस्पतालों में 2500 और बेड जोड़ने की मंजूरी दी है. इसके अलावा 170 करोड़ की लागत से 94 पॉलीक्लीनिक खोलने की भी योजना को हरी झंडी दी है.

पानी-पानी रे

दिल्ली में साफ पीने के पानी की समस्या है. दिल्ली में आप ने वादा किया था. हर घर को साफ पानी देंगे. हालांकि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का दावा है कि 2018 के अंत तक हर घर को पानी मिल जाएगा. लेकिन अभी भी कई अनाधिकृत कॉलोनियां साफ पीने का पानी से महरूम हैं. वहीं दिल्ली सरकार ने दावा किया है 1200 अनाधिकृत कॉलोनियों को पानी दिया जा चुका है. 200 नए कालोनी को जोड़ने की योजना है. जैतपुर जैसी अनाधिकृत कॉलोनी में जाने पर पता चला कि यहां दिल्ली जल बोर्ड के पानी कोई अता पता नहीं है.

जैतपुर बदरपुर विधानसभा का हिस्सा है. वहीं खादर में लोग बता रहे हैं कि पुरानी पाइपलाइन में ही नया लाइन जोड़ दिया गया हैस जिससे साफ पीने का पानी की जगह सीवर का पानी भी आने लगा है. हालांकि दिल्ली सरकार ने बताया है कि 20 किलोलीटर मुफ्त पानी की योजना का लाभ साढ़े बारह लाख परिवार को लाभ मिला है. वहीं यमुना नदी की सफाई पर ज्यादा काम नहीं हो पाया है. एनजीटी ने दिल्ली सरकार को कई बार फटकार लगाई है. हालांकि आप के मैनिफेस्टो में यमुना को साफ करने और रिवर फ्रंट बनाने का वादा किया गया था.

बिजली पर हाय-हाय

आप ने वायदा किया था कि बिजली का बिल आधा हो जाएगा. बिजली वितरण कर रही कंपनियों का सीएजी ऑडिट कराई जाएगी. दिल्ली में खुद पॉवर जनरेशन यूनिट लगेगी. सोलर पॉवर पर जोर दिया जाएगा. जहां तक बिजली का बिल है- 400 यूनिट से कम इस्तेमाल करने वालों को लाभ मिल रहा है. जिनकी संख्या ज्यादा नहीं है. एक बार 400 यूनिट पार होने पर मैक्सिमम टैरिफ देना पड़ रहा है. हालांकि पहले सब्सिडी का स्लैब था. पहला 0 -200,दूसरा 200-400 और 400-800 का अलग स्लैब था, जिससे मिडिल क्लॉस को भी राहत मिल रही थी. खासकर गर्मियों में एसी का इस्तेमाल करने वाले घरों को राहत थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है.

कांग्रेस के पवन खेड़ा ने आरोप लगाया है कि ’कांग्रेस के समय बिजली का बिल ना भरने की दुहाई देने वाले केजरीवाल ने वास्तव में बिजली मंहगी कर दी है. जिससे उपभोक्ता को नुकसान हो रहा है. सिर्फ उसी उपभोक्ता को फायदा मिल रहा है जो बिजली के नाम पर पंखा बल्ब इस्तेमाल कर रहा है.‘ वहीं सीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लीन एनर्जी के मसले पर दिल्ली सरकार ने ज्यादा काम नहीं किया है. हालांकि ये संभावना है कि 2021 तक दिल्ली में पावर की डिमांड गर्मियों मे 12000 मेगावॉट तक पहुंच सकती हैं.

कैसा है शिक्षा पर परफार्मेंस

आप ने दिल्ली की जनता से बेहतर शिक्षा मुहैया करने का वादा किया था, जिसमें प्राइवेट स्कूल की फीस को रेगुलेट करना सबसे अहम था, जिसमें केजरीवाल सरकार कामयाब नहीं हो पाई है. दिल्ली में प्राइवेट स्कूल की फीस लगातार बढ़ रही है. जो आदमी के पहुंच से बाहर हो रही है. जिनके दो बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे है, उनकी आर्थिक हालत चरमरा रही है. जिस पर दिल्ली सरकार को ध्यान देने की जरूरत है.

आप ने दिल्ली में 20 नए डिग्री कॉलेज खोलने के लिए भी कहा था, जिस पर ज्यादा पेशो-रफ्त नहीं हो पाई है. सरकारी स्कूल को पब्लिक स्कूल की तरह बेहतर बनाना का भी दिल्ली की जनता से कहा गया था, जिसमें सरकार ने कुछ हद तक कोशिश की है. दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नर्सरी के क्लास शुरू किए गए हैं. वहीं स्कूलों की बिल्डिंगों को काफी सुधारा गया है.

उपमुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में मंगलम के पास बना स्कूल काफी अच्छा हो गया है. पहले इसकी हालत काफी जर्जर थी. लेकिन बाकी जगह अभी बहुत काम करने की जरूरत है. खासकर टीचिंग स्टैंडर्ड बढ़ाने के लिए सरकार को कुछ नया तरीका अख्तियार करना होगा क्योकि 2018 के प्रीबोर्ड के रिजल्ट काफी खराब आए हैं. दिल्ली का शिक्षा विभाग टीचर्स के खिलाफ एक्शन ले रहा है लेकिन ये नाकाफी है.

सरकार को ये भरोसा दिलाना होगा कि टीचर्स स्कूल को तफरीहगाह न समझे. नर्सरी एडमिशन का दौर चल रहा है. ज्यादातर पैरेंट्स बच्चों को प्राइवेट स्कूल में दाखिला कराने के लिए कोशिश कर रहे हैं. दिल्ली सरकार ने क्लास में सीसीटीवी लगाने का फैसला किया है, जिसकी आलोचना कई लोग कर रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि स्कूल में बच्चो में कॉन्फिडेंस बढ़ाने का प्रयास होना चाहिए लेकिन ऐसा करने से बच्चे हमेशा डरे रहेंगे, जिससे फायदा होने की जगह नुकसान होने की ज्यादा गुंजाइश है.

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