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अरविंद केजरीवाल ने क्यों अटका रखी है आशुतोष और विश्वास की सांस?

अन्ना आंदोलन के समय से ही कुमार, केजरीवाल और सिसोदिया विश्वस्त सहयोगी रहे हैं, ऐसे में देखा जाए तो कुमार विश्वास की राज्यसभा के लिए दावेदारी सबसे मजबूत होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jan 02, 2018 02:57 PM IST

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अरविंद केजरीवाल ने क्यों अटका रखी है आशुतोष और विश्वास की सांस?

दिल्ली के तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनावों को लेकर आम आदमी पार्टी के भीतर एक बार फिर से राजनीतिक गर्माहट दिखाई देने लगी है. कुछ दिन पहले ही तीन नामों में से एक नाम संजय सिंह का तय कर लिया गया था. वहीं, मंगलवार को दो और नए नाम सामने आने से टिकट की चाह रखने वाले नेताओं की घड़कनें एक बार फिर से अटक गई हैं.

पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर अब यह कहा जा रहा है कि पार्टी ने संजय सिंह के अलावा और जिन दो नामों को फाइनल किया है, वह आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को संसद में घेरने का काम करेंगे. साथ ही देश के व्यापारी वर्ग को अपने पक्ष में जोड़ने का भी काम करेंगे.

एनडी गुप्ता और सुशील गुप्ता को राज्यसभा भेजने की हो रही चर्चा

एक नाम जो सामने आया है वह एनडी गुप्ता का है. एनडी गुप्ता पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और फिलहाल द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष हैं. एनडी गुप्ता के बारे में कहा जाता है कि इनको भारतीय इकोनॉमी के बारे में अच्छी जानकारी है. पिछले दिनों ही वित्तमंत्री अरुण जेटली ने एक कार्यक्रम में इनके काम की तारीफ की थी.

Arvind Kejriwal, head of AAP and Chief Minister of Delhi, walks past his car as he arrives at the NCC camp in New Delhi

वहीं सुशील गुप्ता के बारे में कहा जाता है कि वह एक बिजनेसमैन हैं, जो पार्टी के लिए फंड इकट्ठा करेंगे. सुशील गुप्ता इससे पहले कांग्रेस से जुड़े थे और कुछ ही दिन पहले उन्होंने आप की सदस्यता ली थी. इनके बारे में कहा जा रहा है कि पश्चिमी दिल्ली के एक आप विधायक के करीबी रिश्तेदार हैं. इनको लेकर कई दिनों से पार्टी का एक तबका लामबंदी करने में लगा हुआ था.

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खासकर अग्रसेन अस्पताल और अग्रसेन चैरिटी के तहत कई स्कूल-कॉलेज चलाने वाले सुशील गुप्ता पार्टी के लिए फंडिंग का काम पहले से करते आ रहे हैं. पार्टी को अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में फंड की जरुरत होगी, जिसे जुटाने में सुशील गुप्ता को सक्षम माना जा रहा है. इसके साथ ही इनकी जाति भी आशुतोष की उम्मीदवारी पर भारी पड़ी.

राज्यसभा के लिए पार्टी के बाहर उम्मीदवार खोज रही थी आप

पिछले कुछ दिनों की मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो राज्यसभा सीट की उम्मीदवारी को लेकर आम आदमी पार्टी के द्वारा कई बाहरी लोगों से संपर्क करने की बात सामने आ चुकी है. आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, बीजेपी से नाराज चले रहे देश के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, बीजेपी के ही एक और अंसतुष्ट नेता अरुण शौरी, देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर, सुप्रीम कोर्ट के ही एक नामी वकील गोपाल सुब्रमण्यम सहित कई और नाम लिए जा रहे थे. इन लोगों के बारे में कहा जा रहा है कि इन लोगों ने आम आदमी पार्टी के प्रपोजल को गंभीरता से नहीं लिया.

Kejriwal-vishwas

पिछले कुछ दिनों से कुमार विश्वास का बगावती रुख पार्टी नेताओं को पसंद नहीं आया और उनका नाम आखिरकार खारिज कर दिया गया. पिछले दिनों ही विश्वास के कुछ समर्थक उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की मांग करते हुए आप के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए थे.

कुमार विश्वास का पत्ता कटना तय

आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं को कुमार विश्वास का बीजेपी नेताओं के साथ नजदीकी संबंध होना भी खटक रहा था. पिछले दिनों ही एक वरिष्ठ पत्रकार जिनकी बीजेपी नेताओं के साथ निकटता जगजाहिर है, उनकी बेटी की शादी के कार्ड में क्या लिखा जाएगा यह कुमार विश्वास ने तय किया था. इस बात को लेकर भी अरविंद केजरीवाल कुमार विश्वास से नाराज चल रहे थे.

अब सवाल यह है कि पार्टी ने क्यों संजय सिंह का राज्यसभा टिकट फाइनल कर दिया और कुमार विश्वास की चाहत को नजरअंदाज कर दिया. पिछले छह महीनों से कुमार विश्वास के हर कदम की पार्टी में अनदेखी की जा रही थी. कुमार विश्वास भी इस अनदेखी को सार्वजनिक मंचों और अपने ट्वीट्स के जरिए जता भी चुके थे.

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जानकारों का मानना है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी के लिए किसी एसेट्स से कम नहीं हैं. खासकर पार्टी के दो बड़े नेताओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के मित्र भी हैं. अन्ना आंदोलन के समय से ही कुमार विश्वास, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया विश्वस्त सहयोगी रहे हैं. ऐसे में देखा जाए तो कुमार विश्वास की राज्यसभा के लिए दावेदारी सबसे मजबूत होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

kumarvishwas

कोई बड़ा नेता अपने समकक्ष दूसरे नेताओं को पनपने नहीं देना चाहता

पार्टी को करीब से जानने वाले एक ‘आप’ नेता फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, देखिए इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है कि कुमार विश्वास एक अच्छे वक्ता हैं. पार्टी के लिए सभा में भीड़ जुटाने से लेकर भीड़ को बांधे रखने की जो कला उनमें है वह किसी आप नेता में नहीं है. कुमार विश्वास का मीडिया फ्रेंडली होना भी आप के दूसरे नेताओं को नागवार गुजरा. देखा जाए तो आंदोलन से पैदा हुई यह पार्टी भी उस बीमारी से ग्रसित हो गई जो दूसरे पार्टियों में सालों से चली आ रही है. कोई बड़ा नेता अपने समकक्ष दूसरे नेताओं को पनपने नहीं देना चाहता है. शायद अरविंद केजरीवाल भी इस बीमारी से ग्रसित हो गए हैं.’

अगर देखा जाए तो इस नेता के कही बात में कुछ सच्चाई जरूर नजर आती है. पिछले चार-पांच सालों में पार्टी के कई संस्थापक सदस्यों को अरविंद केजरीवाल ने या तो बाहर का रास्ता दिखा दिया है या वो पार्टी के काम करने की तरीकों से नाराजगी जता कर पार्टी छोड़ चुके हैं. शांति भूषण, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, आनंद कुमार, कपिल मिश्रा, शाजिया इल्मी और विनोद कुमार बिन्नी जैसे कई नाम हैं जो अब पार्टी में नहीं हैं.

हिम्मक है तो रिजाइन देकर पार्टी के लिए काम करें केजरीवाल

आप के एक पूर्व नेता ने फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल लाख कहें कि पद के लालची व्यक्ति को पार्टी में नहीं रहने देंगे. अरविंद केजरीवाल में हिम्मत है तो मुख्यमंत्री पद से रिजाइन देकर पार्टी की बेहतरी के लिए काम करें. सत्येंद्र जैन को क्यों पार्टी में रख रखा है. अरविंद केजरीवाल खुद चापलूस हैं इसलिए अपने इर्द-गिर्द चापलूसी करने वाले नेताओं को पसंद करते हैं. पार्टी के अंदर जो अरविंद केजरीवाल की भाषा बोले उसके अंदर पद की लालच नहीं और जो अरविंद केजरीवाल की भाषा नहीं बोले वह लालची.’

गौरतलब है कि दिल्ली में राज्‍यसभा की तीन सीटों के लिए 16 जनवरी को चुनाव होंगे. वहीं इसके लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख पांच जनवरी है. 70 सदस्‍यों वाली दिल्‍ली विधानसभा में कागज पर आप के 66 विधायक हैं. पार्टी के लगभग आधा दर्जन विधायक या तो पार्टी से निलंबित हैं या फिर नाराज चल रहे हैं. इसके बावजूद पार्टी को तीनों सीटें जीतने में कोई परेशानी नहीं होगी.

Arvind Kejriwal (R), chief of Aam Aadmi (Common Man) Party (AAP), shouts slogans after taking the oath as the new chief minister of Delhi as his deputy chief minister Manish Sisodia watches during the swearing-in ceremony at Ramlila ground in New Delhi February 14, 2015. The two-year-old anti-graft party took office in the Indian capital on Saturday, promising to fight divisive politics in a challenge to the federal government of Narendra Modi that has faced criticism for attacks on churches and other minorities. REUTERS/Anindito Mukherjee (INDIA - Tags: POLITICS) - RTR4PJX5

पार्टी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी नाम का एलान नहीं किया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया दिल्ली से बाहर छुट्टियां मना रहे हैं. 2 जनवरी शाम तक दोनों के दिल्ली आने की संभावना है. 3 जनवरी और 4 जनवरी को पीएसी की बैठक रखी गई है. ऐसा कहा जा रहा है कि 4 जनवरी शाम को पार्टी तीन प्रत्याशियों के नामों का एलान करेगी और 5 जनवरी को नामंकन दाखिल किया जाएगा.

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