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अशोक गहलोतः पहली बार टिकट मांगा, नहीं मिला, फिर आज तक नहीं मांगा

इंदिरा गांधी ने उनकी क्षमता को पहचाना और साल 1980 हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट मिला

Updated On: Feb 09, 2018 04:25 PM IST

FP Staff

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अशोक गहलोतः पहली बार टिकट मांगा, नहीं मिला, फिर आज तक नहीं मांगा

शुक्रवार को राजधानी जयपुर में कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम अशोक गहलोत पत्रकारों से बतिया रहे थे. एक ने पूछा कि अगर पार्टी कहती है तो क्या आप तीसरी बार सीएम बनेंगे? हंसते हुए गहलोत ने कहा पहली बार सन् 1977 में जब उनकी उम्र 22 साल थी तब विधानसभा चुनाव के वक्त टिकट मांगा था. नहीं मिला. तब से आज तक न तो टिकट मांगा न पद.

उस साल विधानसभा चुनाव में 200 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी 44 सीटों पर सिमट गई थी. एनएसयूआई के इस युवा नेता को ज्यादा वक्त इंतजार नहीं करना पड़ा. इंदिरा गांधी ने उनकी क्षमता को पहचाना और साल 1980 हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट मिला. 25 साल की उम्र में वह लोकसभा के दरवाजे पर कदम रख चुके थे.

न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक संवाददाताओं ने बातचीत के दौरान अशोक गहलोत से दो बार पूछा कि क्या वे अजमेर, अलवर और मंडलगढ़ उपचुनाव में पार्टी की जीत के बदले पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित होने की उम्मीद कर रहे थे? इसके जवाब में ही उन्होंने इन पुरानी बातों का जिक्र किया.

गहलोत ने का, 'मैंने किसी भी पद के लिए पार्टी से कभी नहीं कहा है. केवल एक बार, 1977 में, मैंने पार्टी को विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए एक टिकट के लिए कहा. लेकिन तब से, मैंने कभी वापस नहीं मांगा.'

पार्टी का एक धड़ा सचिन पायलट के नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर रहा  

उन्होंने कहा 'मैं एक विधायक, एमपी, पीसीसी प्रमुख, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री भी कई बार रहा हूं, लेकिन मैंने कभी भी इन पदों में से किसी के लिए पैरवी नहीं की है. अब भी, मैं न तो पार्टी से मुख्यमंत्री उम्मीदवार के पद के लिए कहूंगा और न ही मैं इसके लिए लॉबी करूंगा. पार्टी की विचारधारा मेरा आदर्श है. पार्टी मुझे जो भी ज़िम्मेदारी देती है, मैं इसे जारी रखने की कोशिश करता हूं.'

हाल ही में राजस्थान में लोकसभा के एक और विधानसभा के दो सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत हासिल की है. चुनावी विश्लेषकों ने इसे सेमीफाइनल चुनाव करार दिया. इस जीत के साथ युवा नेता और राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट की स्थिति मजबूत होती दिख रही है.

हालांकि राज्य कांग्रेस का एक धरा इसका पूरा श्रेय सचिन पायलट को नहीं देना चाहता है. वह सीएम के पद पर सचिन पायलट को स्वीकार करने की स्थिति में भी नहीं है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दोनों धड़ों के लोग राहुल गांधी से संपर्क कर सकते हैं.

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