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जनता के लिए AAP का ऑप्शन बनेगी स्वराज इंडिया!

स्वराज इंडिया: भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से एक औऱ नई पार्टी का उदय.

Updated On: Nov 18, 2016 12:27 PM IST

Amitesh Amitesh

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जनता के लिए AAP का ऑप्शन बनेगी स्वराज इंडिया!

भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के बाद 26 नवंबर 2012 को आम आदमी पार्टी (आप) का गठन हुआ था.

लेकिन, उस वक्त भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जुड़े सभी लोग अरविंद केजरीवाल के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल नहीं हुए थे.

इस आंदोलन से जुड़े दूसरे लोग आम आदमी पार्टी से अलग हुए धड़े के साथ आ गए हैं.

आप से अलग होकर स्वराज अभियान के बैनर तले स्वराज इंडिया नाम से पार्टी बनाई है. इसका ऐलान 2 अक्टूबर को किया गया था.

स्वराज अभियान के तहत एक साल तक आंदोलन चला. इसके बाद योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण ने स्वराज इंडिया नाम की पार्टी बनाने का ऐलान किया.

इस पार्टी का मूलमंत्र राजनीति में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, योगेन्द्र यादव पार्टी की जिम्मेदारी संभालेंगे. प्रशांत भूषण स्वराज अभियान (गैर राजनीतिक संगठन) का काम देखेंगे.

इसका मकसद पहले की तरह जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर अभियान जारी रखना है.

प्रशांत भूषण के मुताबिक,'स्वराज अभियान इस दिशा में अपना काम जारी रखेगा. साथ ही स्वराज अभियान चार-सूत्री एजेंडे पर काम करता रहेगा.'

देश भर के करीब 400 प्रतिनिधियों की मौजूदगी में स्वराज इंडिया के नाम का ऐलान हुआ.

इस बात पर जोर दिया गया कि स्वराज इंडिया कैसे अपने मिशन को लेकर आगे बढ़ेगा.

पूर्व कानून मंत्री और वकील शांति भूषण ने स्वराज इंडिया पार्टी के संस्थापक सदस्य के तौर पर सबसे पहले हस्ताक्षर किया.

उन्होंने कहा, 'नई पार्टी बनाने को लेकर कोई संकोच नहीं था.'

भूषण ने फर्स्टपोस्ट से कहा, 'कुल प्रतिनिधियों में से करीब 93 फीसदी ने अलग राजनीतिक दल बनाने की सहमति दी.'

उन्होंने कहा, 'हम जल्द ही चुनाव आयोग में पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन जमा करा रहे हैं.'

उद्देश्य

नई पार्टी बनाने का मकसद हर तरह के मूल्यों की रक्षा करना है.

देश में लोकतंत्र, विविधता और बोलने की आजादी पर हमला हो रहा है. अब इन्हें बचाने की जरुरत है.

भूषण ने कहा, 'इस वक्त आइडिया आफ इंडिया के सामने एक बड़ी चुनौती है' कोई भी दल या ताकत इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार नहीं है.'

उन्होंने कहा, 'अब स्वराज इंडिया इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है. इस राजनीतिक खालीपन को स्वराज इंडिया ही भर सकता है.'

स्वराज इंडिया की खासियत है कि पारदर्शिता दिखाने के लिए नई पार्टी को आरटीआई के दायरे में रखा जाएगा.

लोकतांत्रिक प्रणाली के आधार पर उम्मीदवारों का चयन होगा. सबसे अहम है कि पार्टी में किसी भी मंच पर सबको बोलने की आजादी होगी.

एजेंडा

स्वराज इंडिया ने 'स्वराज दर्शन' नाम से एक दस्तावेज जारी किया है. इसमें 21वीं सदी में भारत को लेकर पार्टी के दृष्टिकोण का जिक्र किया गया है.

स्वराज अभियान के नेशनल एक्जक्यूटिव के सदस्य अनुपम सिंह ने कहा, “ये दस्तावेज हमारे  मार्गदर्शक हैं, इसके सिद्धांतों के आधार पर आगे बढ़ना है.'

दूसरे दलों से अलग स्वराज इंडिया ने खुद को आरटीआई के तहत लाने का फैसला किया है. साथ ही अपना एक सूचना अधिकारी (पीआईओ) भी बनाया है.

एक तरफ जहां सभी राजनीतिक दलों में एक व्यक्ति के पास ही सत्ता केन्द्रित होती चली जा रही है.

वहीं, स्वराज इंडिया सामूहिक नेतृत्व को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

समर्थन का आधार क्या होगा

स्वराज इंडिया के समर्थकों के मुताबिक, 'इंडिया एगेंस्ट करप्शन आंदोलन से जुड़े लोग जो किसी पार्टी से नहीं जुड़े थे, वे इस पार्टी में शामिल हो रहे हैं.'

ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है जो आदर्शवादी हैं लेकिन, किसी दल से जुड़े नहीं हैं. वे सभी स्वराज इंडिया के साथ हैं. खासतौर से राजनीति में बदलाव चाहने वाले युवा इसमें शामिल हो रहे हैं।

यहां तक कि दिल्ली में AAP के वॉलेंटियर्स भी नई पार्टी में शामिल हो रहे हैं.

साउथ-ईस्ट दिल्ली के एक सीनियर वॉलेंटियर ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि दिल्ली से कुछ युवा कार्यकर्ता स्वराज इंडिया में शामिल हो गए हैं.

आप से अलग हुए ज्यादातर लोगों ने स्वराज इंडिया ज्वाइन करने का फैसला किया है.

आम आदमी वोलनटियर्स एक्शन मार्च नाम का एक ग्रुप पहले ही आप से अलग हो चुका है. इसके संयोजक करण सिंह हैं.

सिंह ने कहा, 'हमारे और स्वराज अभियान का आदर्श लगभग एक जैसा है. आने वाले दिनों में हमने स्वराज इंडिया के साथ जुड़ने का विकल्प खुला रखा है'.

आम आदमी पार्टी के एक नेता ने कहा, 'नई पार्टी का हम पर असर नहीं होगा. हमने दिल्ली के मतदाताओं में पैठ बना ली है.

पंजाब और गोवा में भी हमें खूब समर्थन मिल रहा है.'

स्वराज इंडिया बनने का घटनाक्रम

  • मार्च 2015- योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, अजित झा और आनंद कुमार को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते आप से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
  • आप के संस्थापक सदस्यों में शामिल और पार्टी के प्रबुद्ध चेहरे माने जाने वाले इन लोगों ने पार्टी आलाकमान के उपर सवाल खड़े किए थे.
  • 14 अप्रैल 2015 – योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण ने स्वराज अभियान का गठन किया जिसे राजनीतिक दल की बजाए एक नए आंदोलन की संज्ञा दी गई.
  • मई 2015 – स्वराज अभियान आंदोलन के लिए एक 29 सदस्यीय टीम बनाई गई, जिसका मकसद ‘जय किसान अभियान स्वराज यात्रा’ को सफल बनाना था.
  • 31 जुलाई 2016- प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव ने 2 अक्टूबर को नई पार्टी का ऐलान किया, जिसे सभी दलों के विकल्प के तौर पर लाया जाएगा.
  • 2 अक्टूबर 2016- स्वराज अभियान ने स्वराज इंडिया नाम से नई पार्टी का ऐलान किया.
 

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